सोमवार, 12 जुलाई 2010

कश्मीर भारत के लिये समस्या नहीं बल्कि इम्तहान है... यह चुनौती भी है और अवसर भी...हल एकदम सीधा सादा व आसान है।



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मेरे 'कश्मीर चिंतक' मित्रों,

आज ही प्रसिद्ध बुद्धिजीवी व राजनीतिक-विचारक-चिंतक शेष नारायण सिंह जी की यह पोस्ट पढ़ी...पूरी तरह किताबी व इकतरफा इस पोस्ट पर हमारे आलसी महाराज गिरिजेश राव जी ने बहुत अच्छा मोर्चा लिया उनसे और सबसे अंत में मित्र असहज ने पोस्ट व तर्क के खोखलेपन को उकेर कर रख दिया अपने छोटे से कमेंट में!

कश्मीर को मैं समस्या नहीं मानता... वहाँ तो इम्तहान है उन मूल्यों का जिसके आधार पर हमारा यह देश बना है...स्वायत्तता, पाकिस्तान में विलय या नये इस्लामिक मुल्क की जो यह माँग कश्मीर में उठती है उसका आधार यह नहीं है कि पाक अधिकृत कश्मीर में बहुत अच्छा राज चलता है... आधार सिर्फ धर्म है... वे यह मान कर चलते हैं कि दिल्ली में हिंदुओं का राज है...और क्योंकि कश्मीरी पंडितों को भगाकर अब घाटी में उन लोगों ने केवल एक ही धर्म का वर्चस्व कर दिया है...अत: भारत का कोई भी दखल या अधिकार उन्हें मंजूर नहीं...

यह स्थिति 'समस्या' नहीं अपितु हमारे देश के लिये चुनौती है और अवसर भी...अपने स्थापना के मूल्यों को परखने व दॄढ़ करने का...बंदूक या पत्थर उठाकर देश को चुनौती देते यह आतंकी व अलगाववादी और उत्साहित होते हैं यदि इन्हें मीडिया में जगह मिले...कथित रूप से सुरक्षा बलों के हाथ मरे लोगों पर तो स्यापा कर रहा है मीडिया...पर क्या कश्मीर के सुदूर गांवों में इन अलगावी-आतंकियों द्वारा फैलाई दहशत के शिकार नहीं दिखते उसको... अक्सर उन गांवों में अपनी दहशत को बनाये रखने के लिये ये किसी बेकसूर का या तो गला रेत देते हैं ता सरे आम गोलियों से भून देते हैं उसे...मुखबिरी, जेहाद से दगा या कश्मीर की आजादी के खिलाफ होने का इल्जाम लगा कर...

जिस तरह की मानसिकता पाकिस्तान रखता है उसमें कश्मीर आज भारत का 'बफर जोन' बन गया है... यह अगर हाथ से निकला तो क्या यही आग जम्मू, हिमांचल, पंजाब व हरियाणा में नहीं लगाई जायेगी हमारे इस पड़ोसी द्वारा...

आतंकवाद व अलगाववाद को पूरी दुनिया में कभी भी बातचीत की मेज पर बैठ कर खत्म नहीं किया जा सका है... उसे खत्म किया जाता है प्रचार व चर्चा नाम की उसकी आक्सीजन को काट कर...लंबे समय तक उनके इरादों को विफल करते हुए थका-थका कर...एलटीटीई, मिजो व नागा आतंक-अलगाव वाद इसके उदाहरण हैं...

हमारा राजनीतिक नेतृत्व इस चुनौती के आगे सीना तान कर खड़े हो...भारत की अखंडता नॉन नेगोशियेबल होनी चाहिये...जब आप ऐसे फैसले लेते हैं तो कुछ जान-माल का नुकसान लाजिमी है...पर इस नुकसान के डर से मुल्क धार्मिक आतंक-अलगाव के आगे घुटने नहीं टेकते...

कश्मीर की चुनौती का हल यही है...थका-थका कर मारो आतंकी-अलगाववादियों को...उन्हें हेडलाइन न बनने दो...अपने आप ही खतम हो जायेंगे उनमें बहुत से... बाकी के लिये फौज है ही!






