रविवार, 26 सितंबर 2010

मेरी छोटी सी बिटिया ने कर डाला एक बहुत बड़ा सवाल... जवाब मैं तो नहीं दे सकता... (बिटिया-दिवस पर विशेष-री-ठेल)




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मेरे मेरी ही तरह 'बिटिया के बाप' मित्रों,

न जाने कितनी छोटी-छोटी खुशियां होती हैं... जो काम की चक्की में पिसने के कारण हम अपने बच्चों को दे नहीं पाते...

क्या करें बच्चे ?

देखिये मेरी बिटिया ने यह कैसा सवाल कर दिया मुझसे...




मंदी के इस भयावह दौर में
टारगेट पूरे करने और नौकरी बचाने की जद्दोजहद में
रोजाना रात नौ बजे घर पहुंचता हूँ मैं
नहीं मिली एक महीने से कोई छुट्टी
इतवार या त्यौहार की भी नहीं


रोजाना सुबह स्कूल जाने से पहले
कह कर जाती है मेरी बिटिया
पापा जरूर अपने बॉस को कहना
जल्दी घर जाना है आज मुझे


आप आफिस से जल्दी आओगे
तो पहले हन दोनों चलेंगे कालोनी के पार्क
खूब खेलूंगी जहां मैं आपके साथ
फिर आप मैं और मम्मी जायेंगे बाजार
मैं तो ढेर सारी आइसक्रीम खाउंगी
रात का खाना खायेंगे घर से बाहर

इस तरह खूब मजा करेंगे हम लोग

रोज उसे प्रॉमिस करके निकलता हूं घर से
पिस जाता हूँ काम की चक्की में फिर से
थका हारा पहुंचता हूँ वही रात नौ बजे
सोने की तैयारी कर रही होती है मेरी बेटी
बहुत गुस्सा दिखाती है बड़ा मुंह फुलाती है
पापा आज मैं आप से एकदम कुट्टा हूं


उसे मनाता हूं सुलाता हूं खुद भी सोता हूं
उसके बचपन की खुशियों को रोजाना खोता हूं


आज एक बार फिर देर से पहुंचा मैं घर
बिल्कुल नाराज नहीं हुई वो न मुंह फुलाया
मेरी पीठ पर चढ़ी बांहौं में लपेटा मुझको
बार बार चूमा मेरे सिर, गर्दन और चेहरे को

फिर फुसफुसाते हुए कान में किया वो सवाल...

पापा क्या आपके बॉस को इतना भी नहीं पता?

कि घर में सोना आपका इंतजार करती है


नि:शब्द निरुत्तर हूँ मैं

समझाने या दुलारने की हिम्मत नहीं मुझमें

काश.....

सारी दुनिया के ये 'बॉस' लोग सुन पाते
मेरी छोटी सी बिटिया का ये बड़ा सवाल...



...



क्या जवाब दूँ मैं उसे ?





...

17 टिप्‍पणियां:

  1. सही समय पर सही सवाल किये बिटिया ने। इसका जवाब शायद कोई नही दे सकता। डाटर्स डे पर शुभकामनायें

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  2. कभी जब आप अपने बॉस की जगह पर हों तो सुन पाएं.

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  3. कभी जब आप अपने बॉस की जगह पर हों तो सुन पाएं.

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  4. आज के दिन बहुत संवेदनशील रचना कही है ...आप जिनके बौस हैं उनके मन की तो सुन ही लेंगे न ?

    शुभकामनायें

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  5. कविता काफी अच्छी लगी |

    आप की कविता पढ़ कर मुझे अपनी बेटी की बात याद आ गई |

    मेरी बेटी अभी तीन साल की है उसे समय का नहीं पता है पर इतना जानती है की उसके पाप नाईट में आते है वो कभी जल्दी आ जाये तो कहती है अरे पाप अभी तो डे है अभी नाईट तो नहीं हुई आप कैसे आ गये आप ऐसे ही हमेसा डे में आया करो | वो पाप के साथ जब तक पार्क के एक चक्कर ना लगा ले सोती नहीं भले रात के दस बज जाये और मै उन्हें कितना भी घुमा के लाऊ |

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  6. एक तो आपने कविता ने वैसे दिल के कोने को छू लिया ऊपर से अंशुमाला जी का कमेन्ट जिज्ञासा वश पढ़ लिया

    क्या बताऊँ??

    ऐसा लगा जैसे दोनों बेटियों को अपनी नजरों से देख लिया हो

    दोनों को डाटर्स डे पर इस आभासी गौरव चाचा / मामा की और से ढेर सारा प्यार

    और आपको शुभकामनाएं

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  7. अब इतना तो आप करें जैसी हैं ऐब असहज की सतरें
    (इन दिनों कविता (लिखवाने) की चुड़ैल सर पर सवार है )

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  8. ऐसी ही निराशा बहुधा घेर लेती है जब बच्चों को निराश करता हूँ।

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  9. मैंने अपनी बेटी को निराश कम ही होने दिया है ...कम से कम मुझे आज तक महसूस नहीं हुआ है !जब तक जीवित हूँ उसे पापा की कमी नहीं होने दूंगा प्रवीण भाई !

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  10. कभी बॉस हो जायें तो इस बात का ख्याल रहे :)

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  11. आज कल जिस दुनिया में हम जी रहे है वहाँ बॉस बस बॉस है बहुत कम ही ऐसे है जिन्हे दूसरों के ज़ज्बात की कद्र होती है बाकी ज़्यादातर प्रोफेसनल होते है..पर ये भी है बिटिया के लिए समय भी निकलना पड़ेगा...उसकी खुशी के लिए...

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  12. बिटिया ने मासूमियत से बड़ा सवाल पूछ लिया ...
    बॉस के बेटी नहीं होती क्या ....!
    मेरी बेटियों ने भी अपने पिता को क्या -क्या सिखा दिया , कितना गिनाऊं ...:):)

    शुभकामनायें ...!

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  13. पापा क्या आपके बॉस को इतना भी नहीं पता?
    कि घर में सोना आपका इंतजार करती है


    -काश! बॉस इस मासूम सवाल को सुन पाता!!


    बहुत सटीक!

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  14. पापा क्या आपके बॉस को इतना भी नहीं पता?
    कि घर में सोना आपका इंतजार करती है


    -काश! बॉस इस मासूम सवाल को सुन पाता!!


    बहुत सटीक!

    उत्तर देंहटाएं
  15. बेहद मासूम सवाल्…………………………बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  16. क्‍या यह रचना आपकी है .. मैने नए चिट्ठों का स्‍वागत करते वक्‍त एक ब्‍लॉग में इस रचनाको अभी अभी देखा है !!

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  17. Respected praveen ji,
    First, I am very very sorry, But your kavita is so heart touching that I coudnt stopped
    myself.I reproduced it on my blog, So that my friends can read it, Actually I am very new to blogs, So I dont know the manners. But many many thanks for this kavita and for guiding me about right or wrong... Please keep guiding me.

    Always yours,

    prabhakar kandya

    उत्तर देंहटाएं

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