शुक्रवार, 18 जून 2010

मैं मूरख-अज्ञानी हूँ,.......पर क्या आप जानते हो पंच तत्वों को ?


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मेरे 'तत्वज्ञानी' मित्रों,

पिछले कुछ दिन व्यस्तता और दुखभरे गुजरे...

चचेरे छोटे भाई का असमय देहावसान हुआ, रानी बाग के चित्रशिला घाट पर अंतयेष्टि हुई, बहती जलधार के ऊपर नदी तट के पत्थरों का प्लेटफार्म सा बनाना, चिता सजाना और फिर अग्नि प्रज्जवलित कर पंचतत्वों से बनी देह का उन्हीं में विलीन होने का धैर्यपूर्वक इन्तजार करना... एक बिल्कुल अलग सा अनुभव होता है शमशान पर जलती चिता को देखते हुऐ... शायद कहीं कहा भी गया है कि उस समय जैसे विचार मन में आते हैं वैसे यदि किसी के मन में साल के १२ महीने-३६५ दिन आते रहें तो दुनिया में या किसी के जीवन में भी कोई समस्या नहीं रहेगी...

जैसा कि हर शवदाह के साथ होता है कि कुछ एक लोग ऐसे भी होते हैं जो चिता सजाने व जलाने के कार्य में विशेष अनुभवी होते हैं एक सेवा का कार्य मान कर वे अंतिम यात्रा में जा रहे की यात्रा को सहज सा बना देते हैं अपने योगदान से...ऐसे ही हमारे साथ थे 'बचन दा'...

चिता के प्रज्जवलित होने के बाद 'बचन दा' बोले कि कम से कम ढाई घन्टे तो लगेंगे ही... नदी किनारे के पत्थरों-रेत पर बैठ गये हम सब... तभी बचन दा पूछ बैठे पंडित जी से..." पंडित जी, कहते हैं पाँच तत्वों की देह उन्हीं पाँच तत्वों में विलीन हो गई है, क्या हैं यह तत्व और कहाँ से मिलते हैं?"

काफी चर्चा हुई पर मुझे या किसी को भी संतुष्टि नहीं हुई इसी लिये सोचा कि आपसे भी पूछा जाये...

पंच तत्व हैं...

आकाश
वायु
अग्नि
जल
पृथ्वी

अब इनमें से कुछ के अर्थ तो स्पष्ट हैं कुछ के नहीं...

जैसे आकाश का अर्थ क्या है शून्य, ध्वनि, व्यक्तित्व या तेज (Aura) ?

या फिर अग्नि का अर्थ देह के ताप से है अथवा मानसिक व फिजियोलॉजिक प्रक्रियाओं से जैसे जठराग्नि, कामाग्नि, क्रोधाग्नि आदि आदि...?

मेरा एक और सवाल है कि क्या जीव को यह सभी तत्व जन्म से ही मिल जाते हैं और उसी मात्रा में ही उसके साथ जीवन पर्यंत रहते हैं या अपने कर्म और पुरूषार्थ से वह इन्हे बढ़ाता या अर्जित भी करता है?



आईये अपना, मेरा और हम सब का तत्व ज्ञान बढ़ायें !







आभार!

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(महफूज अली जी व निशांत मिश्र जी से क्षमायाचना के साथ, संपादित करते समय त्रुटिवश पोस्ट ही लुप्त हो गई, अत: पुन: ठेली है। )

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपके इस प्रश्न का उत्तर देने में मैं योग्य नही पा रहा !

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  2. @प्रवीण जी
    मेरी संवेदनाएं आपके साथ हैं ...........वैसे इस पंचतत्व के विषय में मेरा ज्ञान तो कम था इसलिए मैंने इस पर अपनी माताजी से बात की तो उन्होंने कुछ इस तरह बताया-
    ये पाँचों तत्व मनुष्य के शरीर में समाहित हैं जैसे

    वायु - यहाँ पे वायु का अर्थ हमारी जीवनदायनी श्वास से है जो की वातावरण में ही मौजूद वायु ( oxygen ) पर टिकी हुई है .

    अग्नि - अग्नि का अर्थ हमारे देह के ताप से है और ये ताप खून में निहित गर्मी के कारण होता है , आप और हम जानते हैं की अगर शरीर का ताप एक निश्चित स्तर से ज्यादा या कम हो जाए तो मनुष्य के प्राणों को खतरा पैदा हो जाता है

    जल - जल का अर्थ हमारे शरीर में मौजूद इसकी मात्रा से है, वैज्ञानिकों ने अपने शोधों से ये साबित किया है की मनुष्य के शरीर में 70 प्रतिशत से अधिक जल की ही मात्रा होती है

    पृथ्वी - इसका अर्थ पृथ्वी अर्थात हमारी भूमि द्वारा उत्पन्न उन भोज्य पदार्थों अथवा तत्वों से है जिन्हें खाकर हमारी इस देह का निर्माण होता है , क्योंकि वे पदार्थ पैदा तो पृथ्वी से ही हुए हैं और हमारा शरीर जीवित रहने के लिए उन्हें ग्रहन भी कर रहा है, इसलिए उनके ज़रिये पृथ्वी का तत्व भी हमारी देह में ही शामिल है और इसी तत्व से हमारा शरीर बना है .

    आकाश -आकाश वाले बिंदु में के लिए शमा चाहूंगा लेकिन इसमें माताजी भी मेरी मदद नहीं कर पायीं , कोई और ज्ञानी एवं विद्वान महोदय अथवा महोदया ही इसे हल कर सकते/सकती हैं.

    और आपके द्वारा लेख के अंत में पूछे गए सवाल का जवाब है की -

    हाँ ये तत्व मनुष्य को उसके जन्म से ही मिल जाते हैं ,अपने कर्मों एवं पुरुषार्थ से वो इन्हें घटा या बढ़ा भी सकता है लेकिन इनके एक निश्चित स्तर पर रहने में ही हमारे शरीर की भलाई है क्योंकि अति हर चीज़ की बुरी है , इनकी अत्यधिक वृद्धि या फिर कमी हमारे प्राणों के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकती है

    आशा है इससे हम सबके तत्व ज्ञान में थोड़ी तो वृद्धि हुई होगी .इस वृद्धि का पूरा श्रेय मेरी माताजी को ही जाता है . क्योंकि मुझे इसमें अधिक ज्ञान ना था . ये सब उनके द्वारा ही बताया गया .

    धन्यवाद

    महक

    उत्तर देंहटाएं
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    http://www.cocomment.com/comment/186764446 पर पूर्व में की गई टिप्पणियों को देख सकते हैं।

    आभार!

    ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसा माना जाता है की मनुष्य की जीवन यात्रा पृथ्वी से आकाश (अनंत) की यात्रा है . यह सारा ब्रह्मांड ही इन पाँच तत्वो से बना है . वास्तव में जो कुछ तत्व दिखाई देते हैं वे वास्तव में पूर्ण रूप से तत्व नहीं है कुछ समरूपता है . इस तरह से पांचों तत्व गूढ़ हैं . यह वैसा ही कुछ कुछ है जैसे गुरुत्वाकर्षण जिसका होना हम धरती पर रह कर महसूस नहीं कर पाते .

    उत्तर देंहटाएं

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