सोमवार, 30 अगस्त 2010

जलन,जलना,जला देना और जलजले का आना !!! : ब्लॉगवुड गॉसिप




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मेरे ब्लॉगवुड-स्टार मित्रों,

कल छुट्टी के दिन इतना कुछ घट गया...जबकि आप में से कुछ मौजूद तक नहीं थे...किनारे पर खड़ा मैं देखता रहा यह सब...आज मुझे फर्ज सा लगा कि आप तक भी यह हलचल पहुंचें...



*** कल जन्मदिन था डॉ० अमर कुमार का... एक शानदार पोस्ट भी लिखी उनके बारे में तरूण जी ने... फिर ऐसा क्या हो गया... कि

सतीश सक्सेना जी को कहना पड़ा...

@ डॉ अमर कुमार
बड़े खतरनाक आदमी हो यार !


और डॉ० अमर कुमार कहे...

सॉरी, ड्राफ़्ट किया ही था.. यह पोस्ट कैसे हो गयी ?
क्षमा करें, मैं अपनी टिप्पणियाँ हटाया नहीं करता !
फिर.. यह तो मेरी ऎतिहासिक अँतिम टिप्पणी है ।





*** इधर भी देखिये कैसे 'अंतिम प्रणाम ने व्यथित किया उनको...और मामला निबटने की बजाय बढ़ता सा लग रहा है।




*** कुछ गाली-शाली देने की इच्छा हो, तो जाईये यहाँ पर दे आइये किसी को भी भद्दी से भद्दी गाली...सब छपेगा यहाँ पर... यह ब्लॉग एक संस्कृति चिंतक-नारी हित चिंतक, युवा तुर्क का बनाया बताया जाता है... बहरहाल थूकदान-पीकदान-कूड़ेदान का काम कर रहा है...इसकी कमी भी थी शायद...




*** अरे यह क्या इतना जबरदस्त गॉसिप पढ़वाया आपको और आप मेरी झोली में बिना कुछ डाले खिसक रहे हैं...

क्या आप भी चोर हैं ?...

अरे, मैं तो शरीफ समझता था आपको...

चलिये जाइये...
कोई बात नहीं टिप्पणी नहीं तो न सही...

आप अब भी शरीफ ही रहेंगे मेरी नजर में...





आभार!






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बुधवार, 25 अगस्त 2010

'चित्त' तो 'उस' की है ही...'पट' भी 'उसी' की है... और 'अंटा' भी हे प्रभु तेरा ही है...तुझे नमन !!!


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मेरे 'सिक्का उछालने वाले' मित्रों,


बहुत पहले यह लेखमाला शुरू की थी... बीच में गाड़ी पटरी से उतर कर किसी और दिशा में चल पड़ी... आज अचानक यह याद आया कि कुछ छूट गया सा है...यह भी जरूरी है...


आज एक बार फिर से बात करते हैं उस सर्वशक्तिमान-अजन्मे-अविनाशी-अनदेखे-अन्जाने-सर्वव्यापी-परमपिता की...
एक तर्क जो अकसर 'उस' का अस्तित्व वाकई में होने के पक्ष में 'ज्ञानी जन' देते हैं... वह उनके व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित होता है... लगभग सभी के पास एक कहानी होती है...जिसका कथ्य कमोबेश एक सा ही होता है... वह शख्स किसी ऐसी दुर्घटना से साक्षात्कार कर चुका होता है जिसमें सुरक्षित बचने की संभावनायें उसके अनुसार शून्य थीं... फिर भी 'उस' की कृपा से वह शख्स बच गया...'ज्ञानी जनों' की नजर में यह सबसे बड़ा सबूत है 'उस'के होने का !


आइये एक-दो उदाहरणों से समझते हैं कि क्या वाकई ऐसा है...


मान लीजिये एक एयरक्राफ्ट को लैंड करते समय दिक्कत हो गई...




अब नतीजे होंगे तीन...

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हमारे 'ज्ञानी जन' बिना किसी खरोच के साफ-साफ बच निकले...

यह तो 'उस' की कृपा है...

यानी चित्त तो 'उस' की है ही...


***
मंगलौर जैसा हादसा हुआ और सब-कुछ, हर-कोई खत्म हो गया...

यह पायलट की और ऐयरट्रैफिक कंट्रोलर की गलती थी... वैसे भी 'उस' ने इन सब बेचारों को दुनिया में बस इतने ही समय के लिये भेजा था...समय पूरा हुआ तो बुला लिया!

'पट' भी 'उसी' की है...


***
'ज्ञानी जन' बच तो गये... पर एक टांग काटनी पड़ी...और एक आंख भी गई...

'उस' का लाख-लाख शुक्र है... कम से कम एक आंख देखने को और एक टांग थोड़ा बहुत चलने को तो छोड़ दी!

और 'अंटा' भी हे प्रभु तेरा ही है...तुझे नमन !!!




अब देखिये

दूसरे 'ज्ञानी जन' के इकलौते होनहार ने एक नौकरी के लिये इम्तहान दिया...


फिर नतीजे होंगे तीन...


***

'इकलौता होनहार' कामयाब हो गया

यह तो 'उस' की कृपा है...

