सोमवार, 31 मई 2010

श्रीमती व श्री राम . . . श्रीमती व श्री शंकर . . . मुझ को तो जमा नहीं, अपनी आप बताईये !


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मेरे सबको जायज 'हक' देने वाले मित्रों,

वैसे तो बात छोटी सी है... आप में से कुछ यह भी कह सकते हैं कि इसका कोई महत्व ही नहीं है... पर फिर भी मुझे लगा कि आप से पूछ ही लूँ इस बारे में...

परिवार में एक विवाह होना है... निमंत्रण हेतु कार्ड छपवाने का दायित्व मिला मुझे...

कार्ड छपवाने गया तो प्रिंटर के पास पहुँच कर मुझे याद आया कि वधू की माता का नाम तो मैं जानता नहीं... फोन निकाल कर पूछने लगा तो प्रिंटर बोला " अरे भाई साहब, जाने दीजिये आपको वधू के पिता का नाम तो पता है ही, आजकल तो सभी श्रीमती और श्री _ _ _ ही छपवाते हैं कार्ड पर"... साथ गया भाई भी बोला "सही तो कह रहे हैं अंकल जी।"... एक बार को मैं मान सा गया परंतु फिर मुझे याद आयी हमारे पूज्यनीय जोड़ों की...

सीता-राम, राधा-कृष्ण, उमा-शिव...

कहीं पर भी तो श्रीमती और श्री राम या श्रीमती और श्री कृष्ण नहीं कहते हम लोग...


फिर एक भरे पूरे व्यक्तित्व, एक अलग और विशिष्ट पहचान, एक जीते-जागते इंसान को महज एक 'श्रीमती' में समेट देना अपने को तो सही नहीं लगा...


नतीजा...


प्रचलन के मुताबिक जो छपना चाहिये था...



चिरंजीवी कुमार

पुत्र श्रीमती एवं श्री शंकर शाह



परिणय


आयुष्मति कुमारी

पुत्री श्रीमती एवं श्री राम सिंह बोरा




वह मैंने छपाया...



चिरंजीवी कुमार

पुत्र श्रीमती पार्वती शाह एवं श्री शंकर शाह



परिणय


आयुष्मति कुमारी

पुत्री श्रीमती सीता बोरा एवं श्री राम सिंह बोरा




अब आप ही बताइये...

सही किया या गलत...?
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आभार!

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17 टिप्‍पणियां:

  1. अजी आप और गलत साथ-साथ ? हो ही नहीं सकता प्रवीण शाहजी ! इन्तजार करो जल्दी वो वक्त भी आने वाला है जब कार्डो से कहीं श्री गायब होगा तो कहीं श्रीमती ! हा-हां... मजाक का मूड था सुबह-सुबह !

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    @ आदरणीय गोदियाल जी,

    "इन्तजार करो जल्दी वो वक्त भी आने वाला है जब कार्डो से कहीं श्री गायब होगा तो कहीं श्रीमती !"

    हा हा हा हा, Good One सर जी !

    आभार!

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  3. एकदम सही किया.
    नाम तो ठीक है मगर ये बताइए कि कार्ड में विवाह की तिथि और स्थान के बार में तो कोई जानकारी नहीं है..!

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    @ anonymous,

    "apne sabse bada teer mara"

    hmmmm... लग तो मुझे भी रहा है, तभी शायद आप बेनामी हो गये!

    चीयर अप मैन, लाइफ इज ब्यूटीफुल !... ;) & :)

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  5. अगर गे कपल को कार्ड देना हो तो क्या लिखेंगे....ही ही ही ....? वैसे आपने बिलकुल भी गलत नहीं किया....और बहुत ही प्रशंसनीय काम किया है.....

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    @ महफूज अली,

    गोदियाल जी ने महज इशारा किया था और आपने सवाल पूछकर वाकई मुश्किल में डाल दिया है :(

    वैसे मेरे विचार मे बाकी सब वही रहेगा...

    बस...

    चिरंजीव _ _ _

    परिणय

    चिरंजीव _ _ _

    होने से चलेगा क्या ?

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  7. शादी के कार्ड पर श्रीमति का नाम होना ज़रूरी एक कारण से और भी है....पहला तो आपने बता ही दिया कि एक अलग व्यक्तित्त्व कि पहचान होती है...और दूसरा ये भी है कि कार्ड श्रीमति के परिवार वालों को भी दिए जाते हैं ..कभी कभी उनके घर वाले जो चाचा ताऊ के रिश्ते होते हैं वो श्रीमति के नाम से ज्यादा परिचित होते हैं...तो ये नाम कार्ड भेजने वाले का परिचय भी बनते हैं..

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  8. sabhi log aisa karne lagen to mahilaaon ko bhi pahchan mil jayegi....

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  9. प्रिय प्रवीण शाह जी ,
    सही किया !
    जब 'गे' जोडे होंगे तब भी 'आईडेंटिटी' दो ही होंगी और नाम भी दो ! मेरा ख्याल है कि आपकी पहल भी 'आईडेंटिटी' को लेकर है फिर इस पहल के लिये लिंग मायने कहां रखता है ?
    मुझे लगता है कि अप्रत्यक्ष रूप से ही सही , आपकी पहल एक तरह के लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध तो है ही !

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  10. प्रवीण शाह जी़, आपने जो किया वह सही तो है ही साथ ही यह आपके व्यक्तित्व को भी दर्शाता है। ऐसी ही छोटी छोटी बातें जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती हैं।
    घुघूती बासूती

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  11. आपने बिलकुल सही किया

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  12. जी क्षमा चाहूँगा थोड़े से अलग विचार प्रस्तुत करने के लिए...." क्या कोई बतायेगा कि "ठीक-गलत" है क्या...?मै कई बार असमंजस में पड़ जाता हूँ कि किसी बात को ठीक अथवा गलत घोषित करने के क्या आधार होने चाहिए...

    कुंवर जी,

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  13. apnee shadee me maine bhi yahee kiya tha...pahle maa kaa naaam likha gaya fir papa kaa...meree dekhadekhee aur logon ne bhi is tarah kee shuruaat karne ka sahas kiya...

    उत्तर देंहटाएं

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