गुरुवार, 10 जून 2010

आप अपने दिल के अंदर की बात छुपाते हो !!!



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मेरे 'अनुभवी' मित्रों,

वैसे अनुभव तो मेरा भी कम नहीं है... सात साल से ज्यादा हो गये हैं विवाह हुऐ... पांच साल की हो गई है बिटिया रानी...

पर आज भी एक बात मुझे अकसर परेशान करती है... सोचा आपसे पूछ ही लूं...

एक मध्यवर्गीय परिवार है हमारा... अच्छी नौकरी है मेरी...अपने ओल्ड फैशन सिद्धान्तों से समझौता न करता हूँ और न ही कभी उसकी जरूरत ही महसूस होती है मुझे... फिर भी भारतीय मध्यवर्ग को चैन से रहने के लिये जिन चीजों की आवश्यकता होती है, वह सब हैं हमारे पास... मतलब किसी चीज की कोई दिक्कत नहीं है।

हाँ एक बात जरूर है मेरे साथ... मेरे विचार में अब तक तो मेरे पाठक भी जान गये होंगे... वह यह है कि मैं जानबूझकर कभी भी झूठ नहीं बोलता... चाहे-अनचाहे दिमाग कुछ इस तरह का हो गया है कि 'सच' चाहे कितना ही कड़वा हो... मैं वही बोल देता हूँ... अक्सर इस बात को लेकर डांटती भी हैं श्रीमती... उनका कहना है कि कड़वे सच को मुझे बातों की चाशनी में लपेट कर बोलना चाहिये... जिससे सामने वाले को बुरा न लगे... पर मैं नहीं कर पाता यह... हाँ एक बात जो मैंने डेवलप की है, वह ये कि अपने आलोचक के प्रति कोई कड़वाहट नहीं लाता मन में...

फिर भी मुझे लगता है कि पुरूष के लिये नारी एक
अबूझ पहेली सी है... और रहेगी भी... शायद नारी
के लिये पुरूष भी ऐसा ही होता होगा...


काम से घर आता हूँ या जो भी वक्त हम साथ गुजारते हैं... उसमें खूब सारी बाते होती हैं...अपनी दुनिया, परिवार, समाज, हर किसी के बारे में... बस एक बात है... वह है, फेमिली गॉसिप, नेबरहुड गॉसिप और कभी-कभी ऑफिस गॉसिप ... मैं धैर्य से यह गॉसिप सुन तो लेता हूँ... पर अपनी ओर से कुछ कंट्रीब्यूट नहीं कर पाता...


फिर भी एक बात जो मुझे अक्सर सालती है वह है...


'श्रीमती' जी द्वारा अक्सर दिया जाने वाला यह उलाहना...



"आप अपने अंदर की बातें छुपा कर रखते हो, कभी भी अपने दिल की बात मुझे नहीं बताते।"



मैं मूढ़मति, आज तक इसका अर्थ ही नहीं समझ पाया :(



आप कुछ मदद करेंगे क्या मेरी ?



प्लीज !








आभार!
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34 टिप्‍पणियां:

  1. आईये सुनें ... अमृत वाणी ।

    आचार्य जी

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  2. ये बात तो ठीक ही है ...स्त्रियाँ दिल की साफ़ होती है इसलिए अपना मन खोल कर रख देती हैं ...पुरुष अपने भेद छिपाते हैं ...
    सबसे दीगर बात यह है की ...हम दूसरों द्वारा समझे नहीं जाने की शिकायत क्यों करते हैं ...क्यों दूसरों को समझने की कोशिश नहीं करते ...यह स्त्री पुरुष सभी पर लागू होता है ...!!

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    पुरूष अपने भेद छिपाते हैं

    @ वाणी गीत,

    यह क्या वाणी जी ?

    आप भी ऐसा ही सोचती हैं... पर मैं जानना चाहता हूँ कि स्त्रियों की इस तरह की सोच का आधार क्या है ?

    आभार!

