शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

नॉनसेन्स है होमियोपैथी. . . There should be no Public Funding of Homeopathy in India too!!!

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मेरे 'दिन रात चमत्कार की आस करते' मित्रों,

हा हा हा हा,

जानता हूँ कि आप में से बहुत को अच्छा नहीं लगेगा यह आलेख...

आप में से कई यह भी बतायेंगे कि कैसे उनको चमत्कारिक फायदे मिले इस पैथी से...

आप में से कुछ तो इसे जानवरों, पेड़-पौधों और फसलों में भी प्रयोग करने हेतु रिसर्च(???) कर रहे होंगे...

पर आज आप यह लिंक पढ़िये पहले तो...

होमियोपैथी नॉनसेन्स है: कहते हैं ब्रिटिश डॉक्टर

अवैज्ञानिकता के वकीलों को लगा जोर का झटका!

टैक्स देने वालों की कमाई से इन मीठी गोलियों पर खर्च बहुत कड़वा है!


तीसरे लिंक में से उद्धृत करता हूँ...


"This argument tends to ignore the distinction that unlike homeopathy, organised religions do not dress their beliefs up in the language of science, nor make empirical claims about the effectiveness of prayer."


"And, rather than being a relic of the medieval era, homeopathy is, like religious fundamentalism, a modern reaction to the Enlightenment, and seems to flourish in anxious, doubtful societies."


"The best thing that can be said about homeopathy is that, like religion, it provides comfort to the distressed, and that its ministers show tender, loving care to the sick. TLC is no bad thing, so long as it is not exploited, nor taken as a substitute for real medicine. But as the BMA has pointed out, it is certainly not the state's job to provide it."

तो दोस्तों ऐसे में क्या अपनी सरकार से भी यह उम्मीद करना कुछ गलत होगा कि AYUSH विभाग के माध्यम से होमियोपैथी जैसी Pseudo Scientific Mumbo-Jumbo को राज्य की ओर से बढ़ावा देना बंद किया जाये !

अपनी सनक या शौक के चलते अगर कोई अपने निजी खर्चे पर इस पद्धति को अपनाना जारी रखना चाहता है तो इस पर किसी को कोई ऐतराज नहीं होना चाहिये... आखिर दुनिया में तमाम अतार्किक, अवैज्ञानिक बातों को मानते और अपनाते हैं लोग... परंतु कोई यह कभी नहीं कहता कि राज्य को हाथ की उंगलियों में रत्न पहनने या जन्मकुंडली बंचवाने के लिये भी अनुदान देना/ खर्च करना चाहिये।

आभार!




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27 टिप्‍पणियां:

  1. मैं आप से सहमत नहीं हूँ।
    सरकार का बस चले तो समूचे चिकित्सा विभाग को ही बंद कर दे। आप फिक्र न करें। मैं ने अपना परिवार पिछले तीस सालों में सिर्फ और सिर्फ होमियोपैथी से ही संभाला है और घर में दवाघर भी है। आप यदि सब ओर से निराश हो जाएँ तो मुझ से संपर्क कर सकते हैं।

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    1. मैं तो पूर्णतयः आपसे सहमत हूँ, मेरा पूरा परिवार 'होम्योपैथी' के इलाज़ से ही चलता है, और इस वजह से इलाज़ का खर्च भी बहुत सीमित हो जाता है.

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  2. जब इतना पैसा बर्बाद हो रहा है तो थोड़ा इसपे सही.. ये कम से कम मीठी गोली तो देता है..:)

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  3. भाई प्रवीण शाह से मैं इस प्रकार की पोस्ट की उम्मीद नहीं करता था ....

    -मुझे लगता है किसी भी पोस्ट को लिखने से पहले उस विषय की जानकारी होना अपेक्षित ही नहीं अति आवश्यक होनी चाहिए ! लेखकों को कुछ भी लिखने से पहले यह सोच लेना चाहिए की उन्हें जरूरतमंद लोग श्रद्धा से पढ़ते हैं और उसके अनुसार आचरण भी कर सकते हैं ! लेखक की लेख के बारे में एक नैतिक जिम्मेवारी बनती है कि उसकी जानकारी का आधार उचित और सत्य हो तभी हम अपनी लेखनी के साथ न्याय कर पाते हैं !

