गुरुवार, 10 जून 2010

शुक्रिया अदा करें नापसंदगी के चटकों को... और कितना गिरेंगे हमलोग ?


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मेरे 'नापसंदगी को नापसंद करने वाले' मित्रों,

आज बहुत गर्मागर्म बहसें हो रही हैं ब्लॉगवाणी द्वारा दिये गये नापसंदगी के चटके के उपयोग के बारे में...

तभी नजर पढ़ी आज इस समय ५.४५ सांय की कुछ सबसे ज्यादा पढ़ी गई पोस्टों पर...

पहली पोस्ट
तुम भी कभी जवान हुआ करती थी रचना !...
एक सफल मंचीय कवि की है, पोस्ट साफ-साफ द्विअर्थी है और स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण है ।

इस पोस्ट को ब्लॉगवाणी से अभी तक ८० पाठक मिले हैं और १६ नापसंदगी के चटके इसे मिल चुके हैं।

दूसरी पोस्ट एक एकदम नये ब्लॉगर की है
तेरी माँ भी कभी जवान थी ओये कुंजड़े...
क्यों और किसके लिये लिखी गई है आप स्वयं दिमाग लगायें।

और इस पोस्ट को मिले हैं ८५ पाठक और ९ नापसंदगी के चटके ।

मैंने भी दोनों पोस्टों पर नापसंदगी का इजहार किया है ।

जो लोग ब्लॉगवाणी द्वारा दी गई नापसंदगी का चटका लगाने की सुविधा बंद करने की बात कर रहे हैं... वह बतायें कि मॉडरेशन लगा होने की स्थिति में ऐसी बेहूदा पोस्टों के प्रति अपनी नाराजगी (जो कि पाठक नापसंदगी के चटके लगा कर जाहिर कर रहे है) व्यक्त करने का कोई और तरीका है क्या आपकी नजर में ?

गर नहीं तो...

शुक्रिया अदा करें नापसंदगी के चटकों को...
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आभार!
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41 टिप्‍पणियां:

  1. yahan sab ko aajadi hai likhne ki
    lekin maan-maryaadaon ka dhyan rakhte huye

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

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  2. I gave napasand to
    "वरिष्ठ ब्लोगर व ब्लोगर सम्मानित का मुहतोड़ जवाब दूंगा.......( अब देखिये गुटबाजी का शबब)" 249 reader, 46 six comments and it was not in hot inspit of impressive numbers of read and comments.

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  3. aapse sehmat hoon shrimaan . Saath mein yeh bhee maanaa hai ki pushp khilaayein kaanton ko kyon ilzaam dein . Koi kaisa bhee likhe ispar charchaa ki bajaay aur achchaa kaise likhen yeh baat karein

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  4. बिल्कुल खरी बात कही प्रवीण जी आपने....दरअसल बात ये है कि हम लोगों को हर बात में मीन मेख निकालने की आदत हो चुकी है.अगर कल को ब्लागवाणी इस पसन्द/नापसन्द के आप्शन को बन्द कर देती है या अन्य किसी प्रकार का परिवर्तन कर देती है तो भी क्या होगा. हम लोग उसमें भी कमियाँ खोजनी शुरू कर देंगें......

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  5. लीजिए महानुभावों ने इस पोस्ट पर भी चटका लगाकर बता दिया है कि वे क्या विचार रखते हैं। जय हो... ये देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का।

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  6. लोग कहते हैं कि किसी ब्लाग में लिखे का विरोध वहीं जाकर करें। सात जून को एक "कवि" के ब्लाग पर "... का जोड़ा" शीर्षक से एक घिनौना ब्लौग लिखा गया था, जिस पर एक ब्लौगर ने आपत्ति जताई।

    इस आपत्ति जताने पर कथित कवि के दादाजी ने आकर आपत्ति जताने वाले ब्लागर के लिये अपशब्द कहे, एसे में कौन गलत को कौन आपत्ति जतायेगा?

    राजकुमार सोनी की कुत्तों वाली पोस्ट पर मैंने नापसंद दी और उनकी कल की फिल्मी डायलोग वाली पोस्ट पर पसंद दी...

