सोमवार, 20 सितंबर 2010

तेरी काली सूरत.... आक्क थू !!! कश्मीर में पत्थर फेंकने वालों का सच ... क्या इसे सुर्खियां देगा मीडिया ?...



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मेरे 'गोरे-गोरे' मित्रों,

बहुत सवाल उठाये जाते हैं अक्सर कि कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले कौन लोग हैं, हमारा तथाकथित मेनस्ट्रीम मीडिया, जिसे कई बार अपनी कोहनी और घुटने के बीच का फर्क (यह अंग्रेजी के मुहावरे का मुझ द्वारा किया सभ्य रूपांतरण है) तक समझ नहीं आता... पत्थर फेंकने वाले इन निरपराध, सताये हुऐ, अहिंसक और गुमराह (???) गिरोहों के ऊपर सीआरपीएफ व कश्मीर पुलिस द्वारा की जा रही तथाकथित ज्यादतियों के वर्णन से अपने अखबार व मैगजीन रंगे रहता है...यह सब दरकिनार करते हुऐ कि खबरों की रिपोर्टिंग में दोनों पक्षों की सुनी जानी चाहिये... तथा अपने राष्ट्र-हित का भी होश होना चाहिये...

ऐसे ही समय में मेरी नजर पढ़ी एक ऐसे लेख पर... जिसमें लिखी कुछ बातों को सुर्खियाँ मिलनी चाहिये थी... पर कभी नहीं मिलेंगी... Because our mainstream media has lost the capability to differentiate the arse from elbow... तो मुझे लगा कि आप तक तो पहुंचा ही दूँ यह बातें...

पूरा लेख आप यहाँ पर... पढ़ सकते हैं...

मैं उन अंशों को उद्धृत करूँगा जिनको मेरी नजर में सुर्खियाँ मिलनी चाहिये थीं... पर न मिली हैं... न मिलेंगी...



"An officer of the local police, a Kashmiri Muslim, tells me how stone-throwers often try to goad CRPF men to violence by mocking their religion and colour. One goes, “Gai teri mata hai, hum usko khata hai (the cow’s your mother, we eat her).” Another taunt is split between two groups. One group shouts, “Teri kali soorat…” The other responds, “yak thuuuu!” (Your black face…and a collective spit)."




कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि किस तरह पत्थर फेंकने वाले गिरोह सीआरपीएफ के जवानों को उनके धर्म व रंग के बारे में चिढ़ा कर हिंसा को उकसाते हैं...

गिरोह दो भागों में बंट जाता है... एक हिस्सा चिल्लाता है..." तेरी काली सूरत"... तो बाकी कहते हैं... "आक्क थू !!!"

एक और नारा है..." गाय तेरी माता है, हम उसको खाता है।"



और पढ़िये...




"Many young stone-throwers on the frontlines do not appear like Islamic radicals. They dress well, like music, cellphones and girlfriends are often discussed. Do they do what they do because they believe or does, as the police often allege, money play a part?

“We earned Rs 200 to Rs 300 as daily wage labourers,” says one of a group of masked young stone throwers. “Now we get between Rs 1,000 to Rs 1,500.” Who pays them? “The separatists,” one offers. In a quiet, two-room home with open drains outside, 20-year-old street icon, Owais Ahmed ‘Mandela’, freely admits to receiving money. Where does it come from? He shrugs."



यानी पत्थरबाजों को अलगाववादी एक दिन के काम (???) का १००० से १५०० रूपया तक देते हैं...जबकि पहले वह २००-३०० रूपया रोज कमाते थे...हाड़-तोड़ मजदूरी करके... यह और कोई नहीं, पत्थरबाजों का नेता खुले आम मान रहा है...



अब आप ही बताइये पत्थरबाजी रूके तो कैसे ?

और कब हमारे मीडिया को अकल आयेगी ।



आभार!




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समय मिले तो यह भी पढ़िये...
भारत के लिये समस्या नहीं है कश्मीर...





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19 टिप्‍पणियां:

  1. पत्थरों का अर्थशास्त्र - एक व्यंग्य लेख अपेक्षित है। कोई सुन रहा है?