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  4. ab madad ki bat ki hai to me to itna hi kah paunga ki mera waqt aane do assa tab aap ki aatma ko samh paunga ki aap ki kya paristithihai or kya jawab hona chahiye

    उत्तर देंहटाएं
  5. शायद यह बात हर पत्नी कहती है...मुझे लगता है कि यह टोह लेने जैसे बात है कि कहीं वाकई कुछ छिपा तो नहीं गये. :)


    वैसे साफ कह देने की आपकी आदत के हम कायल हैं, सम्मान करते हैं. कम ही लोग ऐसी हिम्मत रखते हैं ..कम से कम मुझमें यह तारीफी नहीं है. कमी है मेरी.

    उत्तर देंहटाएं
  6. "यह है कि मैं जानबूझकर कभी भी झूठ नहीं बोलता." -तो क्या यह अनजाने में बोला गया है ? हा हा !
    समझिये आप मेरा अतीत हैं! औरतें उतनी निरछल और सहज नहीं होती जितना प्रायः पुरुष होते हैं -
    भूल गए क्या ?:
    त्रिया चरित्रं ..पुरुषस्य भाग्यम ......
    देवो न न जानपि कुतो मनुष्य!
    यह हजार सालों का प्रेक्षण है !

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  7. @ फिर भी मुझे लगता है कि पुरूष के लिये नारी एक
    अबूझ पहेली सी है... और रहेगी भी... शायद नारी
    के लिये पुरूष भी ऐसा ही होता होगा...

    ऐसा होना सृष्टि में हित में है.

    @ .स्त्रियाँ दिल की साफ़ होती है इसलिए अपना मन खोल कर रख देती हैं ...पुरुष अपने भेद छिपाते हैं ...

    आत्ममुग्ध साधारणीकरण.

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  8. गिरिजेश जी की टिप्पणी से मैं भी सहमत हूँ !

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  9. .
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    आदरणीय वाणी जी कह रही हैं:-

    स्त्रियाँ दिल की साफ होती हैं... इसलिये अपना मन खोल कर रख देती हैं... पुरूष अपने भेद छिपाते हैं...


    और आदरणीय अरविन्द मिश्र जी का कहना है:-

    औरतें उतनी निश्छल और सहज नहीं होती जितना प्राय: पुरूष होते हैं।

    क्या कहूँ कुछ समझ नहीं पा रहा मैं तो . . . ;)

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  10. 'सृष्टि में'
    की जगह
    'सृष्टि के'

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  11. 'सच' चाहे कितना ही कड़वा हो... मैं वही बोल देता हूँ... अक्सर इस बात को लेकर डांटती भी हैं श्रीमती... उनका कहना है कि कड़वे सच को मुझे बातों की चाशनी में लपेट कर बोलना चाहिये...

    ऐसा हर इन्सान किसी भी हालत में नहीं कर सकता ,हलांकि लोग और परिस्थियाँ ऐसे लोगों के लिए अनुकूल होती जा रही है जो सच को चासनी में लपेट कर बोलते हैं |
    बहुत सुन्दर प्रस्तुती ....

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  12. 'हाइपोथीसिस' टेस्टिंग कोई जुर्म तो नहीं ...आपकी बातों , पैरहन / लिबास वगैरह वगैरह में इनके स्रोत / संकेत जरुर रहे होंगे :)

    वैसे पत्नियों की अध्ययनशीलता / जिज्ञासु वृत्ति को सहज भाव से ग्रहण नहीं करने के भी कुछ अर्थ जरुर होंगे :)

    हो सकता है भाभी जी ने आपकी किसी अनजाने में बोली गई बात ....को पकड़ लिया हो :)

    ( और देखिये यह मामला अरविन्द जी और वाणी जी से पहले आपका है इसलिए फोकस भी वहीं कीजिये )

    उत्तर देंहटाएं
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    @ ali,

    हा हा हा हा,

    अली सैय्यद साहब, आप भी...

    काहे फंसा रहे हैं मुझे... वो पढ़ती हैं यह सब...

    रहम करिये इस मूढ़मति पर... देव!


    ...

