शनिवार, 25 सितंबर 2010

काहे को भूखा मारते हो अपने ही प्यारे बच्चों को... मेरे माई-बाप...हम सबके पालनहार ?

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मेरे 'व्रती-उपवासी' मित्रों,

यह पोस्ट वैसे लिखी थी जन्माष्टमी को...पर छाप आज रहा हूँ... उस समय उपवासों का सीजन जो चल रहा था... अत: दिल को गवारा नहीं किया इसे उस समय छापना...

बचपन से घर में देखता हूँ कि साल के दो खास दिन फलाहार-व्रत रखा जाता है... शिवरात्रि व जन्माष्टमी के दिन... अन्न नहीं बनता उस दिन चूल्हे पर... अब हम सब भाई बहिन इन दोनों दिन सुबह से ही माँ को परेशान करना शुरू कर देते थे... भूख भी पता नहीं कुछ ज्यादा ही लगती थी उस दिन... नतीजा हर थोड़ी थोड़ी देर में माँ कभी मखाने की खीर, कभी चौलाई के लड्डू, कभी फ्रूट चाट, कभी कोटू के आटे-आलू की पकौड़ी और कभी दूध हमारे सामने परोसती रहती थी... फिर भी शाम होते होते भूख से बेहाल हो जाते थे हम लोग... रात बारह बजने तक का इंतजार तो पिता भी नहीं करते आज तक... उनका तर्क है कि सूरज ढलते ही जन्म हो गया होगा... इसलिये पूजा करो, आरती करो और फलाहार लाओ...


अब बड़ा हो गया हूँ, काम पर जाना पड़ता है...मैं तो सभी कुछ खाते रहता हूँ दिन भर... परंतु घर में श्रीमती जी अन्न नहीं बनाती आज भी...


अब इस बार घर पर ही था... दिन भर बचपन की तरह ही थोड़ी थोड़ी देर में कुछ-कुछ मेरे सामने पेश किया जाता रहा... पर प्रॉपर खाने की बात तो कुछ और ही है...


तभी मैंने सोचा कि मात्र सिख धर्म को छोड़कर बाकी सभी धर्म व्रत-उपवास की बहुत महत्ता बताते हैं...


अब यह 'ऊपर वाला' जो है...कहा जाता है कि उस ही ने दुनिया बनाई...वही पालनहार भी है...वही सही मायने में हमारा माता-पिता दोनों है...


मैं आज खुद एक बच्ची का बाप हूँ... यकीन जानिये जिस दिन मेरी बेटी किसी वजह से खाना नहीं खाती है, उस दिन मुझे भी अपना खाना बेस्वाद लगता है...


तो वह ऊपर वाला पालनहार-कृपानिधान-सर्वशक्तिमान क्यों कर चाहता है कि उसकी औलादें भूखी रह रह कर उसके प्रति अपने समर्पण व वफादारी को साबित करें...?


क्यों वह हमारे भूखे रहने से हम पर प्रसन्न होता है...?


कैसा माई-बाप है वह ?



मुझे तो समझ नहीं आता यह सब...


आपको आता हो तो हम सबको समझाईये...


समझायेंगे न !...


प्लीज....






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पाठकों की जानकारी के लिये...सिख धर्म किसी भी तरह के उपवास को सही नहीं मानता...



ਬਰਤ ਨੇਮ ਸੰਜਮ ਮਹਿ ਰਹਤਾ ਤਿਨ ਕਾ ਆਢੁ ਨ ਪਾਇਆ ॥

बरत नेम संजम महि रहता तिन का आढु न पाइआ ॥

Baraṯ nem sanjam mėh rahṯā ṯin kā ādẖ na pā▫i▫ā.

Fasting, daily rituals, and austere self-discipline - those who keep the practice of these, are rewarded with less than a shell.



यह जानकारी यहाँ से... ली गई है।




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ईश्वर और धर्म को एक संशयवादी परंतु तार्किक दॄष्टिकोण से समझने का प्रयास करती इस लेखमाला के अब तक के आलेख हैं, समय मिले तो देखिये :-



चित, पट और अंटा तीनों उसी का ???

वफादारी या ईमानदारी ?... फैसला आपका !

बिना साइकिल की मछली... और धर्म ।

अदॄश्य गुलाबी एकश्रंगी का धर्म...

जानिये होंगे कितने फैसले,और कितनी बार कयामत होगी ?

पड़ोसी की बीबी, बच्चा और धर्म की श्रेष्ठता...

ईश्वर है या नहीं, आओ दाँव लगायें...

क्या वह वाकई पूजा का हकदार है...

एक कुटिल(evil) ईश्वर को क्यों माना जाये...

यह कौन रचनाकार है ?...

41 टिप्‍पणियां:

  1. मित्र ,
    मैं पोस्ट का बेसिक इंटेंशन नहीं समझ पा रहा आपकी "धर्म विशेष" में आस्था बढ़ गयी है??
    या फिर आप उसकी ढाल बनाकर दुसरे धर्म को कमतर बता कर बाद में फिर से विज्ञान को श्रेष्ठ सिद्द करने का अभियान चला रहे हैं ??