    इसलिये नापसंद बटन का शुक्रिया, मैं तो हर जो पोस्ट मुझे नापसंद होगी उसे नापसंद करूंगा।

    ब्लौगवाणी को चाहिये कि वह नापसंद का कोटा बढ़ाये, अभी एक दिन में दो या तीन नापसंद लगा पाते हैं...

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  7. पहले ब्लौगवाणी पर धार्मिक विद्वेस की ब्लौग टौप पर रहतीं थी, आजकल विद्वेस की ब्लौग टौप पर नहीं आती, धार्मिक विद्वेस के ब्लाग भी अच्छा लिख रहे हैं..

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  8. praveen
    I fully agree with you . And I also appreciate everyones effort in putting naa pasand on such blogs where porn is being served
    have a look at this as well

    http://albelakhari.blogspot.com/2010/06/blog-post_9018.html#comments

    instead of appreciating blogvani people are being critique .

    And thank you

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  9. जाकिर रजनीश की कल की पोस्ट में एक नापसंद मेरी थी, इसलिये कि उसमें अजय झा के लिये अनोनीमस रूप से गलत कहा था और जाकिर ने उस अनोनीमस कमेन्ट को अपने ब्लाग पर बनाये रखा था...

    आप झा नाम के बुरे आदमियों के बारे में प्रस्न करते हैं और कोई अनोनीमस अजय झा का नाम लेता है, आपको एसा कमेन्ट मिटा देना चाहिये था..

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  10. zakir ki us post par maenae bhi naa pasand kaa chatka lagaya thaa kyuki mujhe post ki timing theek nahin lagii thee

    mujhe jo post sahii nahin lagtee yaa pasand nahin aatee mae chatka lagatee hun ek baar sameer ki post par bhi lagyaa thaa karna nahin yaad haen par lagyaa haen

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  11. मेरा कहना केवल यह है कि पसंद को अलग और नापसंद को अलग ही रखा जाय -पसंद में से नापसंद घटा कर स्कोर तैयार न किया जाय !

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  12. अरविन्द मिस्र से सहमति

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  13. अलबेला खत्री के ब्लौग पर घटिया और द्वेषपूर्ण पोस्ट का विरोध करने पर बगावत सिंह और दादाजी ने मुझे जूते मारने का फरमान सुनाया. उसी ब्लौग पर कुछ युवा तुर्क और पुराने चावलों ने पोस्ट की भूरि-भूरि प्रसंशा करते हुए उसे कालजयी रचना घोषित किया.

    ब्लौग पर नापसंद की टिपण्णी दर्ज कराने के यही खतरे हैं. बहुधा तो टिपण्णी प्रकाशित ही नहीं की जाती.

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  14. आज "इस्‍लाम का संदेश - आतंक मचाओ हूर मिलेगी" पर पांच नापसंद हैं

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  15. बहुत ही अच्छी बात है ..इस तरह की प्रविष्टियों को नापसंद के चटके द्वारा हटाया जा रहा है...और इसकी उपयोगिता भी यही होनी चाहिए......लेकिन ये सिर्फ प्रविष्ठी के प्रति नापसंदगी दिखाने के लिए नहीं इस्तेमाल हो रहे हैं....इनका इस्तेमाल लोग व्यक्ति विशेष से खुन्नस निकालने के लिए भी कर रहे हैं...कई बार देखती हूँ...पोस्ट किसी ने पढ़ा तक नहीं है....उसे ब्लोगवाणी में आये हुए अभी कुछ पल भी नहीं हुए...नापसंद का चटका लग गया ....यह गलत बात है....इसके कारण जो अच्छे पोस्ट हैं वो भी खो जाते हैं....
    अच्छा मुद्दा उठाया आपने...
    आपका आभार...

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  16. मैंने आपकी इस पोस्ट को पहला पसंद का चटका मैंने ही दिया था.... वक़्त की कमी थी तो टिप्पणी नहीं कर पाया था.... क्यूंकि मेरे कमरे का ऐ.सी. खराब हो गया था.... तो मेकैनिक के साथ बिज़ी था.... यहाँ तो लोग वाकई में खुन्नस निकालने के लिए ही नापसंद का बम मार देते हैं.... मैं वैसे पसंद - नापसंद कि फ़िक्र नहीं करता... अपनी तो वैसे भी आदत टॉप पर रहने की है... यहाँ कोई नापसंद दे दे.... तो उससे अपनी क्वालिटी नहीं ना कम हो जाएगी? इसलिए मैं फ़िक्र ही नहीं करता.... आपकी यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी....