आभार!


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15 टिप्‍पणियां:

  1. हूँ प्रवीण जी , सही कह रहे हैं अंतिम लाइनों में ..
    गिरिजेश जी की बौद्धिक-लड़ाई भी पसंद आयी !

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  2. पूर्णतः सहमत है आपके विचारों से. भारत की अखंडता अपरक्राम्य होनी ही चाहिए.

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  3. काम कम हो रहा है, खबर अधिक बन रही है।

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  4. आतंकबाद क़ा हल टेबुल नहीं हो सकता.कुत्ते की पूछ हमेसा टेढ़ी की टेढ़ी ही रहती है कुत्ता जब पागल ही जाता है तो उसे मरना ही पड़ता है उसे रोटी नहीं गोली चाहिए .
    अपने बहुत अच्छा सुझाव दिया है
    धन्यवाद.

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  5. एक अच्छा लेख, सहमत हूँ आपसे ! शुभकामनायें

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  6. सरकार का लिज्लीजापन भी जिम्मेदार है इसे बढ़ाने में . यही प्रक्रिया नक्सलियों के ख़िलाफ़ अपनायी जा रही है . आश्चर्य होता है जब नेता और अधिकारी समय सीमा बताते है की कुछ साल लगेंगे इसे ख़त्म करने में !!!!!!!!!!!

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  7. Part 1of 4

    बहुत दिनों से एक विचार मेरे मन की गहराइयों में हिलोरे खा रहा था लेकिन उसे मूर्त रूप प्रदान करने के लिए आप सबका सहयोग चाहिए इसलिए उसे आप सबके समक्ष रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था की पता नहीं कहीं वो असफल और अस्वीकार ना हो जाए लेकिन तभी ये विचार भी आया की बिना बताये तो स्वीकार होने से रहा इसलिए बताना ही सही होगा .

    दरअसल जब भी मैं इस देश की गलत व्यवस्था के बारे में कोई भी लेख पढता हूँ, स्वयं लिखता हूँ अथवा किसी से भी चर्चा होती है तो एक अफ़सोस मन में होता है बार-2 की सिर्फ इसके विरुद्ध बोल देने से या लिख देने से क्या ये गलत व्यवस्थाएं हट जायेंगी , अगर ऐसा होना होता तो कब का हो चुका होता , हम में से हर कोई वर्तमान भ्रष्ट system से दुखी है लेकिन कोई भी इससे बेहतर सिस्टम मतलब की इसका बेहतर विकल्प नहीं सुझाता ,बस आलोचना आलोचना और आलोचना और हमारा काम ख़त्म , फिर किया क्या जाए ,क्या राजनीति ज्वाइन कर ली जाए इसे ठीक करने के लिए ,इस पर आप में से ज़्यादातर का reaction होगा राजनीति !!! ना बाबा ना !(वैसे ही प्रकाश झा की फिल्म राजनीति ने जान का डर पैदा कर दिया है राजनीति में कदम रखने वालों के लिए ) वो तो बहुत बुरी जगहं है और बुरे लोगों के लिए ही बनी है , उसमें जाकर तो अच्छे लोग भी बुरे बन जाते हैं आदि आदि ,इस पर मेरा reaction कुछ और है आपको बाद में बताऊंगा लेकिन फिलहाल तो मैं आपको ऐसा कुछ भी करने को नहीं कह रहा हूँ जिसे की आप अपनी पारिवारिक या फिर अन्य किसी मजबूरी की वजह से ना कर पाएं, मैं सिर्फ अब केवल आलोचना करने की ब्लॉग्गिंग करने से एक step और आगे जाने की बात कर रहा हूँ आप सबसे

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  8. आप सोच रहे होंगे वो कैसे ,तो वो ऐसे जनाब की मैं एक साझा ब्लॉग (Common Blog ) create करना चाहता हूँ जिसका की मकसद होगा एक ऐसा मंच तैयार करना जिसपे की हम सब हमारे देश के वर्तमान सिस्टम की खामियों की सिर्फ आलोचना करने के साथ-२ उसका एक तार्किक और बढ़िया हल भी प्रस्तुत करें और उसे बाकायदा एक बिल के रूप में पास करें आपसी बहस और वोटिंग के द्वारा