    अकेले विज्ञान की खोजें कम पड़ रहीं है क्या ??, या कुछ है ही नहीं आपके विज्ञान में जो स्थिर हो जिस पर आप कह सको की हाँ ये कंसेप्ट फिक्स है

    ये बेहद सीधे सवाल का उत्तर तो खैर कोई भी दे देगा


    @ क्यों वह हमारे भूखे रहने से हम पर प्रसन्न होता है...?
    कैसा माई-बाप है वह ?


    मान गए आपको .... हद कर दी आपने तो .. खैर पोस्ट का मोटिव क्लीयर हो तो बाकी और टिप्पणियों के बाद बात करते हैं

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  2. "उस समय उपवासों का सीजन जो चल रहा था... अत: दिल को गवारा नहीं किया इसे उस समय छापना..."

    शाह साहब , आप डट के खाइए , दुनिया की फिक्र छोडिये !

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  3. मैं भी इस तरह के जबरन लादे गए उपवास को सही नहीं मानता .....
    हाँ स्वास्थ की दृष्टि से हफ्ते में एक दिन उपवास रखना उत्तम माना गया है
    -
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    उपवास का सीधा सा अर्थ है उप + आवास
    यानी साथ रहना !
    किसी के ध्यान में/प्रेम में/प्रार्थना में आप इतना खो जाएँ ...इतना लीन हो जाएँ की आप खाना-पीना भूल जाएँ !

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    मित्र गौरव,

    यूँ ही सोचते सोचते एक सवाल उठा मन मेँ, उछाल दिया...
    यकीन जानो कोई और मोटिव नहीँ है।

    ...

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  5. मैंने सुना है कही की भूखे पेट भजन ना हो गोपाला | सही भी है यदि हम भूखे रह कर या अपना सारा काम धाम छोड़ कर भगवान को याद करेंगे तो शायद हमारा ध्यान भगवान में लगेगा ही नहीं अच्छा हो जिनको मन से और शांति से भगवान को याद करना है तो सारे काम धाम करके पेट पूजा करके फिर ही उसे याद करे | और बच्चो को जबरजस्ती उपवास के नाम पर भूखा रखना तो गलत है जो बच्चे उपवास का अर्थ और जरुरत ना जानते हो उनसे ये करवाने का क्या फायदा है |

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  6. मैं तो उपवास रख ही नहीं पाता... वर्ना आपकी बात का जवाब जरूर देता। :)

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  7. उप = पास
    वास = रहना
    पास रहना
    मानसिक तौर पर ईश्वर के पास रहना

    शारीरिक परेशानियों में अजीर्ण , गुर्दे के विकार , पेटदर्द , मोटापा, संधिवात, उलटी और बहुत सारे रोगों यहाँ तक की मानसिक रोगों में भी लाभकारी पाया गया है

    सीधा सा तो कांसेप्ट है मित्र
    उपवास रखने से शरीर में नया अपशिष्ट नहीं बनता, शरीर की शक्ति पुराने अपशिष्ट को शरीर से बाहर कर देती है
    इससे बहुत सारे फायदे होते हैं , लिस्ट बहुत बड़ी है
    ये कंसेप्ट वैसा ही है जैसा गाड़ी को सर्विस पर डाल देना, अब इश्वर के नाम पर सर्विस कराओ या विज्ञान के नाम पर आपकी इच्छा है यहाँ सर्विस स्वयं नेचर के हाथों होती है

    रही बात बच्चों की तो जब उन्हें इंजेक्शन लगाया जाता है और वो रोते हैं तो मेरी आँखों में भी आंसू आ जाते हैं पर मैं डॉक्टर को नहीं रोकता क्योंकि मैं जानता हूँ ये उसके भले के लिए ही है ... तभी तो डॉक्टर कहते रहते हैं बस हो गया .. बस .. बस ,, बस {और इंजेक्शन लगा दिया जाता है } .. रही बात बच्चों की जानकारी तो उन्हें जानकारी तब होगी जब माता पिता को हो , ऐसा कहीं नहीं लिखा है की बेहद छोटे बच्चे या अस्वस्थ बच्चे से उपवास कराओ

    गर्भवती , क्षयरोगी , अल्सर , मिर्गी , अति कमजोर व्यक्ति के लिए उपवास नहीं करना चाहिए ये निर्देश भी दिए जाते हैं
    अग्निहोत्री और ब्रह्मचारी अन उपवासी माना है .... बाकी करने को लोग बेरोजगारी से भी उपवास करते ही हैं :))

    मुझे अभी तक बच्चे की उम्र व् स्वास्थ्य के बारे में कुछ पता नहीं है पर पोस्ट में इश्वर {पिता } और हम {बड़े बच्चों } की बात करके उलझाने का बेहतरीन प्रयास किया गया लगता है :))

