गुरुवार, 27 मई 2010

एक छोटा सा सवाल... ईमानदारी से जवाब दीजियेगा... प्लीज !!!


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मेरे 'सहनशील' मित्रों,



एक छोटा सा सवाल... बस यूं ही...



आपने एक पोस्ट डाली, ढेर सारी टिप्पणियां पाने

और हॉट लिस्ट पर विराजमान होने के सपने देखते

हुए... पर हुआ क्या कि पोस्ट छपने के तुरंत बाद

आलोचनात्मक और तथ्यात्मक भूलों की ओर

इंगित करती अथवा रचना के शिल्प-गठन-कथ्य

को नापसंद करती टिप्पणियाँ आने लगीं...

वह भी अपने प्रियजनों की !



क्या सोचते हो आप ऐसी स्थिति में... क्या

प्रतिक्रिया होती है आपकी ...

और क्या होनी चाहिये ?...










आभार!

...

22 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय प्रवीण शाह जी ! ऐसी प्रतिक्रियाये मिलने पर दो तरह से हम हरकत में आते है
    १. अगर वह कोई कुमार जलजला जैसा लावारिस ब्लोगर हो तो उसके हिसाब से ,
    २.और अगर वह प्रतिक्रया किसी जेन्यून ब्लोगर से, पाठक से आई है उसने हमारे लेख में जो भी कमियां या नकारात्मक बाते कही हो उनपर हम ठन्डे दिमाग से गौर करते है कि क्या जो वह कह रहा है सही है अथवा गलत , मनन करने पर यदि लगे कि वह सही कह रहा है तो भूल सुधर करते है और उसका शुक्रिया अदा करते है ! मेरा मानना है कि सिर्फ वह-वह की बजाये अगर सच में कोई सुधार की गुन्ज्जाइश है और सजेशन उचित है तो उसे फालो करना बेहतर है बाकी तो चन्दन बिष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग ........!

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  2. आप बीच बीच में सुनाते रहिये.. मुझसे सवाल मत करिए प्लीज़.. (हा हा !!)

    आप हमेशा टिप्पणियों में मुद्दे की बात करते हैं तटस्थ रह कर. आप सही मानो में ब्लोगरी करते हैं. शुक्रिया आपका.

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  3. 1) लेख के तथ्यों और कथ्यों पर पुनर्विचार करना चाहिये
    2) कोई तथ्यात्मक भूल हो तो माफ़ी माँगने में कोई हर्ज नहीं (भई हम ब्लॉगर हैं कोई खुदा तो नहीं)
    3) यदि सम्भव हो तो थोड़ा सुधार करके पोस्ट को "रीठेल" कर दिया जाये… :)

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  4. भाई ब्लोगरी का तो फायदा ही यही है की आपको बहुत से सिखाने वाले गुरु भी मिल जाते हैं.... हम जैसों को और क्या चाहिए

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  5. "आपने एक पोस्ट डाली, ढेर सारी टिप्पणियां पाने
    और हॉट लिस्ट पर विराजमान होने के सपने देखते
    हुए... "

    क्या पोस्ट लिखने और प्रकाशित करने का वास्तविक उद्देश्य यही होता है?

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  6. आमतौर पर हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत में आलोचनात्मक और तथ्यात्मक भूलों की ओर इंगित करती टिप्‍पणियां कम आती हैं एवं रचना के शिल्प-गठन-कथ्य को नापसंद करती टिप्पणियाँ आती ही नहीं है(औसत के अनुसार), वाह-वाह की संस्‍कृति है यहां.
    यदि आपने अपने क्षुद्र ज्ञान से सदभावनावश कोई एसी टिप्‍पणी कर दी तो वह तथाकथित ब्‍लॉगर आपके ब्‍लॉग में झांकने नहीं आयेगा चाहे आप कितना भी अच्‍छा पठनीय पोस्‍ट लिख दो.

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  7. घबडाहट होती है कि कहाँ और क्या गलती कर बैठा !

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  8. वैसे कोई समालोचना करे तो निश्चित ही गौर फरमाना चाहिये.