यानी चित्त तो 'उस' की है ही...


***

'इकलौता होनहार' कामयाब नहीं हो पाया...

ऐन इम्तहान के समय बेचारे की तबीयत नासाज थी... वैसे भी आजकल सिफारिश का जमाना है...

'पट' भी 'उसी' की है...


***

पूरा इम्तहान ही कैंसिल हो गया...

यह सब 'उस' की 'माया' है... जरूर 'उस' ने मेरे 'इकलौते होनहार' के लिये कुछ अलग और अनूठा सोच रखा होगा!

और 'अंटा' भी हे प्रभु तेरा ही है...तुझे नमन !!!



इसलिये मित्रों,

पूरी ताकत से सिक्का उछालिये...

और जाप करिये इस मंत्र का...

पूरी आस्था के साथ...



'चित्त' तो 'तेरी' है ही...'पट' भी है 'तेरी'... और 'अंटा' भी हे प्रभु तेरा ही है...तुझे नमन !!!








ईश्वर और धर्म को एक संशयवादी परंतु तार्किक दॄष्टिकोण से समझने का प्रयास करती इस लेखमाला के अब तक के आलेख हैं, समय मिले तो देखिये :-



वफादारी या ईमानदारी ?... फैसला आपका !

बिना साइकिल की मछली... और धर्म ।

अदॄश्य गुलाबी एकश्रंगी का धर्म...

जानिये होंगे कितने फैसले,और कितनी बार कयामत होगी ?

पड़ोसी की बीबी, बच्चा और धर्म की श्रेष्ठता...

ईश्वर है या नहीं, आओ दाँव लगायें...

क्या वह वाकई पूजा का हकदार है...

एक कुटिल(evil) ईश्वर को क्यों माना जाये...

यह कौन रचनाकार है ?...







आभार!

गुरुवार, 19 अगस्त 2010

क्या ईमानदारी व नैतिकता महज दो शब्द हैं और व्यवहारिकता ही आज का मूलमंत्र है ???


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मेरे 'व्यवहारिक' मित्रों,

बहुत दुखी है मन आजकल...

कुछ दिन पहले एक पुराने मित्र से मुलाकात हुई... साथ बैठे हम लोग... वह जब ग्रेजुऐशन कर रहा था तभी उसका विवाह हो गया था... जबकि अपन ने विवाह किया ३३ वर्ष की पकी उम्र में...

अपने विद्मार्थी जीवन में उस मित्र की विद्वता चमत्कृत करती थी मुझे... साथ ही हर हाल में ईमानदार व नैतिक बने रहने का उस का निश्चय भी मुझे उस की ओर खींचता था... स्नातक होने के बाद हम दोनों के रास्ते बदल गये... एक सरकारी विभाग में ऊँचा अधिकारी है वह आज ...

खाने-पीने का दौर चला... एक दूसरे के साथ पुरानी यादें ताजा की हमने... हंसे बहुत... अपनी मुद्दतों पुरानी बेवकूफियों पर... सब कुछ ठीकठाक, सुखमय और सुन्दर चल रहा था... अचानक मुझे याद आया कि पूछ ही लेना चाहिये परिवार के बारे में भी... मैंने पहले तो बताया कि ८ साल पहले शादी की, बिटिया ५ साल की है और यूकेजी में पढ़ती है... फिर उस से पूछा उसके तीन बच्चों के बारे में... दो बेटियाँ और एक बेटा था उस का...

मुझ द्वारा यह सवाल पूछते ही कुछ असहज सा हो गया वह... " बड़ी बिटिया का एडमिशन डेंटल कालेज में कराया दो साल पहले "... बताया उसने... कंपिटिशन से वह निकल नहीं पाई... डोनेशन देकर एडमिशन कराया... कुल मिला कर पौने तीन लाख सालाना का खर्च आता है उसे पढ़ाने पर...

यह सब बताते हुऐ मैंने देखा कि उस का चेहरा बुझ सा गया था... हो सकता है कि मेरा भ्रम हो... परंतु मुझे उसकी आंखों के कोने में नमी सी भी दिखाई दी... मैं उठा और उसका हाथ दबाया... " क्या हुआ, सब कुछ ठीकठाक तो है न, मेरी जान "... फीकी हंसी हंसा वो... " अब मैं तेरा वो पहले वाला यार नहीं रहा मेरे दोस्त "... मानो सूचित सा किया उसने...

आगे जो कुछ उसने बताया उसका लब्बोलुबाब यह था कि काफी लम्बे समय तक अपनी ईमानदारी, नैतिकता व सिद्धान्तों को साधे रहा वह... परंतु लाडली बेटी ने जब दूसरी बार कम्पिटिशन में नाकामयाबी पाने पर उसे ताना दिया कि... " आपके डिपार्टमेंन्ट में आपके आधीनस्थ अन्य कर्मचारी तो अपने दो-दो बच्चों को डोनेशन कॉलेज से मेडिकल और ईंजीनियरिंग करवा रहे हैं... और एक आप हो... आपके सिद्धान्त व ईमानदारी हमारे किस काम की ?... इसे ओढ़ें या बिछायें? "

एक गहरी सांस ले, निस्तेज चेहरे के साथ वह बोला ... " अब मैं भी प्रैक्टिकल हो गया हूँ... क्या करूँ बच्चों को दुखी नहीं देख पाया मैं "

गहरे पशोपेश में पड़ गया हूँ मैं...