    उत्तर देंहटाएं
  8. उप = पास
    वास = रहना
    पास रहना
    मानसिक तौर पर ईश्वर के पास रहना

    शारीरिक परेशानियों में अजीर्ण , गुर्दे के विकार , पेटदर्द , मोटापा, संधिवात, उलटी और बहुत सारे रोगों यहाँ तक की मानसिक रोगों में भी लाभकारी पाया गया है

    सीधा सा तो कांसेप्ट है मित्र
    उपवास रखने से शरीर में नया अपशिष्ट नहीं बनता, शरीर की शक्ति पुराने अपशिष्ट को शरीर से बाहर कर देती है
    इससे बहुत सारे फायदे होते हैं , लिस्ट बहुत बड़ी है
    ये कंसेप्ट वैसा ही है जैसा गाड़ी को सर्विस पर डाल देना, अब इश्वर के नाम पर सर्विस कराओ या विज्ञान के नाम पर आपकी इच्छा है यहाँ सर्विस स्वयं नेचर के हाथों होती है

    रही बात बच्चों की तो जब उन्हें इंजेक्शन लगाया जाता है और वो रोते हैं तो मेरी आँखों में भी आंसू आ जाते हैं पर मैं डॉक्टर को नहीं रोकता क्योंकि मैं जानता हूँ ये उसके भले के लिए ही है ... तभी तो डॉक्टर कहते रहते हैं बस हो गया .. बस .. बस ,, बस {और इंजेक्शन लगा दिया जाता है } .. रही बात बच्चों की जानकारी तो उन्हें जानकारी तब होगी जब माता पिता को हो , ऐसा कहीं नहीं लिखा है की बेहद छोटे बच्चे या अस्वस्थ बच्चे से उपवास कराओ

    गर्भवती , क्षयरोगी , अल्सर , मिर्गी , अति कमजोर व्यक्ति के लिए उपवास नहीं करना चाहिए ये निर्देश भी दिए जाते हैं
    अग्निहोत्री और ब्रह्मचारी अन उपवासी माना है .... बाकी करने को लोग बेरोजगारी से भी उपवास करते ही हैं :))

    मुझे अभी तक बच्चे की उम्र व् स्वास्थ्य के बारे में कुछ पता नहीं है पर पोस्ट में इश्वर {पिता } और हम {बड़े बच्चों } की बात करके उलझाने का बेहतरीन प्रयास किया गया लगता है :))

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्रवीण भाई !

    गौरव अग्रवाल के यहाँ होने से मुझे कुछ राहत मिली और आपको सत्संग :-)...शुभकामनायें !

    "दिल है क़दमों पर किसी के गर खुदा हो या न हो
    बंदगी तो अपनी फितरत है, खुदा हो या न हो " !

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  10. आपसे किसने कहा जी
    भूखे रहने से ईश्वर प्रसन्न होता है।
    आप खामख्वाह टेंशन ले रहे हैं।

    प्रणाम स्वीकार करें

    उत्तर देंहटाएं
  11. The Benefits of Fasting
    Author: Dr. Alan Goldhamer
    http://www.healthpromoting.com/Articles/articles/benefit.htm

    उत्तर देंहटाएं
  12. @ आदरणीय सतीश जी
    प्रणाम स्वीकार करें :)

    @यकीन जानो कोई और मोटिव नहीँ है।

    प्रिय मित्र प्रवीण जी,
    वैसे तो मेरी तर्क शक्ति ये बात मानने से साफ़ इनकार कर रही है
    पर आप की इस बात में ""श्रद्दा"" रख कर मैं मान लेता हूँ :)
    अगर कोई टिपण्णी क्रोध में की गयी लग रही तो उसे मेरी अपरिपक्वता ही मानियेगा

    आभार :)

    उत्तर देंहटाएं
  13. http://www.healthpromoting.com/Articles/articles/benefit.htm

    उत्तर देंहटाएं
  14. Full address is not appearing, so i am posting link once again. The health benefits of water fasts have been well recognized by medical community.

    Caloric restriction and intermittent fasting are most popular anti aging tools.

    http://en.wikipedia.org/wiki/Intermittent_fasting#Medical_Studies

    It has been shown to use ketone bodies which are harmful if not used. Excess cholesterol, rheumatic plaque, tumors and abnormal internal growth, excess fats etc.

    Fasting is different from starvation. People keep as long as 60 days water fast and lead healthy life, so how can 24 or 48 hrs fast can starve a person?

    The system of fasting is natural preventive measure. It has been deliberately linked to religion to ensure that people limit their food intake and unhealthy indulgences.

    The Health Benefits of Water Fasting
    By Stephen Harrod Buhner

    The Benefits of Fasting
    Author: Dr. Alan Goldhamer

    उत्तर देंहटाएं
  15. @ गौरव अग्रवाल,
    प्रवीण भाई के ब्लाग पर लगता है आप पहली बार आये हैं , अगर वाकई ऐसा है तो आप इन्हें पढ़ें अवश्य मुझे विश्वास है कि आप इन्हें और इनके विषय को पसंद करेंगे !
    प्रवीण शाह उन विद्वान् लोगों में से हैं जो मुझे हमेशा अच्छे लगते हैं हालाँकि इनके विचारों से काफी मतभिन्नता रहती है !

