गुरुवार, 30 सितंबर 2010

क्या है 'धर्म' ?


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मेरे 'धर्मपरायण' मित्रों,



क्या है धर्म ?


क्या है धर्म ??


क्या है धर्म ???


क्या है धर्म ????


कुछ और कहने की जरूरत है क्या मुझे ?


बड़े ही खुशकिस्मत हैं वह सब, जो धर्म की यह व्याख्या करते हैं !!!





आभार!





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21 टिप्‍पणियां:

  1. फिर पंगा ....
    अब अली सा को बुलाओ , सबेरे हाल देखने आऊँगा ! शुभ रात्रि !

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  2. अभी आपकी सुनने को यहाँ कोई नहीं है. सभी "धर्मपरायण मित्र" अभी फैसले का गम हल्का कर रहे हैं. :)

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  3. अपने-२ कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक पालन करना ही धर्म है

    जैसे की एक डॉक्टर का धर्म है अपने मरीज की सही और अच्छी चिकित्सा करना

    पुलिस का धर्म है अपराधियों पर अंकुश रखना

    सैनिक का धर्म है अपने देश की रक्षा करना

    न्यायधीश का धर्म है निष्पक्ष होकर सही और गलत का फैसला करना और सबसे महत्वपूर्ण न्याय करना

    माता-पिता का धर्म है अपने संतान की अच्छी परवरिश करना और उन्हें अच्छी शिक्षा दिलवाना

    संतान का धर्म है अपने माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना

    आदि आदि

    कहने का मतलब सिर्फ यही है की अपने-२ कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक पालन करना ही मनुष्य का धर्म है
    उम्मीद है उपरोक्त उदहारणओं के माध्यम से मैं अपनी बात रखने में सफल हुआ हूँ

    मेरे मुताबिक़ तो यही सब और इंसानियत ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है ,बाकी के धर्म मनुष्य द्वारा स्वयं रचित किये गए हैं


    महक

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  4. अपना धर्म सतीश जी निबाह गये , आपका आपनें लिख डाला , मेरा मेरी :) में है !

    पर इन सबके सिवा 'जो' होता होगा / होता है , मैं उसका एक्सपर्ट नहीं हूं और होना भी नहीं चाहता !

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  5. व्यापक विषय है, चर्चा भी व्यापक हो।

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    @ सभी विद्वान पाठकगण,

    न जाने क्योँ मुझे लग रहा है कि आप पोस्ट मेँ दिये/छिपे 4 लिँकोँ को पढे बिना ही अपनी बात कह रहे हैँ।
    :)


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  7. हैं !!!!!!!!!!!!, इस पोस्ट में लिंक भी थे , पर कहाँ ????, मुझे तो नहीं दिखाई दिए ?????

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  8. आपने ये जो लिंक्स दिए हैं उन्हें और सुरेश जी की पोस्ट्स पढके मूल प्रश्न तो बार-२ यही रह जाता है की हमारा मीडिया इन ख़बरों को प्रमुखता से तरजीह क्यों नहीं देता ???

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  9. जब से ब्लॉग जगत में आई हु तब से समझ गई हु की धर्म के बारे में मुझसे बड़ा अज्ञानी कोई नहीं है यहाँ तो इतने बड़े बड़े ज्ञानी है की क्या कहू ?

    धर्म की व्याख्या की जिस रूप में आप सोच रहे है और लिक में बताया जा रहा है उसको मानने वालो की संख्या एक अरब से ऊपर की देश की आबादी में कितनी है रुकिए उंगलियों पर गिन कर बताती हु ..............

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  10. कब तक कोसोगे अतिती उच्चता के कर्म।
    कब तक पोषोगे छोटन-उत्पात के मर्म।
    कर्तव्य क्या बस बडन के लिये ही है,
    शायद उसी को कहना चाह्ते है आप धर्म॥

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  11. एक छोटी सी परिभाषा दे रहा हूँ [एक नजरिया है बस ]

    मानवता है धर्म [सबसे आसान , सबसे स्पष्ट , सबसे आधुनिक , अजर , अमर , भाषाओँ के परे ]
    अगर कोई पीड़ित रोता दिखता है और आपको उससे सुख में बाधा पहुँचती है तो मेरी नज़रों में आप धार्मिक हैं
    इबादत या पूजा करते हुए आप पडोसी पर हो रहे अन्याय को इग्नोर करते हैं सिर्फ इसलिए की आप पूजा या इबादत कर रहें है तो आप धार्मिक नहीं है"

    धर्म वो है जिसके आदेशानुसार की गयी हिंसा भी स्वीकार की जाती है क्योंकि उससे धार्मिक[ऊपर दी डेफिनेशन के अनुसार ] मानवों की रक्षा या उन तक सन्देश पहुँचता है