इसी लिये उछाला है यह आज का सवाल...


क्या ईमानदारी व नैतिकता महज दो शब्द हैं और व्यवहारिकता ही आज का मूलमंत्र है ???


अब आप भी यहाँ यह न कहियेगा DR. ANWER JAMAL कि इस प्रश्न का उत्तर धार्मिकता में है... क्योंकि लगभग सारे के सारे प्रैक्टिकल लोगों को धार्मिकता से ओतप्रोत पाया है मैंने... इतना कि ज्यादा कमाई वाली कुर्सी के लिये भी 'ऊपरवाले' से खुलेआम याचना, उसके सामने नाक रगड़ते हैं वे...



आभार!



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रविवार, 15 अगस्त 2010

१५ अगस्त...जश्न-ऐ-आजादी...आप कैसे मनाओगे आज ?


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मेरे 'आजाद' मित्रों,

फिर से आज पंद्रह अगस्त है...

याने हमारा जश्न-ऐ-आजादी...

आज उत्सव का दिन है हम सबके लिये...


"हम कौन थे...क्या हो सकते थे... क्या हो गये... और क्या होंगे अभी..."



यह सब विचार मंथन तो चलता ही है साल भर...

सब कुछ भूल-भाल कर...

आज केवल उत्सव मनाइये...

उत्सव आजादी का...

आज अपनी नई व सबसे खूबसूरत पोशाक पहनूंगा मैं...

सुबह ८ बजे झंडा फहराया जायेगा मेरे आफिस में...

और इसके बाद मैं बिटिया को साथ लूंगा... बाजार जाउंगा... मिठाई का एक बड़ा सा डिब्बा खरीदूंगा... और हर परिचित-अपरिचित को बधाई देता... उसका मुंह मीठा कराता घूमूंगा अपने पास-पड़ोस में...

घर में भी स्पेशल कुछ बनाने को कह दिया है मैंने श्रीमती जी को...

आज हमारा सबसे बड़ा त्यौहार है...

और त्यौहार तो त्यौहार जैसे ही मनाना चाहिये हम सब को...




क्या ख्याल है आपका...





पंद्रह अगस्त मुबारक हो आप सब को !




आभार!






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शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

ब्लॉगवुड पर क्या वाकई आतंकी हमला हुआ है... संकलकों के संचालकों से कुछ बातों के जवाब चाहिये ! जवाब नहीं मिले अब तक... (भाग -२)


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कल भी यह मांग की थी मैंने, दोबारा आज-अभी अपनी इस पोस्ट के माध्यम से मांग करता हूँ कि दोनों नये संकलकों को चलाने वाले संचालक हम सभी ब्लॉगरों के सामने आयें व अपने नाम, पते, पहचान व संपर्क संबंधी जानकारी सारे ब्लॉगवुड के सामने जाहिर करें !




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मेरे ब्लॉगर मित्रों,

सबसे पहले मेरी स्वीकारोंक्ति... मैं कम्प्यूटर का प्रयोग तो करता हूँ पर इस के पीछे की तकनीक का अधिक ज्ञान नहीं है मुझे... केवल उतना ही जानता हूँ जितना एक सामान्य प्रयोक्ता को जानना चाहिये... इसलिये यदि आप में से किसी को मेरी पिछली पोस्ट पढ़ने के परिणामस्वरूप कोई असुविधा हुई है तो मैं तहे-दिल से क्षमाप्रार्थी हूँ।

आज जो कहना चाह रहा हूँ उसे समझने के लिये पहले मित्र कनिष्क कश्यप की यह पोस्ट पढ़िये...


वैसे तो इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह रहे हैं कनिष्क, परंतु सबसे मुख्य बातें जो कनिष्क ने कही हैं उनका सार यह है...



*** महत्वपूर्ण यह है कि, हमें यह ज्ञात होना चाहिये कि किसी भी संकलक के संचालन के पीछे किसका हाथ है। ब्लागवाणी को नकारने और गाली देने में जो लोग हमेशा आगे रहे , उन्हें भी यह बात समझ में आनी चाहिये। आम तौर पर हम ब्लागर्स को एक किसी भी साइट/संकलक पर जुड़ने से पुर्व उसके संचालक को लेकर आश्वस्त हो लेना चाहिये। किसी भी संकलक पर रजिस्टर करते वक्त यह ध्यान अवश्य रखें की आप उसी पासवर्ड का इस्तेमाल न करें जो आपके गुगल, पे-पाल अथवा अन्य महत्वपूर्ण खाते का है। इस बात की कोई गारंटी नही ली जा सकती कि वेब मास्टर आपका पासवर्ड देख कर आपके अन्य खातों पर हाथ न आजमा ले। फिर हमें उस साइट की प्राइवेसी पालेसी और गूगल ट्रस्ट को भी नापना होता है।

*** आइये अब इन दोनों नये संकलकों के माता पिता का पता लगाएं!





मैं आज-अभी अपनी इस पोस्ट के माध्यम से मांग करता हूँ कि दोनों नये संकलकों को चलाने वाले संचालक हम सभी ब्लॉगरों के सामने आयें व अपने नाम, पते, पहचान व संपर्क संबंधी जानकारी सारे ब्लॉगवुड के सामने जाहिर करें !



