मंगलवार, 26 जनवरी 2010

अगली बार जब मिठाई खरीदें तो . . . . . . . . .प्रवीण शाह।

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मेरे जागरूक उपभोक्ता मित्रों,

आप मिठाई के शौकीन हों या न हों पर कभी न कभी हलवाई की दुकान पर मिठाई खरीदने जाना तो पड़ता ही है सभी को...

क्या आप जानते हैं कि लगभग सभी दुकानों पर आपसे छल किया जा रहा है। यकीन नहीं आता तो अगली बार जब मिठाई खरीदें तो विक्रेता को ध्यान से देखिये... आप कहेंगे कि आधा किलो फलानी मिठाई दीजिये... वह क्या करेगा कि आधा किलो लायक का गत्ते या मोटे कागज का दुकान का नाम छपा रंगीन और खूबसूरत डिब्बा उठायेगा...और बड़े करीने से उसका ढक्कन नीचे वाले हिस्से में फंसायेगा... इलेक्ट्रालिक वेइंग स्केल पर रखेगा... और कुल ५०० ग्राम आपको तोल कर दे देगा।

अब जरा सोचिये, डिब्बे का वजन कम से कम १०० ग्राम तो है ही... यदि आपने १०० रू० किलो रेट की मिठाई ली तो आपने वह डिब्बा खरीदा १० रू० का और यदि आपने ४०० रू० किलो के रेट वाली काजू बर्फी जैसी कोई मिठाई ली तो आपने वह डिब्बा खरीदा ४० रूपये में...जबकि उस डिब्बे की असली कीमत ४ रू० से ज्यादा नहीं है।

हर शहर और हर मिठाई की दुकान के यही हाल हैं...और इस तरीके का इस्तेमाल कर के हमारा मिठाई उद्योग हर साल अरबों रूपयों का चूना लगा रहा है उपभोक्ताओं को।

अब समाधान पर आयें, समाधान दो हैं...

पहला... उसे अपने ही तरीके से मिठाई तोलने दें... फिर कहें कि एक खाली डिब्बे को तोलो... जितना उसका वजन है उतनी मिठाई मेरे डिब्बे में और डालिये...कभी कभी ऐसा करने पर दुकानदार उग्र भी हो जाते हैं यदि आप किसी प्रकार के वाद विवाद या असहजता से बचना चाहते हैं तो फिर मेरा आजमाया हुआ दूसरा तरीका है...

मुसकुराते हुऐ उस से मिठाई का दाम पूछें... फिर मिठाई के खाली डिब्बे का दाम पूछें... फिर कहें कि इस डिब्बे में इतनी मात्रा में मिठाई दे दें... यदि ऐसा करने पर वह आपको मिठाई बेचने से मना करे...जिसकी संभावना कम ही है खास तौर पर अन्य ग्राहकों की मौजूदगी में... तो माप तोल विभाग या उपभोक्ता फोरम में शिकायत अवश्य करें... कम से कम इतने दिनों से लुटते आने पर यह तो आपका फर्ज बनता ही है।

10 टिप्‍पणियां:

  1. लाजवाब सुझाव हैं, कभी अल्‍लाह ने हिम्‍मत दी तो आजमालेंगे चाहे उस दिन हम मिठाई से महरूम रह जायें, धन्‍यवाद nice post

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  2. रोचक और उपयोगी जानकारी. धन्यवाद.
    ...जागो ग्राहक जागो...

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  3. भाई हम तो मिठाई डब्बे में लाते ही नहीं हैं। फिर कभी डब्बे में मिठाई तुलाई होती भी है तो तराजू में दूसरी ओर भी डब्बा रखा जाता है। आप भी आजमाइए इसे जो दुकानदार न दे उस की दुकान पर मत जाइए।

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  4. बहुत बढिया लगा, जानकारीं हमारे तक पहुचाने के लिए आभार ।

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  5. आपके उपाय से मिठाई दुकान में ठगे जाने से बचा जा सकता है .. उपभोक्‍ता फोरम भी इससे बचने का उपाय कर देगा .. पर नकली खोए या छेने को रोकने का भी उपाय सोंचे .. जो पैसों के साथ ही साथ स्‍वास्‍थ्‍य का भी नुकसान करती है !!

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  6. प्रवीण जी ...इस आलेख के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ....

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  7. भाई मैं तो खाली डिब्बे का पासंग लगा कर ही मिठाई लेता हूँ.. वैसे ज्यदातर दुकानदार मान जाते हैं जो १% नहीं मानते उन जैसे घी के लिए अंगुली टेडी कर देता हूँ और फिर वो भी मान जाते हैं... पुरानी बात बताई लेकिन अच्छी लगी कई लोगों के लिए नई है...
    जय हिंद...

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  8. लाजवाब। बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

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  9. मै दो साल पहले ही वीगन हो गया, अब मिठाई-चाय-काफी तो छूटी ही सिंथेटिक मिल्क और खोवे का भी कोई खतरा नहीं रहा. उसपर से वज़न और विकार भी संतुलित हो गए हैं.

    जितने पैसे मिठाइयों में खर्च करते हैं उतने के फल खरीद लिए जाएँ तो.........?

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  10. सही बात! यह जरूर देखा है कि विक्रेता के सामने अगर assertive हो कर कहा जाये तो अमूमन परिणाम बेहतर ही मिलता है।
    कोई स्तर का ग्राहक खोना नहीं चाहेगा।

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