    -एलोपैथिक सिस्टम अपने आप में अलग विज्ञान है और उसपर सततः खोज चलती रहती है ! मगर सारी दुनिया में इसके अतिरिक्त व्याधि निवारण विधियाँ और दवाएं हैं जिनका उपयोग कर लोग सैकड़ों सालों से लाभान्वित होते रहे हैं ! इनमें प्रकृति चिकित्सा, आयुर्वेद, चाइनीज़ सिस्टम,योग,यूनानी चिकित्सा, इलेक्ट्रो मग्नेटिक ,अक्यूपंक्चर,जड़ी बूटी चिकित्सा ,किरोप्रक्टिक, होमिओपैथी आदि प्रमुख हैं !

    - मैं एलोपैथिक सिस्टम को बुरा नहीं कहता,मगर इसकी बहुतायत बहुत बड़ा शाप है जिसे डाक्टरों के लालच ने बद से बदतर बना दिया है ! आप एक बार में अस्पताल में एडमिट हो जाइए टेस्टिंग के बाद में आपको आपरेशन की आवश्यकता बताने के चांस ७० प्रतिशत है !
    -बरसों से मैं होमिओपैथी का प्रयोग करता रहा हूँ और कभी फेल नहीं हुआ ! मेरे कम से कम ३ एलोपैथिक डॉ दोस्त अपने परिवार में होमिओपैथी दवाओं का उपयोग कर रहे हैं !

    -बेहतर है आप पहले होमिओपैथी को समझ लें उसके बाद उसके गुण दोषों पर चर्चा करें ! अन्यथा इस लेख का उद्देश्य महज़ भीड़ को आकर्षित करना भर रह जाएगा !

    अगर मेरी बात खराब महसूस करें तो मैं करबद्ध क्षमा प्रार्थी मान कर माफ़ करें !

    आदर सहित आपका

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  4. प्रवीण भाई,
    सिर्फ़ इसलिये कि "पश्चिम के डॉक्टर कह रहे हैं" अभी इस पर कोई निर्णय लेना जल्दबाजी होगी, UK के डॉक्टर न तो अमृत पीकर आये हैं और न ही देवदूत हैं। होम्योपैथी को सिरे से नकार देने में उनकी अपनी घरेलू राजनीति और जुगाड़ भी हो सकती है। इस मामले में और शोध, विचार-विमर्श तथा अध्ययन की जरूरत है।

    कहीं कल को पश्चिम के डॉक्टर, रामदेव बाबा को भी "फ़ालतू" न कह डालें…

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  5. कृपया सुरेश जी की बात पर ध्यान दें , और हाँ प्रवीण भाई ! होमिओपैथी के विरोध में जो लिंक आपने दिए हैं , उनके बारे में क्या कहूं ........

    कुछ दिन बाद कोई और प्रवीण शाह जब ऐसा लेख लिखेंगे तो उसमे उद्धृत लिंक्स में आपका लेख भी शामिल होगा !

    दिनेश राय द्विवेदी जी, भाई सुरेश चिपलूनकर और यह आपका अकिंचन मित्र भी चमत्कार की आस करते मित्रों में से हैं... :-))

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  6. ब्रिटिश डाक्टरों की बातों से सहमति का कोई मतलब नहीं।
    आज से दस साल पहले मुझे पेशाब नली में पथरी हो गयी थी, जब दर्द उठता था, तो जान ही निकल जाती थी। लेकिन वह पथरी होम्योपैथी दवा से ही गली। इसलिए कम से कम मैं इस बात को तो नहीं ही मान सकता।--------
    डी0जे0 का मतलब पता है आपको?
    किसने कहा पढ़े-लिखे समझदार होते हैं?

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  7. मुझे भी लगता तो है मगर होम्योपैथी की कुछ दवाओं और दावों में दम तो है जैसा थूजा ,चेहरे के मस्से को मिटाने काम तो करती है !

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  8. पहले होमियोपैथी को आजमा कर देखें फिर बात करें। लेकिन एकाध बार नहीं। हाँ, दवा के चुनाव में गलती तो कोई भी चिकित्सक कर सकता है।

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  9. अच्छा ही हुआ जो आपने विष का वमन कर ही दिया| भड़ास निकल गयी, आपका मन शांत हुआ|

    रही बात होम्योपैथी की तो विद्वत जनों की बातें आपने सुन ही ली| और बाकी वो कहावत है न

    हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार|

    कीप बार्किंग सर|

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  10. Homoeopathy का दाता स्वयं एक अच्छा ऐलोपैथ था ,मगर ऐलोपैथी से निराश । ऐलोपैथ लालची और होम्योपैथ प्रायः संत होते हैं । शीघ्रपतन के रोगी "Sexon B" - Bios company की खा या खिलाकर देख लें , रोग खतम न हो तो पेरियार को मानना छोड़ दूंगा ।