मैं गलत तो नहीं हूँ न ?




आभार!





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32 पाठकों ने टिप्पणी की,आप भी करिये न...:

मो सम कौन ? said...

हम लोगों की मुफ़्त की चीज की तरफ़ भागने की प्रवृत्ति हमें यह मौका ही नहीं देती कि कुछ सोचें समझें। चलिये, ये भी एक सबक ही सही।
August 12, 2010 12:35 AM
Kanishka Kashyap said...

bahut achhe !

aapka javab nahi ! is pahal mein ham aapke saath hai, unhe sach mein saamne ana chahiye!
August 12, 2010 12:55 AM
Anonymous said...

पहले हमारीवानी के whois में निम्न नाम आता था
Name: Shahnawaz Siddiqui
Address: B-58, Street No. 18, Jitar Nagar,
City: Delhi
State: DELHI
Postal Code: 110051
Country: IN
Phone: 22422392
Fax: 0
Email: sahiltrad@yahoo.com

बाद में इसमें नाम छुपा कर Add Shoppe का नाम आने लगा, इसके अमेरिकी साथी हैं
Mohammad Abdullah Khan & Aziza Sultana Khan
SABA COMMUNICATIONS
301 Dani Rose Lane
Bakersfield, CA 93308 USA
Tel : 1-661-393-3322
Toll Free : 1-888-434-SABA
Mobile : 1-661-3400-786
August 12, 2010 5:02 AM
Ratan Singh Shekhawat said...

इन संकलक संचालकों द्वारा अपनी पहचान उजागर न करना वाकई चिंताजनक है
August 12, 2010 7:22 AM
Udan Tashtari said...

जब फ्री में सब अच्छा खासा चल रहा था..तब भी हमसे कहाँ बर्दाश्त था
August 12, 2010 8:03 AM
Anonymous said...

ये तो ओपन सीक्रेट है... हमारी वाणी चलाने वाला शहनवाज़ है और इसको चलाने की प्रेरणा इसको ज़ाकिर नाइक ने दी है क्योंकि उसके गुंडो को चिट्ठाकारी में ऐसा करे बिना वह जगह हासिल नहीं हो सकती जो वह चाहता है... जिन लोगों को पहले सारे ब्लागर ब्लागिंग से बाहर निकालना चाहते थे अब उनकी ही दया पर ब्लागिंग कर रहे हैं... कैसा लग रहा है?
August 12, 2010 8:22 AM
ali said...

प्रवीण जी ,
आपकी पिछली पोस्ट ? हम तो अपनी वाणी में भी पहुंच गये ! लाल झंडियां वहां से भी आ रही हैं !
August 12, 2010 8:41 AM
प्रवीण शाह said...

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@ अली साहब,

एक बार मांग चुका हूँ , पुन: क्षमाप्रार्थी हूँ , मित्र...


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August 12, 2010 9:12 AM
Mahak said...

नये संकलकों को चलाने वाले संचालक हम सभी ब्लॉगरों के सामने आयें व अपने नाम, पते, पहचान व संपर्क संबंधी जानकारी सारे ब्लॉगवुड के सामने जाहिर करें !

आपकी मांग बिलकुल ठीक है ,यही मांग मैं भी करता हूँ
August 12, 2010 10:10 AM
Anonymous said...

सभी नए संकलकों जैसे हमारीवाणी, अपनीवाणी, इंडली वगैरा के संचालक अपना चेहरा छिपाए क्यों बैठे हैं? किसी के भी नाम घर का पता क्यों नहीं है?
August 12, 2010 11:13 AM
Suresh Chiplunkar said...

नाम पते तो बेनामी ने ज़ाहिर कर ही दिये… अब रहा सवाल मंसूबे का, वो भी उजागर ही हैं… :)
August 12, 2010 11:23 AM
जेहादी सूअर said...

यह सारा खेल जाकीर नायक करवा रहा है, इसके गुर्गे लखनऊ में बैठकर हिन्दी ब्लागिग पर कब्जा करना चाहते हैं, कई लोगों ने पहले भी चेतावनी दी थी कि जिस ब्लाग पर कुरान-मोहम्मद-पैगम्बर जैसे शब्द दिखाई दें उसे तुरन्त बन्द करें और दोबारा उधर न जायें, लेकिन कुछ चूतियों को हिन्दू-मुस्लिम एकता का शौक चर्राया है जबकि कुछ मूर्ख हिन्दू उग्रवादी ब्लागर भी उधर जाकर सूअरों के मुँह लगते हैं।

ब्लागवाणी बन्द करवाने में इन्हीं लोगों का हाथ है ताकि मैदान साफ़ हो जाये।
August 12, 2010 11:29 AM
चूतिया हिन्दू said...