    इस पर आपका कहना होगा की क्या सिर्फ ब्लॉग जगत के द्वारा देश के लिए नए और बेहतर कानून और सिस्टम बनाने से और वो भी सिर्फ ब्लॉग पर पास कर देने से देश का गलत सिस्टम और भ्रष्ट व्यवस्था बदल जायेगी ? तो श्रीमान आपसे कहना चाहूँगा की ये मैं भी जानता हूँ की ऐसा नहीं होने वाला लेकिन ज़रा एक बात सोचिये की जब भी हममें से कोई इस भ्रष्ट और गलत व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाता है या भविष्य में भी कभी उठाएगा तो जब इस गलत व्यवस्था के समर्थक हमसे पूछेंगे की -" क्या तुम्हारे पास इससे बेहतर व्यवस्था का प्लान है ?,अगर है तो दिखाओ " , तो क्या आपको नहीं लगता की हमारे पास पहले से वो सही सिस्टम होना तो चाहिए जो उस समय हम उनके सामने पेश कर सकें ,एक बार हम एक सही व्यवस्था का खाका तैयार करने में कामयाब हो गए तो वो दिन दूर नहीं होगा जब हम इसे पूरे देश के सामने भी पेश करेंगे और देश हमारा साथ देगा और इस पर मोहर लगाएगा .

    इसीलिए मेरी आप सबसे प्रार्थना है की इसमें सहयोग करें , मैं आपसे आर्थिक सहयाग मतलब रुपया ,पैसे का सहयोग नहीं मांग रहा बल्कि आपसे बोद्धिक सहयोग चाह रहा हूँ ,
    हमारे इस common BLOG का नाम होगा
    "BLOG Parliament - Search for a right system & laws for the country "

    http://blog-parliament.blogspot.com/

    इसके मुख्यतः 3 चरण होंगे
    1 . अपने बिल अथवा प्रस्ताव की प्रस्तुति और उसपे बहस
    2 . उस प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में वोटिंग
    3 . Majority वोटिंग के हक में प्रस्ताव का पास होना अथवा reject होना

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  9. आप सबसे यही सहयोग चाहिए की आप सब इसके मेम्बर बनें,इसे follow करें और प्रत्येक प्रस्ताव के हक में या फिर उसके विरोध में अपने तर्क प्रस्तुत करें और अपना vote दें
    जो भी लोग इसके member बनेंगे केवल वे ही इस पर अपना प्रस्ताव पोस्ट के रूप में publish कर सकते हैं जबकि वोटिंग members और followers दोनों के द्वारा की जा सकती है . आप सबको एक बात और बताना चाहूँगा की किसी भी common blog में members अधिक से अधिक सिर्फ 100 व्यक्ति ही बन सकते हैं ,हाँ followers कितने भी बन सकते हैं
    तो ये था वो सहयोग जो की मुझे आपसे चाहिए ,
    मैं ये बिलकुल नहीं कह रहा हूँ की इसके बदले आप अपने-२ ब्लोग्स लिखना छोड़ दें और सिर्फ इस पर ही अपनी पोस्ट डालें , अपने-2 ब्लोग्स लिखना आप बिलकुल जारी रखें , मैं तो सिर्फ आपसे आपका थोडा सा समय और बौद्धिक शक्ति मांग रहा हूँ हमारे देश के लिए एक बेहतर सिस्टम और न्याय व्यवस्था का खाका तैयार करने के लिए