    उत्तर देंहटाएं
  16. @ आदरणीय सतीश जी

    आपकी बात से सहमत हूँ

    प्रवीण जी सच में एक ब्रोड माइंडेड पर्सनालिटी हैं वर्ना अक्सर विचारों में हल्का सा मतभेद होते ही प्रतिक्रिया बेहद खराब या अनुचित आने लगती है , ऐसे सभ्य व्यक्तित्व से ही ब्लोगिंग में स्वस्थ बहस चलती है
    हाँ .... जहां तक पहली बार आने का प्रश्न है उसका उत्तर हम दोनों के ब्लोग्स की कुछ पिछली पोस्ट्स में मिल सकता है :)

    उत्तर देंहटाएं
  17. प्रवीन शाह जी बड़ा अजीब सा लग रहा है लिखते हुए क्योंकि मुझे लगता है कि इन बातों को सब लोग जानते हैं फिर भी मन कि बात कह ही देता हूँ. इस विषय पर मेरे विचार इस प्रकार हैं:

    स्वस्थ रहने के लिए हमें अनुशासित जीवन चर्या का पालन करना होता है जो कि मुश्किल है. सुबह जल्दी उठना, व्यक्तिगत साफ़ सफाई रखना, कसरत करना, अनावश्यक मोटापा ना चढ़े इसके लिए अपनी जीभ पर नियंत्रण रखना आदी - आदी क्रियाएँ स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक हैं. चूँकि इन बातों का पालन करना हर एक के लिए संभव नहीं होता अतः हमारे धर्माचार्यों ने इन अच्छी आदतों को धर्म का हिस्सा बना दिया ताकि धर्म के डंडे से जीवन में अनुशासन कायम रखा जा सके. परन्तु जैसा होता है कि समय बीतने के साथ हम भूल गए कि सुबह सवेरे उठ कर साफ़ स्वच्छ हो कर पूजा पाठ करना, प्राणायाम करना, और समय समय पर व्रत उपवास करने का विधान किस लिए धर्म के साथ जोड़ा गया था. इनका उद्देश्य मात्र शरीर को स्वस्थ रखना था और कुछ नहीं. सुबह जल्दी उठने, नहाने धोने, व्रत उपवास करने, से ईश्वर नहीं मिलते. इनसे ईश्वर का दिया शरीर स्वस्थ रहता है. इसलिए हमें इन कर्मकांडों कि मूल भावना को समझ कर ही इनका पालन करना चाहिए.

    मेरी समझ से सिख धर्म कि शुरुवात जैसे भी हुई पर कुछ समय उपरांत ये एक योद्धा प्रजाति का धर्म विशेष बन कर रह गया जिसका मुख्य कार्य हिन्दुओं कि रक्षा करना था इस लिए शायद सिख धर्म में व्रत उपवास को महत्व नहीं दिया गया.

    उत्तर देंहटाएं
  18. प्रवीन शाह जी बड़ा अजीब सा लग रहा है लिखते हुए क्योंकि मुझे लगता है कि इन बातों को सब लोग जानते हैं फिर भी मन कि बात कह ही देता हूँ. इस विषय पर मेरे विचार इस प्रकार हैं:

    स्वस्थ रहने के लिए हमें अनुशासित जीवन चर्या का पालन करना होता है जो कि मुश्किल है. सुबह जल्दी उठना, व्यक्तिगत साफ़ सफाई रखना, कसरत करना, अनावश्यक मोटापा ना चढ़े इसके लिए अपनी जीभ पर नियंत्रण रखना आदी - आदी क्रियाएँ स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक हैं. चूँकि इन बातों का पालन करना हर एक के लिए संभव नहीं होता अतः हमारे धर्माचार्यों ने इन अच्छी आदतों को धर्म का हिस्सा बना दिया ताकि धर्म के डंडे से जीवन में अनुशासन कायम रखा जा सके. परन्तु जैसा होता है कि समय बीतने के साथ हम भूल गए कि सुबह सवेरे उठ कर साफ़ स्वच्छ हो कर पूजा पाठ करना, प्राणायाम करना, और समय समय पर व्रत उपवास करने का विधान किस लिए धर्म के साथ जोड़ा गया था. इनका उद्देश्य मात्र शरीर को स्वस्थ रखना था और कुछ नहीं. सुबह जल्दी उठने, नहाने धोने, व्रत उपवास करने, से ईश्वर नहीं मिलते. इनसे ईश्वर का दिया शरीर स्वस्थ रहता है. इसलिए हमें इन कर्मकांडों कि मूल भावना को समझ कर ही इनका पालन करना चाहिए.