ऐसा नहीं कि सिर्फ़ जेहादी लोग इस गन्दे खेल में लगे हैं, कुछ हिन्दू ब्लागर भी हैं जो तकनीकी जानकार हैं और टिप्स देने के बहाने कोड बताते हैं और गेम बजा डालते हैं
August 12, 2010 11:58 AM
अपनीवाणी said...

प्रिये ब्लोगरों ऐसा कुछ नहीं है जैसा आप लोग समझ रहें हैं और जो लोग आपको भड़का रहें है उनको खुद ही कुछ नहीं पता है! क्या आपको लगता है की गूगल को कोए इतनी आसानी से हैक कर सकता है जन्हा हजारों लोग हर समय इसी पर काम करतें है जो देवता है इन्टरनेट का ! ये कोइ आपका अकाउंट हैक करने का वायरस नहीं है यह मालवेअर होतें है जो वेबसाइट पर कुछ गलत पोस्ट जैसे कुछ कोड पेस्ट करने से आतें है यह साधारद जावा स्क्रिप्ट होती है जिसको गूगल या को वैरस पकड़ने वाला सॉफ्टवेर गलत समझता है ! और अप apnivani.com पूरी तरह सुरक्षित है हमारे टेस्ट में गूगल ने भी इसे हरी झंडी दिखा दी है आपलोग निश्चिन्त रहिये !

और रही बात हिन्दू मुस्लिम की तो आपलोग ब्लॉग लिखतें है या कोए जाती पाती की किताब लिखते हैं ऐसे भवना हमारे मन में नहीं होनी चाहिए

हमारी १ टीम है जो apnivani.com पर काम करती है
कुछ अच्छा करने के लिए सोंचा हमने इस हिंदी जगत के लिए अब जाकर लगा की कोए फायदा नहीं है कुछ करने का !

धन्यवाद
www.apnivani.com
August 12, 2010 1:06 PM
Suresh Chiplunkar said...

भाई अपनी वाणी जी,
आपका स्पष्टीकरण कुछ अधूरा सा है, हम जैसे लोग जो तकनीकी रुप से अज्ञानी हैं, उन्हें कैसे पता चले कि फ़लाँ साइट सुरक्षित है। वो तो भला हो कनिष्क जी का जिन्होंने मुझे सूचित किया कि मेरे ब्लाग पर कोई वायरस है (और वह भी इसलिये पकड़ में आया क्योंकि मेरा ब्लाग ब्लागस्पाट पर नहीं है), वरना मुझे तो कभी पता ही नहीं चलता।

इसलिये प्रवीण शाह जी और भाई महक की माँग सही है कि सभी ब्लॉग संकलक अपने नाम-पते-फ़ोन नम्बर और ईमेल सार्वजनिक करें ताकि पारदर्शिता बनी रहे…। बाकी का भण्डाफ़ोड़ कनिष्क ने कल कर ही दिया है, और आज भी एक बेनामी ने कुछ नाम उजागर किये हैं।
August 12, 2010 1:15 PM
हमारीवाणी.कॉम said...

हमारीवाणी.कॉम वाइरस तथा मालवेयर इन्फेक्शन से सुरक्षित है

हमारीवाणी की ओर से परेशान मत होइए, क्योंकि हमारीवाणी की टीम इन्फेक्शन देखते ही समाप्त कर देती है. यह बात सही है कि किसी ने कई बार इन्फेक्शन भेजने की कोशिश की है और हर बार हमारे सर्वर पर से उसे डिलीट कर दिया गया है. कल डिलीट होने में थोडा सा समय लगा, और इसी कारण गूगल इन्फेक्शन का सन्देश दे रहा है. गूगल क्रोम से इन्फेक्शन का सन्देश समाप्त होने में थोडा सा समय लगता है, इंटरनेट एक्स्प्लोरर तथा मोज्ज़िला में यह प्रोब्लम नहीं आएगी. गूगल क्रोम की टीम को हमारीवाणी के सन्दर्भ में सूचित कर दिया गया है, आशा है जल्दी ही इन्फेक्शन का सन्देश समाप्त हो जाएगा.

हमारा सर्वर कल सुबह ही सभी तरह के इन्फेक्शन से क्लीन हो चूका है और साईट खोलने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं हैं. जैसा की हमने पहले भी घोषणा की थी कि कोई यूज़र टिपण्णी के माध्यम से आई-फ्रेम बनाकर हमारे सर्वर तक जानबूझकर इन्फेक्शन भेज रहा है. ......

अधिक पढने के लिए यहाँ क्लिक करें
http://hamarivani.blogspot.com/2010/08/blog-post_11.html
August 12, 2010 1:42 PM
प्रवीण शाह said...

@ अपनीवाणी,

यदि आप वाकई सही कह रहे हैँ तो संचालकोँ को अपना नाम, अपनी पहचान बताने मेँ हिचक क्या है ?
August 12, 2010 1:51 PM
अपनीवाणी said...