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  14. @ प्रवीण जी ,
    मेरी टिप्पणी का दूसरा हिस्सा तो आप भूल ही गये ...उस पर भी तो प्रतिक्रिया मांगिये विद्वानों की ...:):)

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  15. @ त्रिया चरित्रं पुरुषस्य भाग्यम्
    देवो न जानति कुतो मनुष्यः
    इसको कहते हैं लुक्की लगाना... जहाँ नारी की बात हुयी लुक्की लगाने पहुँच जाते हैं अरविंद जी.
    मैं तो वाणी जी की बात से सहमत हूँ... औरतें अपनी भावनाओं को व्यक्त कर लेती हैं, पुरुष नहीं करते ... क्योंकि दोनों का पालन-पोषण इस तरह से होता है. मूल रूप में यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है कि उसका स्वभाव कैसा है? न कि स्त्री या पुरुष पर.

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    @ वाणी गीत,

    सही कह रही हैं आप... गलती मेरी ही है...और मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।
    सभी 'अनुभवी' मित्रों से वाणी जी की टिप्पणी के दूसरे हिस्से पर भी प्रतिक्रिया अपेक्षित है।... :)

    @ mukti,

    आप के अरविन्द जी पर लुक्की लगाने संबंधित इस आक्षेप का उत्तर वही दें तो बेहतर है ।... वैसे मैं असहमत हूँ आपके इस आकलन से ।


    @ सभी 'अनुभवी' मित्रों,

    ऑफिस के लिये निकल रहा हूँ... अब कोई वार्तालाप शायद शाम ५ बजे के बाद ही कर पाऊंगा।

    आभार!

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  17. From very young age girls are taught to remain silent on their feelings . they are taught that their parents are not their own , their parental house is not theirs even their own body is not theirs . one day some prince charming will come to take them away .

    now this concept of finding some day a person who is rightfully "their own " in whome they can confide what ever is in their heart makes a woman "open" with her husband . as a wife she feels she needs to know every thing in , about and around her husband . she keeps on probing and sharing the personal things .

    on the contrary the boys in the society always have a home of their own fromt he day they are born so they dont have to wait for some to come and make them their own . they dont have any thing that they can share which they were asked to supress

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  18. साफ कह देने की आपकी आदत के हम कायल हैं, सम्मान करते हैं. कम ही लोग ऐसी हिम्मत रखते हैं ..

    बहुत सुन्दर प्रस्तुती ....

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  19. भाई साहब, आप बुरा मनो या भला , मुझे तो भाभीजी आपसे ज्यादा समझदार लगती है ! :)

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  20. बताने में खतरा जो रहता है, कहीं असली बात निकल गयी तो....

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  21. मुक्ति जी बजा फरमा रही हैं -नर नारी का मामला नहीं यह व्यक्ति व्यक्ति पर निर्भर करता है .
    कुछ लोग जहाँ अच्छे खासे कमीने/कमीनी होते/होती हैं बाकी कायनात तो सुन्दर है!
    हाँ कुछ मूर्खा बेचारियाँ जरूर होती हैं जो अपने विवाह पूर्व अफेयरों को पतियों की चिकनी चुपड़ी
    बातों में आकर कह पड़ती हैं -और जीवन भर दुःख सहती हैं !

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  22. जिस बात में मुझे कुछ भी पंचायत करने लायक तत्व नहीं दिखता है, हमारी श्रीमती जी उसमें भी तत्व ढूढ़ लेती हैं । अब कार्यालय की कोई बात उन्हें किसी और के माध्यम से पता चले तो पूछती हैं कि आपने बताया क्यों नहीं ?
    हम तो सदैव घिरे रहते हैं इस आशंका से कोई रिपोर्ट छूट न जाये होम मिनिस्ट्री के लिये ।

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  23. 'सच' चाहे कितना ही कड़वा हो...
    Excellent joke!

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  24. यह मसला तो आज तक अच्छों-अच्छो को समझ में नहीं आया है।

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  25. Praveen ji,

    Serious problem hai !

    i am having the same issue at my home.

    'Unko' ye shikayat hai ke hum kuchh nahi rehte..

    'humari' ye shikayat hai ke -aap chup kyun nahi rehte..

    My husband asked- " Divya kahan busy rehti ho?"

    I said Praveen-dway [Praveen Shah and Praveen Pandey ] are harassed by their beautiful dames , so i was busy settling the internal affairs.

    Husband said- " Ab itna straight answer dene ki kya zaroorat thee? Thoda lachhedaar jawab deti na !"

    Humne kaha- Jyada gol-gol karungi to Dr. Arvind kahenge..." Triya charitram..."