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  11. ये कम से कम मीठी गोली तो देता है,
    वैसे @प्रवीण जी आज आप फंस गए ,
    पहली बार आपकी किसी पोस्ट के प्रति पाठकों का इतना विरोध देख रहा हूँ और उनमें से भी कई तो हमारे इस ब्लॉग जगत के काफी गणमान्य ब्लोग्गेर्स हैं, उनका कहना सही हो सकता है क्योंकि जिस चीज़ से उन्हें फायदा हुआ हो उसे अगर आप नोंसेंस कह दें तो प्रतिक्रिया होना लाजमी भी है

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  12. अज़ीब है! इसने मेरे उपर कभी असर नहीं किया। श्रीमती जी पर असर कर रही है - उनका तो यही कहना है।
    कुछ प्रशंसकों से मिला हूँ जिन्हों ने औषधि लेने के दौरान आस्था, विश्वास, पॉजिटिव फ्रेम ऑफ माइंड औए ईश्वर पर भरोसा जैसी बातें भी कहीं। इस पर टिप्पणी तो भगवान ही कर सकता है :)
    कहते हैं कि इसमें विष को बहुत तनु कर प्रयोग किया जाता है। बिना तनु किए विष की शीशी पी ली जाय तो प्रभाव होगा, अवश्य होगा ;)
    वैसे भी सर्पदंश का उपचार विष प्रसिद्ध है लेकिन उसका प्रयोग अलग ढंग से होता है। मुझे लगता है कि कुछ विशेष प्रकृति के लोगों पर ही यह असरकारी होती है। सम्भवत: त्रिदोष संतुलन से इसका सम्बन्ध हो।
    कोई कृपया बढ़े हुए यूरिक एसिड का उपचार बताए। मैं वादा करता हूँ कि पूरे यम, नियम, संयम (यदि आवश्यक हुआ) और नियमितता के साथ प्रयोग करूँगा। एक बार पुन: आजमाने के लिए तैयार हूँ।

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  13. Praveen is absolutely right. It could never treat any of my problems... because I am a disbeliever. A true medicine shouldn't disappoint a disbeliever too.

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    आप सभी पाठकों का अपनी राय व्यक्त करने के लिये धन्यवाद, मेरा तर्क यहाँ पर यह है कि ऐसी कोई पद्धति जिसका कोई तार्किक या वैज्ञानिक आधार ही नहीं है और ३० से ज्यादा पोटेन्सी की उसकी सारी दवाओं में दवा नाम की कोई चीज का एक अणु तक नहीं है वह कैसे अपने को एक चिकित्सा पद्धति कह सकती है और क्यों हमारी सरकार AYUSH के नाम पर इसे प्रोत्साहित कर रही है?

    यदि महज कुछ लोगों की व्यक्तिगत धारणाओं और विश्वासों को ही तरजीह दी जाती है तो शीघ्र ही सरकार को अपने अस्पतालों में रत्न शास्त्री, नजर उतारने वाले, ओझा, भभूत व ताबीज बांटने वाले बाबा/फकीर व ग्रहदशा ठीक करने वाले जतनों का भी इंतजाम कर लेना चाहिये...आखिर लोग इन पर भी भरोसा करते हैं और फायदा भी उठाते हैं।

    @ सुरेश चिपलूनकर जी व अरविन्द मिश्र जी,

    आप मेरे साथ हैं इस मामले पर... बस खुल कर साथ आने की उम्मीद रहेगी।

    @ निशांत मिश्र जी,

    धन्यवाद!

    @ गिरिजेश राव,

    आपका समर्थन बहुत बड़ा संबल है मेरे लिये देव!
    यूरिक एसिड बढ़े होने की स्थिति के लिये अपने मित्र से पूछा वह कहते हैं कि यह नुस्खा महज सात दिन में इसे 5 mg% से नीचे ले आता है:-

    Tab Ciploric 100mg & Tab Zycolchin (both to be taken three times a day) for seven days.

    @ दिनेशराय द्विवेदी जी व सतीश सक्सेना जी,

    कहीं कहा गया है कि:-

    Job of a good and successful physician is to keep his patient entertained while the body heals itself.

    यह फिजिशियन कहीं होमियोपैथ तो नहीं था ?....:)
    आगे और लिखूंगा इस बारे में, अभी यह बहस थोड़ा और आगे बड़ाना चाहता हूँ मैं...