मेरा नाम आशु शर्मा है मैं नॉएडा का रहने वाला हु
और मैं अपने टीम के साथ अपनी वाणी का संचालन करता हु !
आप किसी भी समस्या के लिए support@apnivani.com पर ईमेल कर सकतें हैं हम जल्दी आपकी आसानी के लिए sms और फ़ोन सेरविसे भी चालू करने वालें है जिससे किस को भी कोइ समस्या नहीं आएगी भविष्य में!

धन्यवाद...
आपकी अपनी टीम www.apnivani.com
August 12, 2010 2:03 PM
अपनीवाणी said...

हम भविष्य में हिंदी जगत के लिए और भी हिंदी ज्ञान हतु कुछ वेबसाइट का सञ्चालन करने वालें हैं जिससे हिंदी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाया जा सके!
बस इस बीच आप लोगो का साथ चाहिए! कियोंकि आप लोगो के बिना हम आगे नहीं बाद सकते! आपलोगों का इतने वर्षो का ज्ञान है जिसकी हमें बहुत आवश्यकता है !

धन्यवाद...
आपकी अपनी टीम www.apnivani.com
August 12, 2010 2:22 PM
अपनीवाणी said...

आप लोग अब गूगल में भी जाकर apnivani को खोज सकतें है गूगल ने भी हमें हरी झंडी दिखा दी है

धन्यवाद...
आपकी अपनी टीम www.apnivani.com
August 12, 2010 2:28 PM
पी.सी.गोदियाल said...

जब तक ब्लोगवाणी वापस नहीं आ जाती सिर्फ और सिर्फ चिट्ठाजगत का ही उपयोग करे यही मेरी सलाह है !
August 12, 2010 3:13 PM
दिवाकर मणि said...

तकनीकी पहलुओं से अनभिज्ञ ब्लॉगरो-ब्लॉगपाठकों को सचेत करने हेतु आपका भूरिशः धन्यवाद.
August 12, 2010 3:47 PM
हमारीवाणी.कॉम said...

यह परेशानी बहुत ही साधारण है, ब्लोग्वानी के साथ भी कई बार हो चुकी है

यह एक साधारण प्रॉब्लम है और अक्सर सभी तरह की वेब साईट में आतीं रहती है. अब से पहले यह परेशानी ब्लोग्वानी में भी कई बार आ चुकी है. इसका एक उदहारण आप निम्न लिंक पर जा कर देख सकते हैं.
http://blog.masijeevi.com/2009/12/blog-post_6186.html

लेकिन इस बार हौव्वा खड़ा किया जा रहा है. जैसे की हमने कल ही बताया था कि यह प्रॉब्लम कल ही ठीक कर ली गई थी, इसलिए परेशानी की कोई बात ही नहीं है. हमारीवाणी की टीम दिन-रात हिंदी भाषा की उन्नति तथा ब्लॉग जगत के उत्थान के लिए एक बेहतर ब्लॉग संकलक बनाने की मेहनत में लगी हुई है. ब्लॉग लेखकों को हुई परेशानी के लिए हमें खेद है.

जहाँ तक बात हमारीवाणी के संस्थापकों की है, तो अभी तक इसकी आवश्यकता नहीं पड़ी इसलिए नाम नहीं बताए गए. लेकिन अगर आप चाहते हैं तो सभी नाम आपके सामने रखे जाएँगे. इसके लिए सभी संस्थापकों से हमारीवाणी टीम बात करेगी. अभी आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं, कि सभी संकलक ब्लॉग तथा मीडिया जगत से सम्बंधित ही हैं और आप उन पर विश्वास कर सकते हैं. कृपया who is के द्वारा आने वाले पते अथवा नाम पर ध्यान मत दें.

टीम हमारीवाणी

http://hamarivani.blogspot.com/2010/08/blog-post_12.html
August 12, 2010 4:05 PM
सुनील दत्त said...

रोचक
August 12, 2010 5:55 PM
ab inconvinienti said...

अपनीवाणी और हमारीवाणी के नाम से जो टिप्पणियां आ रही हैं, उनकी भाषा-शैली ही काफी कुछ कह देती है.
August 12, 2010 7:34 PM
ana said...

khuch bhi ho mera blog aur post abhi bhiinahi dikh rahe hai
August 12, 2010 8:27 PM
सतीश सक्सेना said...

सही प्रश्न उठाया गया है , संचालकों के पते प्रकाशित करने में आपत्ति क्या हो सकती है , इस पर कार्य होना चाहिए आपकी यह पोस्ट अत्यंत आवश्यक थी, आभार
August 12, 2010 9:05 PM
Ghost Buster said...

अपनीवाणी के बारे में तो आपसे ही पता चला पर हमारीवाणी पर जाकर देख चुका हूं. वहां जितनी पोस्ट थीं उन्हें देखकर एक नज़र में ही समझ आ गया था कि ये स्वच्छ गिरोह का ही काम है. उल्टे पांव लौट लिये थे.
August 12, 2010 9:24 PM
सुज्ञ said...