    मेरी समझ से सिख धर्म कि शुरुवात जैसे भी हुई पर कुछ समय उपरांत ये एक योद्धा प्रजाति का धर्म विशेष बन कर रह गया जिसका मुख्य कार्य हिन्दुओं कि रक्षा करना था इस लिए शायद सिख धर्म में व्रत उपवास को महत्व नहीं दिया गया.

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  19. .... एक बात और है
    मेरी नज़रों में प्रवीण जी की सबसे बड़ी क्वालिटी ये भी है की उनकी प्रोफाइल में लिखी बातें , उनकी पोस्ट्स, उनके कमेंट्स सभी आपस में मेल खाते हैं
    जब इस तरह के व्यक्तित्व के स्वामी किसी भी लक्ष्य की और बढ़ते हैं तो कितना भी असंभव लक्ष्य हो सफल होते ही होते हैं

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  20. अरे इन्ही बातों का गिला तो मुझे भी रहता है -अब तो ई जन्म गया समझो !

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  21. सुबह आफिस जाने की ज़ल्दी में था सो कमेन्ट नहीं कर पाया ! अब काफी कमेन्ट आ चुके हैं ! धर्म के अपने तर्क होंगे पर उन पर चर्चा नहीं करूँगा ! निज तौर पर मैं भी उपवास नहीं करता सो सहमत जानिये !

    उत्तर देंहटाएं
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    सबसे पहले तो संवाद को आगे बढ़ाते हुऐ...

    मित्र असहज के दिये लिंक को पढ़ा... परंतु मैं आश्वस्त नहीं कि उपवास मानव के लिये सही है...

    एक रोचक लिंक... मैं भी दे रहा हूँ जो National Council Against Health Fraud. नामक संस्था के वेब पेज से है...

    मेरा यह भी मानना है कि सही समय पर सही मात्रा में सही खाना खाने के फायदे हर हाल में उपवास रखने से ज्यादा हैं (कॉमन सेंस)... तो क्यों अधिकांश धर्म उपवास को ईश्वर तक पहुंचने या उसे प्रसन्न करने के उपाय के तौर पर बतलाते हैं?


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    उत्तर देंहटाएं
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    @ मित्र गौरव और आदरणीय सतीश सक्सेना जी,

    आप दोनों के बीच के संवाद को पढ़ा... आपके स्नेह का ऋणी रहूंगा ताजिंदगी... पर जो तारीफें आपने मेरी कर दी हैं... मैं उस के लायक नहीं... गलतियों और बेवकूफियों व अज्ञान का पुलिंदा मात्र हूँ मैं और वही रहूँगा भी... बस प्रयास यह रहता है कि हर नये दिन मेरी यह गलतियाँ, बेवकूफियाँ व अज्ञान कुछ तो कम हो... इसी लिये यह ब्लॉग भी है शायद...


    आभार!


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    उत्तर देंहटाएं
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    स्वस्थ रहने के लिए हमें अनुशासित जीवन चर्या का पालन करना होता है जो कि मुश्किल है. सुबह जल्दी उठना, व्यक्तिगत साफ़ सफाई रखना, कसरत करना, अनावश्यक मोटापा ना चढ़े इसके लिए अपनी जीभ पर नियंत्रण रखना आदी - आदी क्रियाएँ स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक हैं. चूँकि इन बातों का पालन करना हर एक के लिए संभव नहीं होता अतः हमारे धर्माचार्यों ने इन अच्छी आदतों को धर्म का हिस्सा बना दिया ताकि धर्म के डंडे से जीवन में अनुशासन कायम रखा जा सके.


    सुबह जल्दी उठने, नहाने धोने, व्रत उपवास करने, से ईश्वर नहीं मिलते.


    प्रिय विचार शून्य जी,

    आप जो कह रहे हैं उसका सार यह है कि अच्छी बातों को धर्म के साथ जोड़ लिया गया...

    परंतु आज का धर्म यह कह रहा है कि ईश्वर की कृपा पानी है उसे प्रसन्न करना है तो उपवास करो...

    मैं यही सवाल यहाँ पूछ रहा हूँ कि यह कैसा ईश्वर है जो अपनी रचना मानव जाति के खुद को भूखे रह प्रताड़ित करने से खुश होता है?

    ...

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  25. प्रवीण भाई !
    विचारशून्य की बातों पर उनके हिसाब से गौर करें , काफी हद तक बात साफ़ कही है ! मानव समाज में धर्म क्यों अपनाया गया ? श्रद्धा के कारण हम अपने आपको सुरक्षित समझाते हैं और श्रद्धा से फल भी मिलता है अब इसे चाहे आप वैज्ञानिक लोग स्वप्रेरण मान लें जिससे मनोवैज्ञानिक तरीके से लाभ महसूस होता है ! मगर यह सच है कि तर्क को एक तरफ रख कर श्रद्धा पूर्वक किये कार्य का सुफल मिलता है ! फिर हमें इससे क्या फर्क पड़ता है कि भगवान या अल्लाह का अस्तित्व नास्तिक मानते हैं या नहीं ! आस्तिक को विश्वास है कि वह जो कुछ प्रयास इश्वर को खुश रखने के लिए करता है उसका फल मिलेगा !