    @ जाकिर अली रजनीश जी,

    साइंस ब्लॉगर होने के बाद भी आप कभी कभी निराश करते हैं, बंधु, ०७ मिमी से कम व्यास की पेशाब नली की पथरियाँ अक्सर बिना किसी इलाज या प्रयत्न के भी बाहर निकल जाती हैं।

    @ महक जी,

    ब्लॉगिंग का यही तो आनंद है कि मुद्दों को ठोक बजा कर परखा जाये, इस फंसने का भी अलग मजा है।

    @ बेनामी,

    पहचान लिया देव, पर यह विष वमन नहीं है, 'आइना दिखाना' कहूंगा इसको!



    आभार!


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    @ सतीश सक्सेना जी,

    मेरे दिये गये लिंकों पर आपके कथन से असहमत, सभी लिंक एकदम ताजे व प्रतिष्ठित स्रोतों से लिये गये है, इन आलेखों में बहुत से प्रश्न भी उठाये गये हैं... एक झटके में उन्हें खारिज करने के बजाय यदि आप उन प्रश्नों का उत्तर देते तो बेहतर रहता ।

    उम्मीद है आप बुरा नहीं मानेंगे यदि कोई भी बात आपको बुरी लगे तो उसके लिये यह लेखक अग्रिम करबद्ध क्षमायाचना करता है।

    आभार!


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  16. @ भाई प्रवीण शाह,
    कृपया आप मेरी टिप्पणियों को ध्यान से दुबारा पढने की कृपा करें !

    -अगर इस बहस को बिना दूसरे का पक्ष समझे बढाया गया तो प्रवीण शाह साइंटिफिक और सतीश सक्सेना क्वेक आसानी मान लिए जायेंगे :-))

    - आप जो लोग विरोधी हैं उन्हें होमिओपैथी के बारे में कोई जानकारी नहीं है , और मैं एलोपैथिक सिस्टम के विद्वानों से इस बहस के द्वारा, होमिओपैथी को उनके तराजू में तौलना अपनी मूर्खता समझता हूँ !

    -अतः मैं अपने आपको,सिर्फ भीड़ बढाने वाली इस बहस से, प्रवीण शाह जी से क्षमा मांगते हुए, अपने आपको अलग कर रहा हूँ !

    @ गिरिजेश शाह ,

    कोई भी जानकार होमिओपैथ आपके कोंस्टीटयूश्नल ट्रीटमेंट कर आपको आसानी से ठीक कर सकता है ! मेहरबानी करके किसी आम डॉ के पास जाकर बढे यूरिक एसिड की दवा न मांगे ! बल्कि उसे अपनी समस्याएं बताते हुए समाधान की मांग करें साथ ही आप अपने अविश्वास की बात बता सकते हैं !

    कृपया ध्यान रखें, होमिओपैथी में बीमारी का इलाज़ नहीं किया जाता अतः असाध्य बीमारी का इलाज़ किसी जानकार होमिओपैथ से कराने पर, बीमारी के नाम का कोई महत्व नहीं है !

    कभी दिल्ली में आना हो तो आप मुझे मिल सकते हैं , शायद मैं आपको समझा सकूं कि होमिओपैथी क्या है !

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  17. अल्लाह का शुक्र है कि ‘अनम‘ का बुख़ार भी जाता रहा और वह दूध भी पीने लगी है। शहर के मशहूर चाइल्ड स्पेशलिस्ट ऐलोपैथ डा. एम. अंसारी को जब पैदाइश के बाद दिखाया गया तो उन्होंने तुरंत हाथ खड़े कर दिये। एक सच्चे होम्योपैथ डा. प्रभात कुमार अग्रवाल के ट्रीटमेंट से अनम का जख्म लगातार हील होता जा रहा है। होम्योपैथी नॉनसेंस नहीं है अलबत्ता इसे समझने के लिये हायर सेंस चाहिये।
    प्रिय प्रवीण जी की आमद और भाई तारकेश्वर गिरी जी की वापसी मेरे लिये खुशी और राहत का बायस है।
    http://vedquran.blogspot.com/2010/07/thankfullness-anwer-jamal.html

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  18. I really sad to see a post like this. I believe in Allopathy, Homeopath and Ayurveda as well.

    Western countries are stealing our ancient texts of Ayurveda and Homoepathy. They are enriching their knowledge and spreading our pathies there.

    We should not believe what UK and USA state about India and our system.

    It is their insecurity that they are making such statements. I strongly condemn their opinion.