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  9. सबसे पहली बात टिप्पणियों के लिए पोस्ट लिखना ही गलत है.....
    आपने कोई पोस्ट लिखी और आपके अपने उससे सहमत नहीं है.....तो सबसे पहले ये सोचिये कि क्या सचमुच आपने गलत लिखा है......अगर आपके पास कोई स्पष्टीकरण है तो वो दे दीजिये.........फिर भी अगर आपको लगता है आप सही है तो उसपर बने रहिये .......वो उनका नज़रिया है और ये आपका अपना...फिर एक पोस्ट रिश्तों को बनाने-बिगाड़ने में काम नहीं करती....अगर ऐसा हुआ तो फिर उस रिश्ते का ख़त्म होना ही बेहतर है....वैसे तो जो अपने होते हैं इतनी सी बात पर दूर नहीं जाते......वो हर हाल में साथ होते हैं...कमसे कम मेरे अपने तो ऐसे ही हैं....
    आशा है मैं अपने विचार व्यक्त कर पाई...

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  10. if the facts of post are wrong i will correct them
    if the difference is ideology i prefer to delete the comment because i am here to write on my ideology my thoughts but even the comment i delete i try to read as much on that comment as possible
    and i blog because i want hade a mental turbulence so comments are not important whe i write but they become important as soon as i publish

    also for me blog comments are from readers and not from near and dears

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  11. सबसे पहली बात टिप्पणियों के लिए लिखना ही गलत है.....

    घबडाहट होती है कि कहाँ और क्या गलती कर बैठा !वैसे कोई समालोचना करे तो निश्चित ही गौर फरमाना चाहिये

    उत्तर देंहटाएं
  12. टिप्पणियां मुख्यत्त तीन प्रकार के होते हैं ... ये मेरी सोच है ... ज्यादातर वो होते हैं जो पोस्ट को बिना पढ़े, बिना समझे दी गयी हो ... ऐसी टिप्पणियां हो न हो कोई फर्क नहीं पड़ता ... दूसरी वो जो नकारात्मक टिप्पणियां होती हैं ... इन टिप्पणियों से टिपण्णी करने वाले की मानसिक स्तिथि पता चलती है ... तीसरी और सबसे ज़रूरी, सबसे अच्छी टिप्पणियां वो होती हैं जो पोस्ट को पढकर, सकारात्मक ढंग से दी गई हो, भले ही उसमे कोई समालोचना ही क्यूँ न हो ... यदि सकारात्मक टिपण्णी है और उसमे किसीने आपकी कोई गलती की तरफ ध्यान आकर्षित किया है, तो ऐसी टिप्पणियों को गंभीरता से लेना चाहिए ...

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  13. AAP SEEDHE WA KOLHU KE BAIL WALE BLOGGER HAI, TIPPNI KARTE HAI AUR TIPPNI CHAHTE HAI, YAHI TO HAI INTERNET PAR BLOGGING NAA CHAHTE HUYE BHE APNE BARE ME ULTA SEEDHA SUNNE KI CHAHAT BLOGGING KA RASTA DIKHATI HAI. CHAHE ULTA KAHE YA SEEDHA, ACHCHA LAGTA SABHI KUCH. TO CHAMA KARNA ULTA KAHNE KE LIYE PAR YE HAI SEEDHA

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  14. ज़नाब यदि आपकी पोस्ट पर ऎसी असहमति और नापसँदगी दिखे,
    तो समझ जाइये कि या तो, आपने अनजाने में किसी ज्वलँत मुद्दे पर कोई बुद्धिमतापूर्ण पोस्ट लिख मारी है ।
    या फिर टिप्पणीदाता रेडियो मिरची से ग्रस्त है !

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  15. पसंद नापसंद तो अपने-अपने विचार हो सकते हैं मगर यदि वास्तव में कोई हमारी भूल, वर्तनी दोष या व्याकरण सम्बन्धी त्रुटियों की ओर इशारा करता है तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है..! वही तो सच्चा मित्र है.

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  16. @ awadhiya-
    kam se kam ap to aisa mat pucho aapke liye to yahi hota hai

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  17. अगर कोई गलती बताता है तो वो आपकी मदद ही करता है,और फ़िर सुधार भी तो ज़रुरी है।वैसे आपके सवाल के दो जवाब है मेरे पास पहला:-क्षमा बड़न को चाहिये,दूसरा:-नेकी कर दरिया मे डाल।बाकी आपने मुद्दा सही उठाया है ये शायद ब्लाग जगत की बडी समस्याओं मे से एक है।

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  18. रचना सदोष हो और आलोचना तर्कपूर्ण तो उसपर ध्यान देना चाहिए |
    मैं तो यही कहूंगा कि ब्लॉग जगत में प्रिय लोग इस कोण से सुभेच्छु
    कम हैं परन्तु अगर हैं तो उनको और भी प्रिय बनाना चाहिए | आभार !

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  19. ' शुभेच्छु ' पढ़ा जाय टीप में ! क्षमा !

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