    विभिन्न निर्देशों के सेट को आप धर्म कह लें और व्रत रखना उसी श्रद्धा का एक भाग है ! और इससे अगर हमें फायदा होता है तो हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रवीण शाह अथवा अन्य वैज्ञानिकों को सबूत मिल रहा है या नहीं !

    मुझे यह बहस बेमानी लगती है , अश्र्द्धालुओं को किसी अन्य की श्रद्धा की मजाक कभी नहीं उडानी चाहिए यह निंदनीय है !

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  26. गौरव जी के जवाब ने काफी कुछ कह ही दिया है .....लगभग हर व्रत में कहा यही जाता है कि बच्चे , वृद्ध और बीमार व्रत ना करें ...ये अपनी श्रद्धा और विश्वास की बात है ...!

    उत्तर देंहटाएं
  27. 'धर्म' जुड़ गया है वरना हम भी कुछ कह लेते :-)

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  28. http://en.wikipedia.org/wiki/Intermittent_fasting#Medical_Studies

    उत्तर देंहटाएं
  29. मेरे अगले तीनों सन्दर्भ विश्वनीय स्त्रोतों से हैं. इनसे तो आप आश्वस्त होंगे?

    उत्तर देंहटाएं
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    .
    मित्र असहज,

    आपके दिये संदर्भ पढ़े, परंतु प्रश्न यहाँ पर यह नहीं है कि उपवास के फायदे हैं अथवा नहीं या वह वजन घटाने में मददगार है या नहीं...प्रश्न यह है कि...

    "तो वह ऊपर वाला पालनहार-कृपानिधान-सर्वशक्तिमान क्यों कर चाहता है कि उसकी औलादें भूखी रह रह कर उसके प्रति अपने समर्पण व वफादारी को साबित करें...?"

    जबकि धरती के अन्य माता पिता अपनी संतान को अच्छा व समय पर खाते-पीते देखना चाहते हैं।

    आभार!


    ...

    उत्तर देंहटाएं
  31. क्या हो गया है आपके कॉमन सेन्स को?
    आपने विकिपीडिया के आलावा दूसरा और तीसरा लिंक नहीं पढ़ा है, वर्ना आप यह नहीं टीपते. आज मुझे कुतर्क और पूर्वाग्रह के आलावा कुछ नहीं दिख रहा है? आप मान ही बैठे हैं की उपवास में नुकसान के आलावा कुछ नहीं है. अब मैं कितने ही नवीनतम सन्दर्भ दे दूँ, कितने ही फिटनेस विशेषज्ञों, पोषण विज्ञानियों और एथलीटों का समर्थन दिखा दूँ, कोई फर्क नहीं पड़ना आप अपनी सोच पर कायम रहेंगे. क्योंकि आप खुद भोजन से दूर नहीं रह पाते. वर्ना लोग चालीस और साठ दिनों का उपवास रखते हैं और फिर सामान्य वज़न पर लौट आते हैं, तो चौबीस या अड़तालीस घंटे के उपवास खुद को भूखे मारना कैसे हो सकता है? वह भी तब जब आप अतिरिक्त चर्बी से परेशान हों. प्राचीन काल में जब वैद्यकीय ज्ञान के जानकर काफी कम थे तब उपवास रोग दूर रखने की कारगर, मुफ्त और सुरक्षित विधि थी. लोग इसे अपनाएं और करते रहें इसे इसीलिए इसे धर्म के साथ जोड़ दिया गया.

    बिलकुल वैसे ही जैसे लोगों को सूर्यग्रहण के हानिकारक विकिरण से बचाने के लिए ग्रहण-मोक्ष के नियम बनाए गए. और धर्म के साथ जोड़कर यह सुनिश्चित किया गया की लोग ग्रहण के दौरान अन्दर ही रहें, विशेषकर गर्भवती महिलाऐं और बच्चे.

    अगर लोगों को इसके पीछे वैज्ञानिक सिद्धांत समझाने निकलते तो न कोई उपवास करता न ग्रहण के दौरान अन्दर रहता.

    आज तो लोग पढ़े लिखे हैं और उपवास की वैज्ञानिकता साबित हो चुकी है, बावजूद इसके पढ़े लिखे लोग खुद को भोजन से दूर नहीं रख पाते. फिर तो यह उस दौर की बात है जब शिक्षा का प्रसार बहुत सीमित था. सीमित साधनों में लोगों को स्वस्थ रखने का इससे बेहतर प्राकृतिक उपाय था भी नहीं.