प्रवीण जी,
इस समस्या पर आपका मुखर होना सराहनीय है।
यह ठीक है कि संकलक निशुल्क सेवा प्रदाता है,लेकिन संकलक संचालकों के बारे में जानना न केवल सदस्यों का अधिकार है बल्कि आवश्यक्ता भी।
August 12, 2010 11:12 PM
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बहुत सही एवं नितान्त आवश्यक मुद्दा उठाया आपने......हतप्रभ हूँ कि ये स्वच्छ(?) लोगों की जुंडली कैसे कैसे खेल खेलने में जुटी है. कहीं इन लोगों के षडयन्त्र हिन्दी ब्लागिंग को शैशवावस्था से ही सीधे मृ्त्युशैय्या पर न ले जाएं....
August 13, 2010 2:59 AM
प्रवीण पाण्डेय said...

समस्या गहरी है। कई अच्छे ब्लॉग नहीं खोल पा रहा हूँ इस समस्या से। आपका उपाय दुरुस्त है।
August 13, 2010 8:22 AM
ab inconvinienti said...

इनके पास ब्लॉग एग्रेगेटर बनाने के लिए फंडिंग कहाँ से आई? कुछ महीने पहले तक स्वच्छ गिरोह के ज़्यादातर सदस्य बेरोजगार थे.
August 13, 2010 8:57 AM

बुधवार, 11 अगस्त 2010

ब्लॉगवुड पर क्या वाकई आतंकी हमला हुआ है... संकलकों के संचालकों से कुछ बातों के जवाब चाहिये!



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मेरे ब्लॉगर मित्रों,

सबसे पहले मेरी स्वीकारोंक्ति... मैं कम्प्यूटर का प्रयोग तो करता हूँ पर इस के पीछे की तकनीक का अधिक ज्ञान नहीं है मुझे... केवल उतना ही जानता हूँ जितना एक सामान्य प्रयोक्ता को जानना चाहिये... इसलिये यदि आप में से किसी को मेरी पिछली पोस्ट पढ़ने के परिणामस्वरूप कोई असुविधा हुई है तो मैं तहे-दिल से क्षमाप्रार्थी हूँ।

आज जो कहना चाह रहा हूँ उसे समझने के लिये पहले मित्र कनिष्क कश्यप की यह पोस्ट पढ़िये...


वैसे तो इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह रहे हैं कनिष्क, परंतु सबसे मुख्य बातें जो कनिष्क ने कही हैं उनका सार यह है...



*** महत्वपूर्ण यह है कि, हमें यह ज्ञात होना चाहिये कि किसी भी संकलक के संचालन के पीछे किसका हाथ है। ब्लागवाणी को नकारने और गाली देने में जो लोग हमेशा आगे रहे , उन्हें भी यह बात समझ में आनी चाहिये। आम तौर पर हम ब्लागर्स को एक किसी भी साइट/संकलक पर जुड़ने से पुर्व उसके संचालक को लेकर आश्वस्त हो लेना चाहिये। किसी भी संकलक पर रजिस्टर करते वक्त यह ध्यान अवश्य रखें की आप उसी पासवर्ड का इस्तेमाल न करें जो आपके गुगल, पे-पाल अथवा अन्य महत्वपूर्ण खाते का है। इस बात की कोई गारंटी नही ली जा सकती कि वेब मास्टर आपका पासवर्ड देख कर आपके अन्य खातों पर हाथ न आजमा ले। फिर हमें उस साइट की प्राइवेसी पालेसी और गूगल ट्रस्ट को भी नापना होता है।

*** आइये अब इन दोनों नये संकलकों के माता पिता का पता लगाएं!





मैं आज-अभी अपनी इस पोस्ट के माध्यम से मांग करता हूँ कि दोनों नये संकलकों को चलाने वाले संचालक हम सभी ब्लॉगरों के सामने आयें व अपने नाम, पते, पहचान व संपर्क संबंधी जानकारी सारे ब्लॉगवुड के सामने जाहिर करें !



मैं गलत तो नहीं हूँ न ?




आभार!





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मंगलवार, 10 अगस्त 2010

एकदम नया और शानदार है यह.. आप भी 'अपनी वाणी' आज ही बनाइये इसे !!!


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मेरे 'ब्लॉगर' दोस्तों,


यूं ही नेट पर विचरण करते समय यहाँ से पता चला, अपनी वाणी के बारे में...


अभी तक केवल ३९ ब्लॉग ही जुड़े हैं इस से... परंतु बहुत ही साफ-सुथरा, मिनिमलिस्टिक और तेज संकलक लगता है यह... अभी तक जो भी फीचर इसमें हैं... मुझे नहीं लगता कि उनसे भविष्य में कभी कोई विवाद जन्म ले सकता है।


मेरी बात पर भरोसा करते हैं तो... देर न करें आज अभी ही अपनी वाणी से जुड़िये और अपनी वाणी को और मुखर कीजिये मायावी महाजाल में...


आभार!





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सोमवार, 9 अगस्त 2010

आध्यात्म, चमत्कार, फेथ हीलिंग, मानसिक तरंगें और होमियोपैथी भी...क्या इनमें से कुछ भी मानव की समझ से परे होना चाहिये ???


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मेरे 'जानकार' मित्रों,

आज यह सवाल करने को प्रेरित किया आदरणीय सतीश सक्सेना जी की इस पोस्ट... पर आई इन दो टिप्पणियों ने...