    कभी कभी लगता है कि चिथड़ा चिथड़ा हो चुकी इस्लामी कश्मीर समस्या को पहले ठीक ठाक करना होगा फिर उसका हल। लेकिन यंग जनरेशन की यह नंग अलग तरह की जंग माँगती है। एक और कंफ्यूजन।
    अमाँ 370 हटा कर ये लोग वहाँ सबको बसने की अनुमति क्यों नहीं देते?
    समस्याएँ तो हर भारतीय झेल रहा है लेकिन ऐसी मनबढ़ई करने की सोचता भी नहीं। ज़ाहिर है पत्थरबाजी के पैसे मिलें तो किसे फुरसत है काम करने की या अच्छा सोचने की?
    इन सबका एक इलाज है - पकड़ कर इतना बजाओ की सब भूल जाँय - dress, cellphone और girlfriend। स्यापा करने वाले तो करते ही रहेंगे।

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  2. कश्मीर भारत का नासूर है -मैं कहता हूँ बिना ज्यादा देर के इसे काट कर अलग कर दो नहीं तो जहर पूरे भारत में फैलता जायेगा ...सारी सुविधायें बंद ,प्रिवी पर्सों की तर्ज पर करोड़ों अरबों का पॅकेज -बंद हो यह सब ! हरामजादे अपने हुनर और करतब से कमायें !
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  3. नेताओं ...... ने पूरे देश को कबीले में बदल दिया है. इस देश के भाग्य में ही यह सब बदा है वरना क्या बात है कि हर कोई समाधान चाहता है लेकिन वोट देने के समय सब भूल जाता है...मिश्रा जी पूरे देश में काश्मीर बना रही हैं पार्टियां....

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  4. http://kaulonline.com/blog/2010/09/kashmir-is-too-small-for-azadi/

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  5. कश्मीर सब के सब फॉउल खेल रहे हैं, हम ही आदर्शवादिता के झण्डे गाड़े गाड़े अपनी बेज्जती करा रहे हैं।
    मन विद्रोह कर उठे यह अशान्ति देख तो अनुचित न होगा।

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  6. Kasmir mangta ajaadi
    indian kute
    pattar khao
    vapis jao.

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  7. कल-परसों ही NDTV पर एक "बहना" ने भटके हुए नौजवानों का इंटरव्यू दिखाया था… मुँह पर कपड़ा ढांके हुए मासूम कह रहा था कि हम करोड़पति हैं इसलिये 300 रुपये लेकर पत्थर फ़ेंकने की बात गलत है… :) :)
    सोचिये कश्मीर में कितने करोड़पति होंगे… :)

    "मासूम और बेगु्नाहों" पर तरस खाने में वैसे भी तहलका और NDTV माहिर हैं… :)

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  8. @ कश्मीर नासूर है, काट कर अलग कर दो:

    जब तक हमारे हुक्मरान अपनी सोच नहीं बदलेंगे, हालात नहीं सुधरेंगे। आज कश्मीर नासूर है, काटने से इलाज होता हो तो लिखवा लीजिये आगे हिमाचल नासूर बनेगा, पंजाब नासूर बनेगा।
    शक्ति होना ही पर्याप्त नहीं है, जरूरत पड़ने पर उसे प्रदर्शित भी करना चाहिये। हम हैं कि थोथे आदर्शवाद, छद्म धर्मनिरपेक्षता में डूबे हुये हैं।
    हटा दी जाये धारा ३७०, अलग कानून खत्म हो फ़िर देखिये नतीजे। हाँ, वोटों पर फ़र्क जरूर पड़ेगा।

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  9. आपका कहना सही है , तस्वीर के 'सभी आयाम' देखे जाने चाहिए ! सहमत हूं !

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  10. @तस्वीर के 'सभी आयाम' देखे जाने चाहिए
    मैं भी सहमत हूँ

    इस विषय पर अभी तो अंशुमाला जी की टिपण्णी का इन्तजार है

    विषयांतर :
    @मेरे 'गोरे-गोरे' मित्रों
    आप जो नए नए नामों से पाठकों का संबोधित करते हैं, बड़ा अच्छा लगता है, हर लेख पर नए संबोधन का इन्तजार रहता है :)

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  11. कश्मीर समस्या के मूल में सिर्फ और सिर्फ धर्म है और कुछ नहीं. हमने कश्मीर को धरा ३७० के तहत रख कर कभी इसे हिंदुस्तान का अभिन्न हिस्सा बनने ही नहीं दिया. अगर कश्मीर में दुसरे धर्मों के लोग बहुसंख्यक होते तो ये आजादी कि बात ही नहीं उठती. कश्मीर का वो हिस्सा जहाँ पर मुस्लमान संख्या में कम है जैसे लेह और लद्दाख वहां तो शांति है जबकि वहां के निवासी कश्मीर घाटी के लोगों से कम सुविधाएँ पा रहे हैं. जहाँ तक कश्मीर को देश से अलग करने कि बात है तो ये किसी भी सूरते हाल में एक सही कदम नहीं होगा क्योंकि फिर ऐसी ही माग इस देश के हर उस हिस्से में उठेगी जहाँ भी मुस्लिम बाहुल्य है.

