बुधवार, 29 सितंबर 2010

ये सर्वहारा के लिये संघर्ष करते योद्धा हैं या भारत के दुश्मनों के साथ मिले हुए गद्दार ?... पाठक तू निर्णय कर इसका !!!



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मेरे 'देशभक्त' मित्रों,

लंबी चौड़ी कोई बात नहीं आज... क्रोधित हूँ मैं...

यह बयान देखिये...


"We appeal to the Indian masses to respect the Kashmiris demand for an independent country," the spokesperson told HT on Friday. He said for the last three months, Kashmiris have been fighting their war for independence sans guns or support from any terrorist groups."

"The Abdullahs -- Sheikh, Farooq and Omar Abdullah--have failed to win the Kashmiris hearts in the last 65 years," he said, strongly justifying repeal of the Special Forces Arms Act, and appealing to end killing of the young 'freedom fighters.'

"No country has succeeded in suppressing the voices of nationalist forces with guns," he said from an undisclosed location , adding, the valley is described at international forums as either India or Pakistan occupied Kashmir"
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यह सब कोई पागल अलगाववादी कश्मीरी/इस्लामी जेहादी नहीं कह रहा है... न ही यह बयान किसी पाकिस्तानी कूटनीतिज्ञ का है...

यह कहना है नक्सलियों के सर्वोच्च नेताओं मे एक कोटेश्वर राव उर्फ 'किशन जी' का...

अब आप ही बताओ...

ये सर्वहारा के लिये संघर्ष करते योद्धा हैं...

या भारत के दुश्मनों के साथ मिले हुए गद्दार ?...

कहाँ हो नक्सलियों के विरूद्ध कारवाई को शोषित-गरीबों का दमन बताती, अखबारों और पत्रिकाओं के पेज काला करती रूदालियों...

क्या कहना है तुम्हारा भी इस बयान पर...

मुझे क्यों लग रहा है कि कुछ लोगों को सांप सूंघ सा गया है!


यह खबर है
यहाँ पर...
और
यहाँ पर भी...




आभार!





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17 टिप्‍पणियां:

  1. भारत के दुश्मनों के साथ मिले हुए गद्दार

    No doubt.

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  2. रुदालियाँ खुद अलगाववादियों की समर्थक हैं, इनमे प्रमुख हैं अरुंधती रॉय, वृंदा करात, मार्क्सवादी, महेश भट्ट और खलिस्तान आन्दोलन से जुड़े सिख नेता

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  3. आपको क्या किंचित मात्र भी है कि कोटेश्वर राव जैसे लोग गद्दार नहीं हैं?

    नक्सलवाद की शुरुआत चीन के पैसे और मिलिट्री सहायता से शुरू हुई थी. ये देशद्रोही लोग चीन के चेअरमैन हत्यारे माओ को अपना चेअरमैन का नारा लगते थे. इसके जनक कनु सान्याल ने चीन में जाकर ट्रेनिंग भी ली थी. ये बात अलग है कि बुढ़ापे में कनु सान्याल ने अपने पापों से घबरा कर आत्महत्या कर ली थी.

    भारत में हमेशा से गद्दार होते रहे हैं जो विदेशी पैसे और इशारों पर नाचते रहें है. पहले एसा मुगलों के इशारों पर होता था, बाद में अंग्रेजों के और अब चीन और पाकिस्तान के.

    बुरों का अंत हमेशा बुरा होता है.

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  4. देश का एक गद्दार दुसरे गद्दारों के पक्ष में अपनी बात कह रहा है. इसमें नया क्या है. क्रोध ना करें. क्रोध को तब तक शांत रखे जब तक माननीय रेल मंत्री इस पर अपना पक्ष नहीं रखती.

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  5. वामपंथ की पैदाइश हैं ये गद्दार…
    निर्णय पाठक को नहीं करना है, बल्कि कथित "सर्वहारा" के समर्थक ब्लॉगरों और उनके आकाओं को करना है। विदेशी लोगों (माओ, मार्क्स, कास्त्रो, चे) की सोच वाली पुस्तकों को पढ़ते-पढ़ते सब के सब देशद्रोही हो चुके हैं…

    अब वामपंथ और इस्लामी जेहाद हाथ से हाथ मिलाकर चल रहे हैं, यह बात भी साबित हो चुकी है। इस्लामी जेहादी अब वामपंथ का उपयोग "सेनेटरी नेपकिन" की तरह कर रहे हैं। वामपंथियों की आँख तब खुलेगी जब जेहादी इनके पिछवाड़े पर गरम सलाख दागेंगे…

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  6. श्री सुरेश जी नें सही कहा……
    वामपंथ की पैदाइश हैं ये गद्दार…
    निर्णय पाठक को नहीं करना है, बल्कि कथित "सर्वहारा" के समर्थक ब्लॉगरों और उनके आकाओं को करना है। विदेशी लोगों (माओ, मार्क्स, कास्त्रो, चे) की सोच वाली पुस्तकों को पढ़ते-पढ़ते सब के सब देशद्रोही हो चुके हैं…

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  7. मुझे आपके आक्रोश में हिंदुत्व की और झुकाव की गंध आ रही है श्रीमान ! :) :) वैसे आपका ये झुकाव इस देश के सेक्युलरिज्म के लिए शुभ संकेत नहीं है !

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  8. मुझे कभी भी नक्सलियों द्वारा जो संघर्स किया जा रहा है वो किसी विचार धारा या आदिवाशियो के पक्ष में नहीं लगा ये पूरी तरह से ताकत के लिए और अपने लिए लड़ा जा रहा युद्ध लगता है जिसमे पैसा कही और से आ रहा है | और इस ताकत का प्रयोग विदेशियों के साथ हमारे देशी लोग भी अपने फायदे के लिए कर रहे है | हम और आप इस पर क्रोध कराने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते है |

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  9. आपकी बात पूरी तरह तो सही नहीं है.
    दरअसल जब किसी एक पक्ष के साथ दीर्घ काल तक शोषण, अत्याचार अथवा भेदभाव की स्थिति बनी रहती है तो इस बात का फायदा सदैव तीसरा पक्ष उठाता है. ठीक यही बात आप धर्मान्तरण के मामले में भी देख सकते हैं.
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    इस तरह आप कह सकते हैं कि इस नक्सली आन्दोलन की नकेल देश के गद्दारों और दुश्मनों के हाथों में हैं.
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    आपको आक्रोश भारतीय हुक्मरानों पर आना चाहिए, जो कभी भी दो टूक निर्णय लेने की हिम्मत नहीं दिखाते. किसी भी समस्या को टालने की प्रवृत्ति से ऐसे ही हालात उत्पन्न होते हैं.

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  10. प्रकाश गोविन्द जी की बात से अक्षरतः सहमत !

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  11. मैं प्रकाश गोविन्द जी की बात से सहमत हूँ

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  12. देशद्रोह का कुछ और प्रमाण हो सकता है भला?

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  13. वे भी अतिवादी हैं ! फिर उनसे अपेक्षाएं कैसी !

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  14. वामपंथ की पैदाइश हैं ये गद्दार…

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  15. नमक हरामी की शानदार मिसाल ! बदकिस्मती यह है कि यह इसी देश में पैदा हुआ है !

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  16. शुक्रिया प्रवीण जी, आपका प्रोत्साहन मिला अच्छा लगा।

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