    मान लें आपकी बेटी को बार बार बुखार आ जाता है और उसके दांतों में सडन भी है. डॉक्टर दही, आइसक्रीम, चोकलेट से कम से कम एक महीने दूर रखने की सलाह देते हैं. पर वह बुखार में भी अक्सर आइसक्रीम के लिए मचल जाती है. आपके मना करने पर गुस्से में कहती है की आप उसके असली माँ बाप हो ही नहीं सकते, क्योंकि आखिर क्यों कोई अपनी ही बेटी को आइसक्रीम और चाट से दूर रखेगा? सारी दुनिया तो खा रही है तो मुझे ही दूर क्यों रखा जा रहा है इत्यादि इत्यादि.

    पहले जब लोग उपवास करते थे तब न तो भारत में अर्थराइटिस था, न मधुमेह, न दिल की बीमारियाँ, न अस्थमा, न रक्तचाप, न मोटापा... और आज भरपूर खाने को है तो भारत इन इन जीवनशैली रोगों की विश्व राजधानी बना हुआ है. इसमें भी दिल्ली और पंजाब पहले नंबर पर हैं.

    हर सिस्टम का अच्छा और स्याह पहलू होता है, धर्म और विश्वास का भी है. यह ऊपर बैठे लोगों की नियत पर निर्भर है.


    Until water fasting goes on past the point where all fatty tissues and all abnormal deposits have been burned for fuel and recycled for the nutritional elements they contain, vital muscle tissues and organs are not consumed. And as long as the body contains sufficient nutritional reserves, vital organs and essential tissues are rebuilt and maintained. In fact the body has a great deal of intelligence that we don"t give it credit for. It knows exactly which cells are essential to survival, which ones are not. The body knows which cells are abnormal deposits, and it goes to work to metabolize them first. For example, the body recognizes arthritic deposits, cysts, fibroids, and tumors as offensive parts of the landscape, and obligingly uses them for foods in preference to anything else. A starving (not fasting) body also knows precisely in what order of priority body cells should be metabolized to minimize risk of death or permanent disability.

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  32. अवश्य ही आपने विकिपीडिया के आलावा दूसरा और तीसरा लिंक नहीं पढ़ा है, वर्ना आप यह नहीं टीपते. आज मुझे कुतर्क और पूर्वाग्रह के आलावा कुछ नहीं दिख रहा है? आप मान ही बैठे हैं की उपवास में नुकसान के आलावा कुछ नहीं है. अब मैं कितने ही नवीनतम सन्दर्भ दे दूँ, कितने ही फिटनेस विशेषज्ञों, पोषण विज्ञानियों और एथलीटों का समर्थन दिखा दूँ, कोई फर्क नहीं पड़ना आप अपनी सोच पर कायम रहेंगे. क्योंकि आप खुद भोजन से दूर नहीं रह पाते. वर्ना लोग चालीस और साठ दिनों का उपवास रखते हैं और फिर सामान्य वज़न पर लौट आते हैं, तो चौबीस या अड़तालीस घंटे के उपवास खुद को भूखे मारना कैसे हो सकता है? वह भी तब जब आप अतिरिक्त चर्बी से परेशान हों. प्राचीन काल में जब वैद्यकीय ज्ञान के जानकर काफी कम थे तब उपवास रोग दूर रखने की कारगर, मुफ्त और सुरक्षित विधि थी. लोग इसे अपनाएं और करते रहें इसे इसीलिए इसे धर्म के साथ जोड़ दिया गया.

    उत्तर देंहटाएं
  33. बिलकुल वैसे ही जैसे लोगों को सूर्यग्रहण के हानिकारक विकिरण से बचाने के लिए ग्रहण-मोक्ष के नियम बनाए गए. और धर्म के साथ जोड़कर यह सुनिश्चित किया गया की लोग ग्रहण के दौरान अन्दर ही रहें, विशेषकर गर्भवती महिलाऐं और बच्चे.

    अगर लोगों को इसके पीछे वैज्ञानिक सिद्धांत समझाने निकलते तो न कोई उपवास करता न ग्रहण के दौरान अन्दर रहता.

    आज तो लोग पढ़े लिखे हैं और उपवास की वैज्ञानिकता साबित हो चुकी है, बावजूद इसके पढ़े लिखे लोग खुद को भोजन से दूर नहीं रख पाते. फिर तो यह उस दौर की बात है जब शिक्षा का प्रसार बहुत सीमित था. सीमित साधनों में लोगों को स्वस्थ रखने का इससे बेहतर प्राकृतिक उपाय था भी नहीं.

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  34. मान लें आपकी बेटी को बार बार बुखार आ जाता है और उसके दांतों में सडन भी है. डॉक्टर दही, आइसक्रीम, चोकलेट से कम से कम एक महीने दूर रखने की सलाह देते हैं. पर वह बुखार में भी अक्सर आइसक्रीम के लिए मचल जाती है. आपके मना करने पर गुस्से में कहती है की आप उसके असली माँ बाप हो ही नहीं सकते, क्योंकि आखिर क्यों कोई अपनी ही बेटी को आइसक्रीम और चाट से दूर रखेगा? सारी दुनिया तो खा रही है तो मुझे ही दूर क्यों रखा जा रहा है इत्यादि इत्यादि. जबकि धरती के अन्य माता पिता अपनी संतान को अच्छा व समय पर खाते-पीते देखना चाहते हैं।

