रविवार, 15 अगस्त 2010

१५ अगस्त...जश्न-ऐ-आजादी...आप कैसे मनाओगे आज ?


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मेरे 'आजाद' मित्रों,

फिर से आज पंद्रह अगस्त है...

याने हमारा जश्न-ऐ-आजादी...

आज उत्सव का दिन है हम सबके लिये...


"हम कौन थे...क्या हो सकते थे... क्या हो गये... और क्या होंगे अभी..."



यह सब विचार मंथन तो चलता ही है साल भर...

सब कुछ भूल-भाल कर...

आज केवल उत्सव मनाइये...

उत्सव आजादी का...

आज अपनी नई व सबसे खूबसूरत पोशाक पहनूंगा मैं...

सुबह ८ बजे झंडा फहराया जायेगा मेरे आफिस में...

और इसके बाद मैं बिटिया को साथ लूंगा... बाजार जाउंगा... मिठाई का एक बड़ा सा डिब्बा खरीदूंगा... और हर परिचित-अपरिचित को बधाई देता... उसका मुंह मीठा कराता घूमूंगा अपने पास-पड़ोस में...

घर में भी स्पेशल कुछ बनाने को कह दिया है मैंने श्रीमती जी को...

आज हमारा सबसे बड़ा त्यौहार है...

और त्यौहार तो त्यौहार जैसे ही मनाना चाहिये हम सब को...




क्या ख्याल है आपका...





पंद्रह अगस्त मुबारक हो आप सब को !




आभार!






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11 टिप्‍पणियां:

  1. पंद्रह अगस्त मुबारक को आप सब को !
    आज़ादी के बहाने बढया प्रस्तुति !

    अंग्रेजों से प्राप्त मुक्ति-पर्व ..मुबारक हो!

    समय हो तो एक नज़र यहाँ भी:

    आज शहीदों ने तुमको अहले वतन ललकारा : अज़ीमउल्लाह ख़ान जिन्होंने पहला झंडा गीत लिखा http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html

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  2. स्‍वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई।

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  3. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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  4. मैं भी सोच रही हूँ आज दाल बाटी बना ली जाए ...
    जितनी भी है आजादी मुबारक ...!

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  5. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप आपको
    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.

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  6. हम भी बिटिया को टहलाने ले गये थे, पैदल।

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  7. हमने तो आज परिवार के साथ मालपूये खाए ...आप सभी को शुभकामनाएं !

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  8. बाकी सब ठीक लिखा है प्रवीण भाई पर पूरे साल चलने वाला "विचारमंथन " यह क्या है ?? और आत्म मंथन की तो बात ही न करें ...हम भारतीयों को इसकी आदत ही नहीं है

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  9. 30 tippanoyon me aap teeswen the satish bhai ke blog par.....aap ne hamari baat or mansha dono samjhi...... bhagwaan har bloogger ko aap sa banae....aameen....

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  10. वंदे मातरम् ....आपको देश की स्वतंत्रता दिवस पर बधाई। मैंने तो इसे उत्सव की तरह ही मनाया। खूब तफरीह की। कई जगह गया.....सोचा कि इतनी मेहनस से आजादी पाई। हमारे पूर्वजों ने दिलाई इसलिए न कि हम आजादी से सांस ले सकें। हंसे खेले कूदे। तो हम खुशी खुशी घूमते रहे। विचारमंथन तो खैर सदैव रहता है साथ। पर आज के दिन उसे विदा किया। आजादी को लुत्फ उठाया। क्योंकि जिनकी जगह दिल में हैं वो भी तो हमारी खुशी से खुश होते हैं। इसी के लिए तो उन्होंने कुर्बानी दी कि आने वाली नस्लें आजाद देश में सांस ले सके। खुल कर जी सके। बाकी मंथन बाद में।

    वंदे मातरम्

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