    Sameer said.." Arey kabhi humse bhi bol-batiya liya karo "

    I said- "Prevention is better than cure"...If i will talk like normal and manbhavan patni....Then you will surely come up with a post like Praveen ji's post asking for solution with public.

    Sam said- "wow ! kya tarika sujhaya !" Kal hi ek blog likhunga.

    ab kya karti...maathaa peet liya ! " Hai daiyya ee hum ka kar baithe" . Ek hi to jagah thee sukoon bhari, wo bhi gayye.

    Praveen ji, man dukhi na kijiye..."EE spouse log aisan hot hain"

    "Andhra dekhe mud piraaye, andhra bin raha na jaye !"

    Darr lag raha hai...Kuchh irrational to nahi likh diya..[courtesy-your profile]


    Sameer said...

    उत्तर देंहटाएं
  26. आपको नींद में बोलने की आदत तो नही?.....सपने में ही कोई डायलोग ज़ोर से बोलने में तो नही आ गया?....आपको झूठ बोलने की आदत तो है नहीं!

    --

    उत्तर देंहटाएं
  27. यह मेरी निजी मान्‍यता है कि आदमियों में थोड़ी सी हीनभावना होती है इसलिए वे पत्‍नी से अकसर डरते हैं। कभी-कभी पत्‍नी भी उसकी हीनभावना को बढ़ाने में मदद करती है, हमेशा ताने दे देकर कि तुम्‍हारे पास क्‍या है? तुम्‍हारे रिश्‍तेदार ऐसे हैं वैसे हैं आदि आदि। इस कारण वह बेचारा डरके मारे कई बाते छिपा जाता है कि यदि यह सब बताया तो पत्‍नी उसे फिर गया गुजरा ही समझेगी। यही कारण था कि पहले सास आते ही सुनाने लग जाती थी कि तेरे मायके में क्‍या है? वे एक दूसरे का मनोबल तोड़ती थी जिससे पति सुरक्षित हो जाता था लेकिन आज सास तो स्‍वयं बेचारी हो गयी है तो पति ही केवल बेचारा बच गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह काम अकेले पत्नियां ही करती हो, बहुतेरे पुरुष भी इस रामबाण अस्‍त्र का प्रयोग करते हैं। तभी तो कहते है कि पहले बिल्‍ली मारे वही शेर।

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  28. मित्र, न करो इन भोली बातों पर रोष
    थिंक समथिंग बियोंड अन्नमय कोष

    उत्तर देंहटाएं
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    @ Shekhar Kumawat,
    आपका वक्त आने का हमें भी इन्तजार है, तब तक 'ज्ञान' लीजिये!... ;)

    @ रचना जी,
    Thanks for this insight into male & female psyche. I think that now I'll understand 'her' better.

    @ Udan Tashtari,
    यह टोह लेने वाल एंगल तो मैंने कभी सोचा ही नहीं, वाकई अनुभव भी कोई चीज है ... :)

    @ गोदियाल साहब,
    भाभी जी वाकई ज्यादा समझदार हैं, मूढ़मति तभी तो लिखा है मैंने खुद को!

    @ जाकिर अली 'रजनीश' जी,
    अपना तो ऐसा कोई पास्ट नहीं है... बेफिकर हूँ इसीलिये... ;)

    @ प्रवीण पान्डेय जी,
    इस मामले में खुशकिस्मत हूँ... मैं तो अपने बॉस को भी रिपोर्ट नहीं करता... :)

    @ Smart Indian,
    Smart comment by a REALLY SMART Chap!

    @ Zeal,
    " ये स्पाउस लोग ऐसे ही होते हैं"...
    चलिये कुछ तसल्ली तो मिली... वैसे आप सैम के ब्लॉग लिखने से इतना घबरा क्यों रही हैं... लिखने दीजिये... जब लैपटॉप पर बैठे होंगे... तो आप ज्यादा सुकून पायेंगी... :)

    @ Mansoor Ali ji,
    नहीं साहब, नींद इतनी गहरी आती है कि कभी-कभी तो सोते समय सांस तक लेना भूल जाता हूँ... मुँह से कुछ निकलने का सवाल ही नहीं... वैसे भी पहले वो सोती हैं और 'पहले मैं उठता' हूँ ... :(

    @ ajit gupta ji,
    अच्छा तो यह मेरी हीनभावना है जो मैं 'श्रीमती' से डरता हूँ... और मैं मूढ़मति 'दाना-पानी बन्द देने की धमकी' और 'बिन मौसम नैनों से बरसात' को इस डर का कारण मान बैठा था!... :(


    ...