    आपका बेटा किशोरावस्था में ही भारी मोटापे, सुस्ती, पुराने कब्ज़ और अधिक कोलेस्ट्रोल का शिकार है. चिकित्सक एक वर्ष तक सख्त परहेज, सप्ताह में एक दिन उपवास, प्राकृतिक भोजन और व्यायाम की सलाह देते हैं. जंक फ़ूड का आदी आपका बेटा फीके भोजन के कारण अब लगभग रोज़ ही भूखा रह जाता है, और व्यायाम वह करना नहीं चाहता. क्या आप उसे अपने मन का खाने देंगे? जबकि धरती के अन्य माता पिता अपनी संतान को अच्छा व समय पर खाते-पीते देखना चाहते हैं।

    पहले जब लोग उपवास करते थे तब न तो भारत में अर्थराइटिस था, न मधुमेह, न दिल की बीमारियाँ, न अस्थमा, न रक्तचाप, न मोटापा... और आज भरपूर खाने को है तो भारत इन इन जीवनशैली रोगों की विश्व राजधानी बना हुआ है. इसमें भी दिल्ली और पंजाब पहले नंबर पर हैं. जब अधिकतर जनसँख्या उपवास करती थी तब यह रोग केवल राजघरानों में ही दृष्टिगोचर होते थे. आज तो हर किसी की तोंद निकली हुई है, हर दूसरा आदमी कोलेस्ट्रोल और इंसुलिन नाप रहा है... क्यों?

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  35. हर सिस्टम का अच्छा और स्याह पहलू होता है, धर्म और विश्वास का भी है. यह ऊपर बैठे लोगों की नियत पर निर्भर है. अब इंसान अच्छा भी हो सकता है बुरा भी. भगवान पर मेरा विश्वास है नहीं. पर धर्म हर चीज़ बुरी नहीं है. आपने जो 'रोचक लिंक' दिया है वह हास्यास्पद है, कहें तो मैं उसकी भी चीरफाड़ करूँ?

    Until water fasting goes on past the point where all fatty tissues and all abnormal deposits have been burned for fuel and recycled for the nutritional elements they contain, vital muscle tissues and organs are not consumed. And as long as the body contains sufficient nutritional reserves, vital organs and essential tissues are rebuilt and maintained. In fact the body has a great deal of intelligence that we don"t give it credit for. It knows exactly which cells are essential to survival, which ones are not. The body knows which cells are abnormal deposits, and it goes to work to metabolize them first. For example, the body recognizes arthritic deposits, cysts, fibroids, and tumors as offensive parts of the landscape, and obligingly uses them for foods in preference to anything else. A starving (not fasting) body also knows precisely in what order of priority body cells should be metabolized to minimize risk of death or permanent disability.

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    मित्र असहज,

    आपके सभी लिंक मैंने पढ़े, निश्चित तौर पर Intermittent Fasting एवं Calorie restriction के स्वास्थ्य को कुछ फायदे हैं... पर इसी की तरह अन्य कई चीजें/काम भी स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद हैं... मैंने यहाँ इस स्थापना पर चोट करने की कोशिश की है, जो कहती है कि फलाने ईश्वर को खुश करना हो तो सप्ताह के इस दिन/ या इतने दिन/ या पूरे महीने उपवास करो...

    मुझे पता है कि आप Vegan हैं और हो सकता है कि आजकल Diet व Fasting के साथ कुछ प्रयोग भी कर रहे होंगे... आपकी या किसी की भी भावनाओं को चोट पहुंचाने का मेरा इरादा नहीं था... मैं पूर्वाग्रही नहीं हूँ, यदि आज के मेरे लेख या टिप्पणियों से आपको ऐसा लगता है, तो क्षमाप्रार्थी हूँ... भविष्य में निश्चित तौर पर आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा।


    आभार!


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    मित्र असहज,

    आपके सभी लिंक मैंने पढ़े, निश्चित तौर पर Intermittent Fasting एवं Calorie restriction के स्वास्थ्य को कुछ फायदे हैं... पर इसी की तरह अन्य कई चीजें/काम भी स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद हैं... मैंने यहाँ इस स्थापना पर चोट करने की कोशिश की है, जो कहती है कि फलाने ईश्वर को खुश करना हो तो सप्ताह के इस दिन/ या इतने दिन/ या पूरे महीने उपवास करो...

    मुझे पता है कि आप Vegan हैं और हो सकता है कि आजकल Diet व Fasting के साथ कुछ प्रयोग भी कर रहे होंगे... आपकी या किसी की भी भावनाओं को चोट पहुंचाने का मेरा इरादा नहीं था... मैं पूर्वाग्रही नहीं हूँ, यदि आज के मेरे लेख या टिप्पणियों से आपको ऐसा लगता है, तो क्षमाप्रार्थी हूँ... भविष्य में निश्चित तौर पर आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा।


    आभार!


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