गुरुवार, 4 मार्च 2010

जो खुद ही भूखा है वह किसी को क्या दे सकता है ?

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मेरे AGNOSTIC मित्रों,


पिछली पोस्ट से अब बात आगे बढ़ाता हूँ...


धर्म चाहे कोई भी हो... एक समानता है सभी में...वह यह है कि प्रार्थना करो ईश्वर की...पूजा करो...इबादत करो...नियम से और रोजाना... इस प्रार्थना के दौरान माफी मांगो उन गुनाहों की जो तुम करते हो रोजाना...या जो तुमने पहले कभी किये हैं...धन्यवाद दो उसको कि उसने तुम्हें पैदा किया... या यह दुनिया दी जीने के लिये...और बदले में वह तुमको देगा स्वर्ग या जन्नत या Heaven...


अब सवाल जो उठते हैं वो ये हैं...


*** क्या इतना आत्म मुग्ध है वो... कि आप घूस लो, मिलावट करो, शोषण करो, चोरी करो... तमाम दुनिया के गलत काम करो... पर रोजाना नियम से उसका ईगो मसाज कर दो... और वह आपके साथ हो जायेगा... कैसा है रे यह ईश्वर ?


*** ईश्वर नाम की यह ताकत कैसी है जो अपनी प्रशंसा, अपनी इबादत या पूजा, अपने प्रति प्रेम की इतनी भूखी है... क्या यह सही नहीं कि कोई ताकतवर आदमी भी अपने नीचे काम करने वाले कारिंदों से अपनी पूजा करने को कहता... तो हमीं कहते, बौरा गया है यह तो... फिर जो प्रशंसा, पूजा और स्वयं के प्रति प्रेम का इतना भूखा है... वह भूखा क्या किसी को कुछ दे सकता है ?


अगली पोस्ट में देखेंगे कि कौन जायेगा स्वर्ग और किसे नसीब होगा नर्क... और क्या वो हमेशा वहीं रहेंगे ?





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8 टिप्‍पणियां:

  1. क्या इतना आत्म मुग्ध है वो... कि आप घूस लो, मिलावट करो, शोषण करो, चोरी करो... तमाम दुनिया के गलत काम करो... पर रोजाना नियम से उसका ईगो मसाज कर दो... और वह आपके साथ हो जायेगा... कैसा है रे यह ईश्वर ?
    यह हमारा भ्रम है .. भूल चूक में की गयी गल्‍ती माफ हो सकती है .. जानबूझकर लगातार की जानेवाली गल्‍ती कैसे माफ हो सकती है ??

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. प्रवीण जी, दोष ईश्वर का नहीं, इंसान का है ! इस कुटिल, स्वार्थी इन्सान ने अपने और सिर्फ अपने लाभ के लिए इस धरा की हर वस्तु, प्राणी का उपयोग किया ! वस्तु की बात ठीक है मगर प्राणी खुद ही गड्डे में जाए तो कोई क्या कर सकता है? एक बात और कि इस कुटिल इन्सान ने अपने फायदे के लिए बचपन से ही बच्चे के दिमाग में जहर भर दिया ! श्री पुन्य प्रशुन बाजपाई का कल एक लेख पढ़ा था, उसका कुछ अंश यहाँ उद्घृत कर रहा हूँ......... "किताब प्रेबिंग द जेहादी माइंटसेट में अल-कायदा या तालिबान को लेकर इन युवा आंतकवादियों का क्या मानना है, वह गौरतलब है। इनमें कोई नहीं मानता कि ओसामा बिन लादेन ने 9-11 किया । 65 फीसदी कहते हैं कि हम जानते नहीं। तो 35 फीसदी कहते है बिलकुल नहीं। लादेन के पीछे तालिबान को भी 65 फिसदी सही ठहराते है। और 79.3 फीसदी की राय तो यही है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला इस्लाम को खत्म करने के लिये किया ।............"

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  4. यह भगवन किसी लोकल दादा या गुंडे से ज्यादा परिवक्व दिमाग वाला नहीं लगता. इस हद तक हीनभावना की जो बिना सलाम किये आगे बढ़ जाये उसपर मुसीबतों का सैलाब उड़ेल दे? ऐसे ठसों को सुधारना असंभव है.

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  5. प्रवीण भाई,
    इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है...अगर कोई अपराध करता रहता है और साथ ही ऊपर वाले को मस्का लगाता रहता है तो उससे बड़ा कपटी और कोई नहीं हो सकता...क्योंकि वो इंसानों के साथ साथ भगवान की आंखों में धूल झोंकना चाहता है...

    हां अगर कोई इस मंशा से अपने ईष्ट की प्रार्थना करता है कि वो उसे नेक राह पर चलाता रहे और बुराई की ओर न बढ़ने दे तो वो सच्ची इबादत है...हां, अगर जाने-अनजाने आप से कोई गलत काम हुआ है और सच्चे मन से पछतावा है तो उसके लिए ईश्वर से माफ़ी मांगी जा सकती है, साथ ही ऐसी शक्ति देने की दुआ की जा सकती है कि फिर भूल कर भी जीवन में वैसा अपराध न करें...

    जय हिंद...

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  6. Ha Ha Ha...
    bahut hi interesting, aapne bahut achha likha hai...main bhi aise hi sochti hoon...kuch bhi karokitnebhi bure kaamkaro bas din mein paanch baar uske aage sajde mein gir jao...phir kahenge wo bahut dayawaan hai...are kaisa dayawaan jo itna self obesessed hai

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  7. सार्थक शीर्षक के साथ.... लेख बहुत अच्छा लगा...

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  8. यह परिभाषा तो खुदा की कम, हाई कमांड या पोलित ब्यूरो के चीफ की ज़्यादा लग रही है.

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