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  30. @-"आप अपने अंदर की बातें छुपा कर रखते हो, कभी भी अपने दिल की बात मुझे नहीं बताते।"
    @-पर मैं जानना चाहता हूँ कि स्त्रियों की इस तरह की सोच का आधार क्या है ?

    Praveen ji,

    I also used to think like that till 2005. Once i asked Sameer, why you never share your problems and worries with me?...Do you think i am not the right person?, or incapable to comprehend your worries?, or you are scared of me?

    He replied- " Divya you are a perfect companion and a wonderful friend. You are already doing so much for me and you have a lot of worries and pains of your own so i just do not want to add the worries of my share.

    I do not want you to be over burdened. I want to see you happy so i do not share the worries but i love to share my joys and achievements with you."

    I was satisfied with his answer.

    I kept on dwelling further in my mind on the same issue. I feel men do not want to share because :

    - They do not want to bother their wife.
    -They do not want to share their unpleasant experiences
    -They have better things to share.
    -They do not want to be weak in front of wife, so they refrain from sharing certain things.
    - Gradually this becomes their habit and they find it troublesome to share every minor detail with her.
    -They Find solace sharing with some friend , so a wife is not required for such sharing s.

    We need a friend for 'SHARING S' not spouse.

    Unfortunately in most of the couples men and women are good husband and wives but not good FRIENDS.

    Both of them end up wondering..."he/she never shares everything with me. Am i not worth trusting"

    In my humble opinion you are fortunate that your wife asks you these questions.

    There are some wives like Divya who never asks such questions, because she knows that her husband needs-
    -rest after returning from office.
    -He needs a light entertainment like watching TV and not the heavy talks from wife
    - He loves talking on phone with friends and share laughter.
    -He wants to play tennis and golf with friends on weekends.
    -He loves to sleep when he has nothing to do.

    He wants wife as-
    -a very disciplined lady.
    -who manages the house with great expertise.
    -who can be impressive in public and parties.
    -who never comes up with her woes and tears.
    -who is smart and capable to manage the trivial household responsibilities without asking him for help.
    -Who doesn't crib for trivial issues.
    -who doesn't know how raise a voice.

    Above all a husband wants a wife who smiles always , no matter how hard she is fighting back her tears.

    I apologize for writing anything hurting.

    Divya

    उत्तर देंहटाएं
  31. .
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    .
    @ Divya (Zeal),

    Firstly I must say that you haven't written anything that is even remotely hurtful to me or any reader, So there is no need to apologize.

    "Unfortunately in most of the couples men and women are good husband and wives but not good FRIENDS."

    This is true in most of the cases, Wife is a good life partner but not considered a 'FRIEND' by a majority of males because a FRIEND accepts you in Toto ie. with all your faults, follies & eccentricities, he doesn't want to change anything in you for better or worse, his acceptance of 'YOU' is unconditional. This is not the case with most of the wives.

    There is another major difference between male & female thought process, While a Female will share her every little thought with somebody, most of the males will have certain thoughts only for themselves, they will ruminate over them, but will not like to share them with anyone. I don't know why it is so, but this is true. ( Don't believe me! ask any male)


    "Above all a husband wants a wife who smiles always , no matter how hard she is fighting back her tears."

    Believe me this is not the case, We (Husbands) often wonder... How on Earth the Wives manage to shed so many tears on so many trivial things or issues.


    He wants wife as-
    -who doesn't know how raise a voice.


    on a personal level I differ with this statement because personally I like Fierce Fighter Wife & I am very fortunate to have such a partner.

    उत्तर देंहटाएं
  32. Praveen ji-

    @-I like Fierce Fighter Wife & I am very fortunate to have such a partner.


    I am glad to hear this..

    "All is well that ends well"

    Your name and your wife's name has been tagged under "world's wonderful couples ".

    Convey my regards to the beautiful wife of a proud husband.

    Regards,

    उत्तर देंहटाएं

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