सोमवार, 19 अप्रैल 2010

उठाया मैंने कदम 'संशयवाद' से 'आस्था' की ओर . . . . . . मेरे इस नये-नवेले धर्म में आपका भी स्वागत है !!!

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मेरे संशयवादी व नास्तिक मित्रों,



हैरानी जरूर हो रही होगी आपको...


क्या करता मैं बेचारा ?


चारों तरफ तो धर्म का ही बोलबाला है।


धर्म का महातम्य इतना है...


यह जिन्दा रहने के लिये आवश्यक है!


अब मैंने भी खूब सोच-समझ कर


सभी धर्मों का अध्ययन कर


अच्छे बुरे का पूरा-पूरा हिसाब कर


अपना 'इहलोक' व 'परलोक' दोनों सुधारने को


एक नये धर्म का अनुयायी बनना स्वीकार किया है


मेरे इस नये धर्म में आपका भी स्वागत है !








अन्य सभी धर्मों की तरह

मेरा यह नया धर्म भी

तर्क (Logic) व विश्वास (Faith)

पर आधारित है ।






तो मित्रों स्वागत है!







अदॄश्य गुलाबी

UNICORN (एकश्रृंगी) के

पवित्र धर्म में, जो सभी

अन्य धर्मों की तरह ही

पूरी तरह तर्क व विश्वास

पर आधारित है । 'वह'

'गुलाबी एकश्रृंगी' है,

ऐसा हमारा अटूट

विश्वास है जिस पर कोई

सवाल हमें स्वीकार नहीं !

तथा तर्क के अनुसार हम

यह भी जानते हैं कि 'वह'

अदॄश्य है क्योंकि हम

'उसे' देख नहीं सकते।





हा हा हा,



बुरा न मानियेगा, कहीं अपने-अपने धर्म में आपका

विश्वास मेरे जैसा ही तो नहीं है...

पूछिये खुद से...

ईमानदारी के साथ !










किसी अनजान लेखक का यह उद्धरण इस पोस्ट का आधार बना...

"Like all religions, the Holy Religion of the Invisible Pink Unicorn is based upon both Logic and Faith. We have Faith that She is Pink; and we Logically know that She is Invisible, because we can't see Her."







ईश्वर और धर्म को समझने का प्रयास करती इस लेखमाला के अब तक के आलेख हैं:-

जानिये होंगे कितने फैसले,और कितनी बार कयामत होगी?

पड़ोसी की बीबी, बच्चा और धर्म की श्रेष्ठता...

ईश्वर है या नहीं, आओ दाँव लगायें...

क्या वह वाकई पूजा का हकदार है...

एक कुटिल(evil) ईश्वर को क्यों माना जाये...

यह कौन रचनाकार है ?...



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13 टिप्‍पणियां:

  1. लेकिन इसके बारे में किस पुस्‍तक में लिखा है ??

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    आदरणीय संगीता जी,

    अभी तो नया नया धर्म है यह...
    पुस्तकें अब लिखीं जायेंगी ।
    यदि योगदान करना चाहें तो स्वागत है!

    ...... :)
    आभार!

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  3. इस धर्म की काव्य कथा लिखने का ठेका मुझे दे दिजिये, प्लीज़!! :)

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  4. गुलाबी एक श्रृंगी ऋषि -इनका जन्म जबलपुर जल प्रपात से सटे एक खोह में हुआ था और यही इस धर्म के प्रवर्तक कहलाये -जाहिर है इस धर्म का प्रथमोपदेश प्रवीण नाम्नी एक घुमक्कड़ को हुआ जो कुछ जबलपुरियों के साथ इसे देश देशांतर में ले गयी -इस समय यह कनाडा में संगठित धर्म का रूप ले चुका है (विकीपीडिया प्रक्षेप !)

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    @ Udan Tashtari,

    ब्लॉगवुड के 'आदि-पुरूष' की इस विनम्रता पर कौन न बलिहारी जाये ।

    वैसे पक्की खबर है कि "Holy Religion of The Invisible Pink Unicorn" की प्रथम ऋचायें इन्ही 'आदि पुरूष' को 'उड़न तश्तरी' पर आकाश भ्रमण के दौरान व्योम में तैरती मिली थी... शीघ्र ही जनसामान्य के लाभ के लिये उनको काव्य रूप में लेकर आ रहे हैं।

    धन्य हैं इस महान धर्म के मानने वाले हम सभी !