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  17. The irony is that people who allege that others use napasand unfairly often do the very same.

    Am I wrong madam/sir? Please look into your heart and answer.

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  18. jisko apni post aage na aane ka khatra khatka usney lagaya napasand ka chatka

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  19. फिलहाल तो एक पसंद आपको दे कर आ रहा हूँ.. वैसे बताता चलूँ की मैं अब ब्लॉगवाणी शायद ही कभी खोलता हूँ(जब कुछ पोस्ट करता हूँ तभी खोलता हूँ अन्यथा नहीं)..

    वैसे मुझे भी जो पसंद नहीं आता है और अगर मैं उस समय ब्लॉगवाणी पर हूँ तो उस पर नापसंदगी जता ही देता हूँ..

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  20. इन चटकों के आधार पर यदि ब्लॉगरत्न मिलता हो,
    तो भईये मुझे भी बता देना, क्योंकि मैंनें आज तक इसमें दिमाग ही न लगाया ।
    पोस्ट का लिंक पकड़ा, वहाँ तक पहुँचा, उसे पढ़ा, अच्छा लगा तो मगन हो लिये, बुकमार्क कर लिया, यदि ज़रूरत हुई तो फ़ीडरीडर में जोड़ लिया । कहीं कहीं टिप्पणी पढ़ने और करने के मज़े लूट लिये, और जय ब्लॉगदेवता की बोल कर दूसरे कामों में उलझ गया । पसँदगी और नापसँदगी की सुविधा हमें अच्छे लेखन की ओर उन्मुख करने के लिये रखी है,
    इसके उलट यह टँगड़ी मारने और अच्छे लेखन को नज़र-अँदाज़ करने का औज़ार बन कर रह गयी ।
    भईये अब भी वक्त है, यदि इस के आधार पर ब्लॉगरत्न मिलना तय हो, तो मैं एक फुलटाइम चटकामार लिपिक बहाल कर लूँ ।

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  21. शुक्रिया तो कर ही देते हैं.

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  22. पर भाई साहब हमने अभी इस पोस्‍ट पर पसंद चटका लगाया तो पसंद 9 से 8 हो गया, यह क्‍या माजरा है भाई.

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  23. @ संजीव तिवारी जी,

    जब आपने पेज खोला तब पसंद नौ थी. आपके पसंद का चटका लगाने तक उसपर नापसंद के दो चटके लग चुके थे अर्थात पसंद सात बन गयी. जब आपने चटका लगाया तब वह आठ हो गयी.

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  24. main bilkul sehmat hun aap se praveen ji ...jin do posts ki baat aap kar rahe hain un dono p[ar meri napasandgi ka click tha... shuqriya ise ijaad karne wale ka

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  25. ब्‍लागवाणी का शुक्रिया, और आपका भी शुक्रिया मुद्दे की बात को पारदर्शिता के साथ कहने के लिए.

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  26. आदरणीय प्रवीण शाह जी, मैं अपनी पोस्ट क्या ब्लॉगवाणी सचमुच ब्लॉग जगत का माहौल खराब कर रहा है? को इस क्रम में रख्‍ाते हुए जवाब देना चाहूँगा कि सभी ब्लॉगर्स की आपत्ति इस बात पर नहीं है कि नापसंद/पसंद का चटका हो या नहीं। आपत्ति इस बात की है कि इन चटकों को इतनी 'वैल्यू' क्यों मिली हुई है। यदि किसी पोस्ट पर अपने मित्रों को फोन करके 5 पसंद के चटके लगवा दिये जाएं, तो पोस्ट एकदम से टॉप पर पहुंच जाती है, लेकिन यदि यही चटके नकारात्मक दिशा में हों, तो भले ही पोस्ट 100 से अधिक बार पढी गयी हो, वह एकदम धड़ाम हो जाती है। यानी कि चंद लोगों की कारगुजारी सौ से अधिक लोगों की रूचि पर भारी पड जाती है। यह सिस्टम तर्कसंगत नहीं है और ब्लॉग जगत में गुटबाजी का कारण बन रहा है। इस सिस्टम अर्थात इन चटकों की वैल्यू को संशोधित करने की आवश्यकता है। सारी बहस इसी को लेकर है।

