सोमवार, 2 अगस्त 2010

Aah at last !!!

.
.
.
मेरे ब्लागर मित्रोँ,

सुबह से प्रयत्नरत था, अब जाकर कामयाब हुआ... मोबाइल से यह पोस्ट करने मेँ... अपनी पीठ खुद थपथपाना तो बनता है... क्या कहते हैँ आप ?

अब जब यह पोस्ट कर ही रहा हूँ तो एक ख्याल दिल में है... राहुल और डिम्पी छाये हैँ हर जगह...

कितना सही है यह ... Washing of dirty linen in Public & role of our electronic & print media... सोचिये...


आभार !


...

9 टिप्‍पणियां:

  1. .
    .
    .
    धन्यवाद !


    आप सब को, यह कमेँट भी फोन से ही है।


    ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. E-७१ नोकिया है, अब हमें भी सिखाओ ...या खुद की विद्या किसी और को नहीं बताना है ?? फीस दे दी जाएगी ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. .
    .
    .
    आदरणीय सतीश सक्सेना जी,

    काफी आसान है फोन मेँ Opera-Mini browser डाउनलोड करेँ...
    फिर लैपटाप जैसा ही करना है।


    ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह बधाई ! अब मुझे भी एक शुक्रिया भेजिए ओपेरा मिनी से !

    उत्तर देंहटाएं
  5. .
    .
    .
    .
    शुक्रिया आदरणीय अरविन्द मिश्र जी,

    ओपेरा मिनी से...


    ...

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!