    I agree with all the comments above. [ of Suresh ji, Sateesh ji, Mahak ji Girijesh ji, Arvind ji, Dwivedi ji and all ]

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  19. प्रवीन जी मेरा बेटा दो वर्ष का था तब उसके चहरे पर छोटे छोटे बहुत सारे मुहासे जैसे दाने निकलने शुरू हो गए थे जिनमे मुहासों जैसी ही कील सी भरी होती थी . ये बीमारी उसे शायद मेरे ही बड़े भतीजे से फैली थी. मैं दोनों को दिल्ली के जी टी बी अस्पताल के एक बड़े dermatologist के पास ले गया. उन्होंने बताया कि एलोपेथी में इस बीमारी का सिर्फ एक इलाज है कि इन दानो को नीडल से छेड़ कर इन में दवाई लगा दी जाय. ऐसा सभी दानों में एक एक करके किया जाय पर अगर एक भी दाना बिना ट्रीटमेंट के छुट गया तो ये दाने फिर से फ़ैल जायेंगे. भतीजा बड़ा था अतः ये एलोपेथी वाला निदान उस पर अजमा लिया गया. बेचारा बड़ा तड़पा. डाक्टर ने मेरे बेटे पर ये तरीका अजमाने से माना कर दिया और कहा कि दुसरे दिन लोकल अनीस्थिसिया देकर ये कार्य किया जायेगा .पता नहीं क्यों मैं आपने घर के पास कि एक होम्योपेथी कि महिला चिकित्सक के पास बच्चे को ले गया. एक महीने में ही सिर्फ होम्योपेथी के दावा से मेरे बच्चे के वो दाने ठीक हो गए. अब बताये कि क्या मैं होम्योंपेथी को यूँ ही नकार दूँ. हो सकता है कि होम्योपेथी में सभी बिमारियों का निदान संभव ना हो पर जिनका उपलब्ध है उनके लिए तो ये विधि चलती रहनी चाहिए.

    देखो कॉमन वेल्थ गेम्स कि तरह ये चिकित्सा विधि पूरी तरह से विशुद्ध पैसे कि बर्बादी नहीं है. इमे कहीं ना कहीं फायदा भी है. एलोपेथी के समर्थक तो चाहेंगे ही कि ऐसी सस्ती वैकल्पिक चिकित्सा विधियाँ बंद ही हो जाएँ ताकि उनकी महँगी दुकान चलती रहे.

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  20. पांच रुपये की alocea या ऐसी ही कोई दवाई थी जिससे बच्चे के पैरों में होने वाला तीव्र दर्द एक महीने के अन्दर बन्द हो गया और जिसके लिये ऐलोपैथिक डाक्टरों ने जाने कौन से टेस्ट और एक्स-रे करा डाले, कितनी दवाइयां दीं, लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ...

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  21. There is no medicine in allopathy which has no side effect.Every medicine when invented is given publicity with highest propaganda but after 2/3 years is rejected due to its serious side effects.Hundreds of allopathy medicines are now banned in the world which were praised as boon previously.
    I will like to remain feverish etc.rather than inviting lever problem,diabitis,kidney trouble or arthritides problem for rest of the life by using allopathy.
    Only in emmergency like accedent or
    unidentifitied diseases , the allopathy is useful.For chronic diseases,other pathies (Homeopathy.
    Ayurved, Naturopathy,Unani,)all can be tried after finding disease from renowned diagnostics center.
    Because there are no side effects in these paths and they are not harmful.
    Only an expert can say which pathy is suitable for which disease.No doctor will criticize his pathy.
    But still there are some rare doctors who advise this.
    There is no pathy which is useless.
    Only the correct weapon should be their to fight with enmy.You cannot kill mosquito with your Gun.
    Wish you all happy life.

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  22. What about the English invent football championship?

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  23. wow praveen ji - to aap bhi ataarkik batein karte hain ?

    no - if a few docs of allopathy do not understand homeopathy, it does NOT mean it is useless :)

    i have seen lots of effect in very close people, so i have to disagree with you. and the way you are refuting the proofs your friends seem to be giving, that refutal in itself appears quite biased and unscientific on the face of it :)

    moreover, remember - homeopathy is a competetor of allopathy and NATURALLY the studies and results proposed by allopaths will be biased by their vested interests - don't you think so?

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  24. आश्चर्य है कि आपने इस तरह का लेख भी लिखा था... हजारो रुपये उड़ा देने के बाद भी जब मेरा टाइफाइड ठीक नहीं हुआ तो महज 30-35 रुपये की दवाई ने 5 दिनों में उसे ठीक कर दिया था... बाकी तो आपसे ये उम्मीद न थी...

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