    . . . :)

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    @ आदरणीय अरविन्द मिश्र जी,

    मैं तो "Holy Religion of The Invisible Pink Unicorn" का एकदम नया Follower (अनुयायी) हूँ अत: गुलाबी एक श्रृंगी ऋषि " के विषय में अभी ज्यादा ज्ञान नहीं है परंतु कुछ ज्ञानी यह जरूर कहते हैं कि 'वह' जन्मे नहीं अपितु सदा से ऐसे ही हैं यानी 'गुलाबी एक श्रृंगी परंतु अदॄश्य'...

    कुछ और ज्ञानवर्धन करें तो आभारी रहूंगा!

    . . . :)

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  7. आपका ई मेल पता नहीं मालूम है इसलिए यहां पर सूचित कर रहा हूं।
    बेधर्मियों का एक धर्म नया चलाना चाहिए। जिसमें सिर्फ कलमकार ही शामिल हों। वैसे हिन्‍दी ब्‍लॉग धर्म भी बुरा नहीं है। इसे अलग से चलाना भी नहीं होगा। खुद ही चल रहा है। बस थोड़ा गति तेज करनी होगी।
    एक अनुरोध भी है आपसे

    परिकल्‍पना ब्‍लॉगोत्‍सव 2010 में शामिल होने के लिए अपनी सर्वोत्‍तम रचना श्री रवीन्‍द्र प्रभात जी को ravindra.prabhat@gmail.com बेभूले अवश्‍य भेज दीजिए। समय मिलने पर इस लिंक के पहले और बाद की पोस्‍टें भी अवश्‍य देखिएगा http://utsav.parikalpnaa.com/search/label/%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%97%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B5-2010?updated-max=2010-04-17T12%3A04%3A00%2B05%3A30&max-results=20 सादर/सस्‍नेह

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  8. आदरणीय प्रवीण शाह जी ,
    आपने बड़े होने के नाते मेरे ब्लॉग पे कुछ सलाह दी थी,आपका मेल एड्रेस नहीं मालूम है इसलिए माफ़ी चाहते हुए यहाँ ही आपसे प्रति प्रश्न करना चाहुंगा की, अन्य वर्गों की प्रशंसा करते हुए हिन्दू को भला बुरा कहने से क्या कोई धर्मनिरपेक्षवादी हो जाता है, ईश्वर या धर्म से तटसत्ता दिखाकर ही क्या कोई आधुनिकतावादी कहला सकता है. बड़ा आसान है किसी को कुछ भी उपदेश दे देना - "पर उपदेश कुशल बहुतेरे" लेकिन आप ही से पूछना चाहुंगा की आप ही के घर के किसी सदस्य के लिए कोई बकवाद फैलेगा तो क्या आप इसी प्रकार शांति से बैठे रहेंगे ? शायद नहीं.
    एक बार फिर आपसे माफ़ी चाहता हूँ , की मेरे शब्दों से आपको तकलीफ हुई है, तो मुझे अपना ही समझ कर माफ़ करेंगे . क्योंकि ये मेरे मन का गुब्बार है जो हमेशा अपने किसी बुजुर्ग के सामने ही निकला है अब तक. क्योंकि बुजुर्गों ने ही मेरी बात को जैसा मैं कहना चाहता हूँ वैसा ही समझा है कोई दूसरा मतलब नहीं निकला है.
    आपका
    अमित शर्मा

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  9. मेरा धर्म तो तर्क की बहुत इजाजत देता है। और उसमें मेरी श्रद्धा भी यदा कदा ही डगमगाती है - वह भी तब जब मैं कमजोर होता हूं।

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  10. लीजिये हम आज आ ही गए आप के मन की दुनिया में क्यूँ कि आप सचमुच एक सुलझे हुए इंसान हैं .

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  11. वाह जी मुसलमान लिखे बेशक हिन्दू सद्गुणों की खान है महान राष्‍ट्रवादी साधुवादी महान हिन्‍दू चिन्‍तक कहे वेद-पुराण-कुरान ...... "सभी धार्मिक किताबों" में कई बाते अप्रासंगिक हैं, बकवास हैं…। कोई इस से पूछे वेदों में क्‍या बकवास है?

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