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  27. जाकिर ने अपनी पोस्ट का जो शीर्शक रखा है वह एक दम भद्दा ओर ग़लत है| ये अपने प्रश्न मे ब्लोगवाणी पर माहॉल खराब करने का इल्ज़ाम लगाने का इल्ज़ाम लगा रहे है|

    जाकिर की एसा प्रश्न पूछने के पीछे मंशा क्या है? यह एक एकदम सरल प्रश्न तो नही है...

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  28. धूर्त बुद्धिजीवियो
    प्रश्न पसंद या नापसंद का नही है, प्रश्न यह है कि बेवजह पसंद या नापसंद कितना न्यायसंगत है?
    पसंद करो या नापसंद करो यह ज्वलंत समस्या नही है, पर इस चटके का गलत इस्तमाल कर किसी सार्थक पोस्ट की तेरही(अंतिम संस्कार) कर देना कितना कितना न्यायसंगत है?
    एक एक समझदार ब्लागर ने ४-४,५-५ फ़र्जी आई डी बना के रखी हुई हैं, जिन्होंने ब्लागवाणी पर रजिस्ट्रेशन भी कराया हुआ है, एक ब्लागर अकेला ४ या ५ पसम्द या नापसंद के चटके लगाने में सक्षम है, वो अकेला ही पर्याप्त है किसी जिंदा पोस्ट की अर्थी निकालने के लिये!
    ब्लाग बाबू

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  29. "हिन्दुस्तान में हर दो सेकेन्ड में एक औरत एक बच्चे को जन्म देती है"

    ओ बाबा! अब समझ आया हिन्दुस्तान की जनसंख्या बिस्फोट का राज! क्यों न सबसे पहले उस औरत को रोकते!

    मतलब ये समझो कि ब्लागवाणी तो हुआ औजार, और ब्लागर (कौन कहता है ब्लागरों को बन्दर? सामने आये!!) हुये प्रयोक्ता।

    मतलब अगर ब्लागर नापसंद करता है तो ब्लागवाणी की क्या गलती? अगर हथौड़े से अंगूठा फूट जाये तो हथौड़ा को लात मारेंगे? (लात भी टूट जायेगी!)

    भैया ये शीर्षक वाली बात से मैं भी सहमत हूं। इतनी हिम्मत तो है नहीं कि लिख पाते 'क्या ब्लागरों ने ब्लॉग जगत का माहौल खराब कर रखा है?' (जो शायद सच भी होता) तो ब्लॉगवाणी को पकड़ लिया। वैसे भी यह ब्लॉगवाणी गरीब की गाय है, जो चाहे लात मार लेता है सो लगे रहें।

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  30. शुक्रिया तो कर ही देते हैं.

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  31. प्रवीण जी, आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया।

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  32. जाकिर रजनीश जी... मुझे यह समझाईये कि अगर आप यह कह रहे हैं कि कुछ ब्लागर पसंद या नापसंद करते हैं तो यह कमी ब्लागवाणी की कैसे हुई?

    मुझे तो यह साफ-साफ ब्लागर कि लगी।

    जैसे सब्जी काटने की छुरी से अगर किसी पर हमला किया जाये तो क्या छुरी को दोषी ठहरायेंगे?