    1. डॉ. अनवर जमाल जी
    2. सुरेश चिपलूनकर जी
    3. सतीश सक्सेना जी
    4. डॉ .अयाज़ अहमद जी
    5. प्रवीण शाह जी
    6. शाहनवाज़ भाई
    7. जीशान जैदी जी
    8. पी.सी.गोदियाल जी
    9. जय कुमार झा जी
    10.मोहम्मद उमर कैरान्वी जी
    11.असलम कासमी जी
    12.राजीव तनेजा जी
    13.देव सूफी राम कुमार बंसल जी
    14.साजिद भाई
    15.महफूज़ अली जी
    16.नवीन प्रकाश जी
    17.रवि रतलामी जी
    18.फिरदौस खान जी
    19.दिव्या जी
    20.राजेंद्र जी
    21.गौरव अग्रवाल जी
    22.अमित शर्मा जी
    23.तारकेश्वर गिरी जी

    ( और भी कोई नाम अगर हो ओर मैं भूल गया हों तो मुझे please शमां करें ओर याद दिलाएं )

    मैं इस ब्लॉग जगत में नया हूँ और अभी सिर्फ इन bloggers को ही ठीक तरह से जानता हूँ ,हालांकि इनमें से भी बहुत से ऐसे होंगे जो की मुझे अच्छे से नहीं जानते लेकिन फिर भी मैं इन सबके पास अपना ये common blog का प्रस्ताव भेजूंगा
    common blog शुरू करने के लिए और आपको उसका member बनाने के लिए मुझे आप सबकी e -mail id चाहिए जिसे की ब्लॉग की settings में डालने के बाद आपकी e -mail ids पर इस common blog के member बनने सम्बन्धी एक verification message आएगा जिसे की yes करते ही आप इसके member बन जायेंगे
    प्रत्येक व्यक्ति member बनने के बाद इसका follower भी अवश्य बने ताकि किसी member के अपना प्रस्ताव इस पर डालते ही वो सभी members तक blog update के through पहुँच जाए ,अपनी हाँ अथवा ना बताने के लिए मुझे please जल्दी से जल्दी मेरी e -mail id पर मेल करें

    mahakbhawani@gmail.com

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  10. हमारे इस common blog में प्रत्येक प्रस्ताव एक हफ्ते के अंदर अंदर पास किया जायेगा , Monday को मैं या आप में से इच्छुक व्यक्ति अपना प्रस्ताव पोस्ट के रूप में डाले ,Thursday तक उसके Plus और Minus points पर debate होगी, Friday को वोटिंग होगी और फिर Satuday को votes की गणना और प्रस्ताव को पास या फिर reject किया जाएगा वोटिंग के जरिये आये हुए नतीजों से

    आप सब गणमान्य ब्लोग्गेर्स को अगर लगता है की ऐसे कई और ब्लोग्गेर्स हैं जिनके बौधिक कौशल और तर्कों की हमारे common ब्लॉग को बहुत आवश्यकता पड़ेगी तो मुझे उनका नाम और उनका ब्लॉग adress भी अवश्य मेल करें ,मैं इस प्रस्ताव को उनके पास भी अवश्य भेजूंगा .

    तो इसलिए आप सबसे एक बार फिर निवेदन है इसमें सहयोग करने के लिए ताकि आलोचना से आगे भी कुछ किया जा सके जो की हम सबको और ज्यादा आत्मिक शान्ति प्रदान करे
    इन्ही शब्दों के साथ विदा लेता हूँ

    जय हिंद

    महक

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  11. शुक्रिया सर इस लिंक के लिये...और वहाँ गिरिजेश राव जी की बातों ने इतना सकून पहुँचाया कि लगा कई दिनों की थकान दूर हो गयी है।

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  12. प्रवीन जी धन्यवाद इस विषय पर मेरी सोच आप लोगों से मिलती है ये जानकार मुझे बहुत अच्छा लगा. अगर मैंने इन पोस्टों को पहले पढ़ा होता तो इनके लिंक जनपक्ष ब्लॉग पर दे आता. राव साहब ने वास्तव में अकेले ही मोर्चा लिया और मेरी नज़र में जीत हासिल की. इतनी बढ़िया पोस्ट पढवाने के लिए धन्यवाद.

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  13. सहमत.


    लिंक देने के लिए शुक्रिया.

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  14. भारत को तो लाहौर तक की जमीन चाहिए, मेरे खयाल से।

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  15. तीन साल बाद भी पोस्ट बिलकुल सामयिक लग रही है।

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