१- इंसान अपने अनुभव से ही सीखता है जैसे जैसे आध्यात्म और विज्ञान की जानकारी बढ़ेगी...इनसानों को यह एहसास होने लगेगा कि वह जितना जानता है वह मात्र नाम मात्र ही है...

२- मानव जीवन से सम्बंधित ऐसी बहुत सी घटनाएं हैं जहाँ साइंस कुछ नहीं कह पाता, शब्दकोष में रहस्यमय शब्द अच्छा भला सम्मान पाता रहा है !
फेथ हीलिंग,मानसिक शक्तियों और तरंगों के जरिये रोग मुक्त होना एवं स्वामी रामकृष्ण परमहंस जैसे भारतीय योगियों का जीवनी शक्ति पर विजय के सैकड़ों उदाहरण उपलब्ध हैं उन्हें नकार तो नहीं सकते !
इस लेख का उद्देश्य चमत्कार को बढ़ावा देना नहीं है मगर आप " कुछ तो है " पर मनन जारी रखें ...यही प्रयत्न मात्र है !





सोचने पर मजबूर करती हैं यह टिप्पणियाँ...



सोचिये !



क्या हमारी आज तक की समझ 'नाम-मात्र' की ही है...

क्या मानव की समझ के परे भी 'कुछ तो है' ही...

इस से बड़ा सवाल यह है कि क्या कुछ भी मानव की समझ से परे होना चाहिये...

यह तो माना जा सकता है कि मानव जाति के आज तक अर्जित ज्ञान की मदद से हम कुछ बातों को आज समझ नहीं सकते...

परंतु क्या यह भी माना जाये कि 'कुछ ऐसा' हमेशा रहेगा जिसे हम 'कभी भी' समझ ही नहीं पायेंगे...

यदि सचमुच ऐसी 'कुछ' चीजें हैं इस दुनिया में... तो क्या यह मानव जाति की हार नहीं...

बड़ा भयावह भी तो होगा यह... भविष्य की चुनौतियों के लिये... हम क्या मुकाबला करेंगे 'उस' का 'जिसे' समझने की सामर्थ्य तक हमारी नस्ल में नही...




नहीं, नहीं, नहीं !!!

मैं यह कतई नहीं मान सकता

कि मानव की सोच से परे भी 'कुछ' है

अथवा 'कुछ' होना ही चाहिये ।





अपनी आप बताइये...





आभार!






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शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

सबको सन्मति दे भगवान !


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मेरे अजन्मे-अनदेखे-अविनाशी-अनजाने-सर्वव्यापी-परमपिता,


पिछले कुछ दिनों से चल रहा धर्मयुद्ध देखा तो मुझे याद आये बापू...

और उनका प्रिय यह भजन भी...


रघुपति राघव राजा राम
पतित-पावन सीता राम
ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम
सबको सन्मति दे भगवान


मेरे आदरणीय प्रकाश गोविन्द जी ने तो यहाँ पर 'तुझ' को वार्न कर ही दिया है यह कह कर:-



इतने वर्षों से ये भगवान् और अल्लाह बचते घूम रहे हैं ,,,, जिस दिन भी मिल गए दोनों को एक-एक चपत लगाकर एक अँधेरी कोठरी में बंद कर दूंगा और बाहर से ताला मार दूंगा .....


उनको चेतावनी देता आऊंगा या तो अपने एजेंट्स को सही करो या ये दुनिया दुबारा ठीक से बनाओ... वरना यहीं सड़ो अन्दर कोठरी में !





अब मैं भी कहता हूँ:-

'तुझ' से...

अगर वाकई 'हो' तो...

बन्द कराओ यह सब...

पर 'तुम' तो हो ही नहीं... मेरे विचार से...


इस लिये चलता रहेगा यह 'धर्मयुद्ध'... मुझ जैसों को बहुत आनंदित करता है यह... कॉमेडी और ट्रेजेडी दोनों साथ-साथ... साथ में अज्ञान, कुतर्क, अंध श्रद्धा और अंध विश्वास का तड़का साथ में... दूसरे के घर से कूड़ा बटोर अपने दरवाजे पर नुमाईश करने का यह खेल...


जितना यह खेला जायेगा... उतना ही मजबूत होगा मेरा यह यकीन... कि 'तुम' हकीकत में कुछ भी नहीं... बस कुछ अक्लमंद 'मंद अक्लो' के खाने-कमाने का जरिया मात्र हो!




हा हा हा हा !






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सोमवार, 2 अगस्त 2010

Aah at last !!!

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मेरे ब्लागर मित्रोँ,

सुबह से प्रयत्नरत था, अब जाकर कामयाब हुआ... मोबाइल से यह पोस्ट करने मेँ... अपनी पीठ खुद थपथपाना तो बनता है... क्या कहते हैँ आप ?

अब जब यह पोस्ट कर ही रहा हूँ तो एक ख्याल दिल में है... राहुल और डिम्पी छाये हैँ हर जगह...

कितना सही है यह ... Washing of dirty linen in Public & role of our electronic & print media... सोचिये...


आभार !


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