    आपका ये लॉजिक थोड़ा अजीब लगा।

    मुझे आपके मंतव्य सही नहीं लग रहे। आपने एक बार भी दोषी ब्लागरों की चर्चा नहीं की (जबकी आपने यह दावा किया है कि वही ब्लागर हॉट लिस्ट में रहते हैं) आपने सिर्फ ब्लागवाणी के बारे में लिखा जिसका काम सिर्फ पाठक पहुंचाना है और वह कर रही है।

    तो कृपया हॉट लिस्ट देखकर बतायें कि उनमें से किस ब्लागर को आप उस सबका दोषी मानते हैं जिसका आप आरोप लगा रहे हैं।

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  33. सर हामरा भी एक सुझाव,

    जाकिर जी कहा है कि ब्लागर लोग फोन करता है एक दूसरा को कि ब्लाग पर टिप्पा मारो तो मैं कहता हूं कि फोन लाइन बन्द करायेंगे... न तो ब्लागर लोग फोन करेगा... न टिप्पा होगा... तो हाम अब उम्मीद करता है कि सब बन्धु मिल कर एयरटेल, रिल्लाइन्स, बीएसएनल को बोलेगा कि ब्लागर लोगों का फोन बन्द करे...

    क्या बोलता है बन्धु?

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  34. अनानिमस महोदय/महोदया, इस मोटी सी बात को समझने के लिए आपको मेरे ब्लॉग पर जाना होगा, जहाँ मैंने यह कायदे से समझाया है कि इसमें 'ब्लॉगवाणी' की कहां पर गलती है।

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  35. जाकिर जी आपके ब्लाग पर हो आया हूं तभी पूछा है। इस बार भी आपने ब्लॉगवाणी की बात की लेकिन मेरे मूल सवाल "कौन से ऐसे ब्लागर है जो घपला कर रहे हैं जिसका आपने दावा किया?" आप गोल कर गये।

    आपने इतने जोरदार दावा किया है कि ब्लागर फोन कर के पसंद करवा रहे हैं इसका आधार होना जरूरी है वरना यह टॉप पर आने वाले ब्लागरों के चरित्र पर आक्षेप है। इसलिये जरूरी है कि आप स्पष्टीकरण दें साथ ही अपने सूत्रों के बार में बतायें जहां से आपको ऐसी विस्फोटक जानकारी मिली। वरना बेबात किसी टॉप ब्लागर पर आरोप न लगायें।

    आपने मेरी इस बात पर भी स्पष्टीकरण नहीं दिया कि ब्लॉगवाणी टूल मात्र है तो इसका प्रयोगकर्ता दोषी हुआ या टूल? क्योंकि नापसंद करने का मन प्रयोक्ता ने बनाया न कि ब्लॉगवाणी ने। कृपया बातायें।

    साथ ही यह भी बतायें कि आपने ब्लागवाणी के सभी फीचर्स के सही उपयोग लोगों को समझाने और उन्हें उसका सही इस्तेमाल करन के लिये मुहिम कब चलाई थी।

    और यह भी बतायें कि क्या आपने इस कथित दुरुपयोग को करने वाले ब्लागरों से इस बारे में बात कर कहा या पब्लिक रूप से ही कभी उनसे कहा कि यह बन्द होना चाहिये?

    -- क्या आप चाहते हैं कि मजहबी दुर्भाव वाले ब्लागों को फिर से ऊपर उठने का मौका मिले?
    -- क्या आप चाहते हैं कि कुत्सित बातों वाले ब्लाग हिट होते रहें?
    -- क्या आप चाहते हैं कि लोगों के पास ब्लोग जगत में हो रही बुरी घटनाओं (जैसे गंदे ब्लाग, गालियां, जूनियर-सीनियर विवाद) जैसे बातों के विरोध का कोई जरिया न रहे? क्योंकि कमेन्ट कर विरोध करें तो गालियां देते हैं?

    मुझे लगता है कि जब तक इन सब बातों का समाधान नहीं होता तब तक तो नापसंद जरूरी है। वरना ब्लाग की दुनिया और भी गंदली हो जायेगी।

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  36. अरे ओ अनानिमस, तू कौन सा नामर्द है, जो छिप के वार कर रहा है। हिम्मत है सामने आ कर बात कर।

    और हाँ, अगर तेरे खोपडे में जरा भी पानी है, तो तुझे समझ में आना चाहिए, ये वही लोग हैं, जो ब्लॉगवाणी के बदलाव की मांग को दूसरी ओर मोडने का प्रयत्न कर रहे हैं। और तू भी उसमें शामिल है, समझा।

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  37. एक विस्तृत टिप्पणी की अपेक्षा है।
    http://shrut-sugya.blogspot.com/2010/06/blog-post_29.html

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असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!