    बहुत पहले खुशवंत सिंह जी ने कहा था कि जिस भी देश में मुस्लमान बहुसंख्यक हैं उस देश में लोकतंत्र नहीं शरियत का कानून चलता है और भिन्न धर्मावलम्बियों को दुसरे दर्जे का नागरिक समझा जाता है. मुझे ये सत्य भी प्रतीत होता है. ऐसे देशों कि संख्या बहुत कि थोड़ी सी है जहा मुस्लिम बहुसंख्यक हैं और वहां पर सच्चा लोकतंत्र है. हमारे देश में इस तथाकथित अल्पसंख्यक वर्ग के लोग हर जगह उचें उचें पदों पर है. ऐसी स्थिति आप किसी भी मुस्लिम बाहुल्य वाले देश में दिखा दें. आप अगर अलादीन का चिराग लेकर निकालेंगे तो भी नहीं ढूंढ़ पाएंगे.

    आई फ्लू ग्रसित होकर घर पर बैठा हूँ अतः जो कुछ लिख पाया हूँ उसी से मेरे दिल कि भावना को समझ लें.

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  12. शुभभाव से इंगित किया सच्चाई को!!
    अब यह नासूर अतिशिघ्र ईलाज मांगता है।

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  13. राष्ट्र को इकत्र करने के लिए फिर से एक विष्णुगुप्त चाहिए .... फिर से एक सरदार पटेल चाहिए...


    समय मिले तो यह भी पढ़िए
    कैसे गूंगा भारत महान जिसकी कोई राष्ट्रभाषा नहीं ?

    मेरी दो कविताएँ हमारी मातृभाषा को समर्पित :
    १. उतिष्ठ हिन्दी! उतिष्ठ भारत! उतिष्ठ भारती! पुनः उतिष्ठ विष्णुगुप्त!
    http://pankaj-patra.blogspot.com/2010/09/hindi-diwas-rashtrabhasha-prakash.html

    २. जो मेरी वाणी छीन रहे हैं, मार डालूं उन लुटेरों को।
    http://pankaj-patra.blogspot.com/2010/09/hindi-diwas-matribhasha-rashtrabhasha.html
    – प्रकाश ‘पंकज’

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  14. कश्मीर भारत का नासूर है -मैं कहता हूँ बिना ज्यादा देर के इसे काट कर अलग कर दो नहीं तो जहर पूरे भारत में फैलता जायेगा ...सारी सुविधायें बंद ,प्रिवी पर्सों की तर्ज पर करोड़ों अरबों का पॅकेज -बंद हो यह सब ! हरामजादे अपने हुनर और करतब से कमायें !


    Agreed.... This comment should be treated as mine... views analogous...

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  15. कुछ गिने चुने फिरकपरस्तों के कारण इस देश के हिस्से को काटने की बात गलत है, यह ऐसे तत्वों को प्रोत्साहित ही करेगी । यह तो वही बात हुई थाल में सजा कर अपना सर्वश्व न्योछावर करना ।

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  16. कुछ और सच इस पोस्ट के बहाने चंद लोगों तक पहुँच तो रहे हैं...मेरा लिखना कुछ लोगों को एक-तरफा और पक्षपाती लग रहा था, जैसा कि चंद प्राप्त हुये मेलों से इंगित हुआ।

    शुक्रिया प्रवीण जी, इस पहलु के एक गंदे सत्य को सामने लाने के लिये...

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  17. पत्थरों का अर्थशास्त्र - एक व्यंग्य लेख अपेक्षित है। कोई सुन रहा है?...barke bhijee..sunlo.

    पकड़ कर इतना बजाओ की सब भूल जाँय - dress, cellphone और girlfriend। स्यापा करने वाले तो करते ही रहेंगे। g.rao

    सारी सुविधायें बंद ,प्रिवी पर्सों की तर्ज पर करोड़ों अरबों का पॅकेज -बंद हो यह सब ! हरामजादे अपने हुनर और करतब से कमायें ! a.mishra

    uprokt line sahi hai....sath me sare nataon ko fouz ke dwara lal kila par pared karo ... 5 saal tak
    ....hamra poora viswas hai...desh ka 95% samsya hal ho jayega.....

    pranam

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