    धर्म वो है जो मन की अवांछित स्वतंत्रता को रोकता है
    धर्म वो है जिसके हर क्रियाकलाप में विज्ञान छुपा हो
    धर्म वो भी है जिसमें संस्कार, युक्ति [कथित छल ] का पूर्ण प्रशिक्षण हो

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  12. "मानवता एक धर्म " सुनकर अब हंसी आती है लोगों को .....क्योंकि इस व्यापक धर्म को सही अनुयायी नहीं मिले

    जब भी आप अपने धर्म [जिस भी धर्म से आप हैं ] को सही ढंग से फोलो करेंगे
    अनजाने में इस धर्म में शामिल हो जायेंगे
    अतः यह विश्व का सबसे व्यापक धर्म होना चाहिए

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  13. किसी बहुत ही बेहतर धर्म का इंसान भी उस धर्म में फैली अफवाहों , मिलावट से दिग्भ्रमित हो सकता है इस स्थिति में यही धर्म [मानवता ] श्रेष्ठ है

    इसमें कोई भी संशय हो तो अवश्य पूछिए
    मैं अपनी अल्प बुद्दी से उत्तर देने का प्रयास करूंगा

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  14. मित्र प्रवीण
    अब आप बताइये [शब्दों में ] इन न्यूज से आप क्या समझे??:) जो हमें समझाना चाह रहें हैं??:) हमें भी तो आपका टेस्ट लेना है ना ?? :)
    हमारा टेस्ट तो हो गया :))

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  15. @ "मानवता एक धर्म " सुनकर अब हंसी आती है लोगों को .....क्योंकि इस व्यापक धर्म को सही अनुयायी नहीं मिले
    हर धर्म में यह प्रमुखता से शामिल है मगर गलत लोगों/ ज्ञानियों द्वारा अपनी अपनी व्यक्तिगत समझ द्वारा की गयी विवेचना के कारण यही प्रमुख तत्व छिप गया और समय स्थान और तात्कालिक परिश्तियों के कारण विद्रूप छवि सामने आती गयी ! अगर सही तरह से पारिभाषित धर्म का अनुसरण करें तो वाकई मानवता धर्म में ही शामिल हो जायेंगे फिर भले ही हमारे अपने , हमें प्रवीण शाह की तरह अधार्मिक अथवा काफिर कहें !
    बहुत बढ़िया गौरव ..आनंद आ गया सुनकर

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    मित्र गौरव,

    मेरे विचार में इस बात में अगाध श्रद्धा व विश्वास रखना कि... 'मुझ से अलग धार्मिक विश्वास व मान्यताओं को रखने वाला अथवा धर्म को न मानने वाला शख्स भी यदि ईमानदारी भरा व न्यायपूर्ण जीवन जीये तो वह भी वह सब कुछ पायेगा, जो मेरे धर्म का पूरी तरह से पालन करने व ईमानदार-न्यायपूर्ण जीवन जीने वाला मेरा हम-मजहब पायेगा'...

    मेरे द्वारा दिये गये लिंकों में वर्णित लोग ऐसी ही सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं... वह आत्मविश्वासी हैं... और शायद इसीलिये दूसरे धर्म का धर्मस्थल अपने श्रम व साधनों से बना रहे हैं... उन्हें ऐसा करने से अपने उपास्य के कुपित या रूष्ट होने का कोई खौफ नहीं... उनके लिये सभी धर्म-पंथ नदी को पार करने की भिन्न-भिन्न नौकायें मात्र हैं... यह महत्वपूर्ण नहीं कि आप किस नाव के सवार हैं... बल्कि महत्वपूर्ण है पार जाना, पार जाने का सफर, और अपने हमसफरों का ख्याल रखना भी...

    शायद यही है 'धर्म'... या फिर मैं गलत हूँ... सही होने का कोई भ्रम न मैंने पाला है न पालना चाहता हूँ...

    कुछ इसी लिये पूछ ही लिया "क्या है धर्म"?


    ...

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  17. @मित्र प्रवीण,

    अजी बात सही गलत या भ्रम की नहीं है , लेखक के विचार ही ना हों तो उसका पूरा पूरा इरादा क्या है, कैसे पता लगेगा बताओ ?? :)

    अब हुयी ना पोस्ट पूरी ... आप तो बहुत ही छोटी पोस्ट बना के हमें उलझा रहे थे :) ये नहीं चलेगा जी :)

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  18. परहित सरिस धर्म नहि भाई परपीड़ा सम नहिं अधमाई

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