रविवार, 3 जनवरी 2010

यह है "आज की नारी", आप कौन से जमाने में रहते हैं जनाब ?. . . . . . . . . . . . . . . .प्रवीण शाह।

.
.
.
मेरे नारी चिंतक मित्रों,

हमारे हिन्दी ब्लॉगजगत में कुछ भाई लोग अत्यन्त परेशान हैं आजकल नारी के भविष्य को लेकर, क्योंकि...

आज की नारी...

* भूल गई है आंचल और पायल को...
* पहनने लगी है अपनी पसंद के कपड़े...
* अपने ढंग से जीना चाहती है...
* भूल गई है प्राचीन काल से परिभाषित तथाकथित 'नारी की मर्यादा'...
* बच्चे पैदा करने और परिवार चलाने में ही अपना जीवन धन्य न मानकर अपने कैरियर के लिये भी सचेत हो गई है...
* हो गई है आर्थिक रूप से स्वतंत्र, अपनी इस स्वतंत्रता का महत्व जानती है और उसकी इज्जत करती है...
* अपनी खुद की राय रखने लगी है अपने आस-पास की घटनाओं और मुद्दों पर...
* जवाब देने लगी है 'नारी को क्या करना चाहिये और क्या नहीं' सिखाने वालों को...
* के पास आज बहुत से विकल्प हैं और वह इन विकल्पों का प्रयोग करती/करना चाहती है...

एक पोस्ट लगाई थी विश्व ने ,आपने देखी होगी,नहीं देखी तो यहां पर देखिये, मैं तो सहमत हूँ विश्व के बतलाये कारण से कि आखिर क्यों कुछ लोग नारी को अपना गुलाम बनाये रखना चाहते हैं।

पर आज की मेरी पोस्ट कतई इस मुद्दे पर नहीं, यह तो इस खबर को आपसे साझा करने के लिये है...

खबर है...

चेन्नई,३१ दिसम्बर,२००९.

फ्रंटियर लाईफ लाईन अस्पताल की मीडिया कोआर्डिनेटर श्रीमती प्रिया गोपाल ने एक प्रेस कान्फ्रेन्स में मीडिया को एक ब्रेन-डेड व्यक्ति के शरीर से अंग Harvest करने के बारे में जानकारी दी, डॉक्टरों की टीम ने शरीर से हृदय, गुर्दे और लिवर जरूरतमंद रोगियों के शरीर में प्रत्यारोपित करने के लिये सफलता पूर्वक निकाले।

मृतक स्वयं भी एक हृदय शल्यक था, जिसे अस्पताल में २६ दिसम्बर को भर्ती कराया गया था जब वह अपने तीसरी मंजिल के फ्लैट से गिर गया था, गिरने के दौरान उसके सिर में चोट आई थी, मृतक के १२ व ९ साल के दो बच्चे थे। उसकी पत्नी अस्पताल में इलाज के दौरान पूरे समय साथ रही।

३१ दिसम्बर को जब डॉक्टरों ने उसे मस्तिष्क-मृत घोषित किया तो उसकी पत्नी ने न केवल तुरंत organ transplants से संबंधित कानूनी कागजों पर हस्ताक्षर किये बल्कि स्वयं ही organ registry को संभावित अंग प्रदाता (prospective organ donor) के बारे में संदेश भी भेजा।

अभी तक इस खबर में कुछ विशेष नहीं लग रहा होगा आपको, खबर तब विशेष हो जाती है जब आपको पता चलेगा कि मरने वाले शख्स का नाम था डॉ० कृष्णगोपाल और वह प्रिया गोपाल के पति थे।

तो यह है आज की नारी, आप कौन से जमाने में रहते हैं जनाब ???

आप चाहें तो विस्तृत खबर यहाँ पर.. देख सकते हैं।




.
.
.

25 टिप्‍पणियां:

  1. प्रवीण भाई आप की यह पोस्ट देखकर मन हर्षित हुआ |
    मिथलेश दुबे और सलीम खान दोनों ही नारी की स्थिति को लेकर अतिपुरातन और कुतर्की ( एक अपने तर्कों को शास्त्र और दूसरा कुरान के दायरे में ही ढूंढता है ) है इसलिए इनकी आखें खोलने का प्रयास सफल होगा इसमें मुझे संदेह है | अब ये तर्क दे सकते हैं कि सावित्री और फातिमा के प्रयासों और बलिदानों के सामने इस प्रकार का दान कुछ भी नहीं है | :) :) :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. सार्थक शब्दों के साथ अच्छी चर्चा।

    उत्तर देंहटाएं
  3. मैं सोच रहा हूँ की डॉ० कृष्णगोपाल पति न होकर पुत्र होते तो भी क्या वे इतनी जल्दी अंग कर देती? क्या डॉ० कृष्णगोपाल के माता पिता यह निर्णय इतनी आसानी से ले पाते, अगर वे प्रिया गोपाल की जगह होते? बस यूँ ही मन में सवाल उठ रहा है. अगर वह प्रिया गोपाल का पुत्र होता तो शायद इतना आसान न होता.

    उत्तर देंहटाएं
  4. सही है!!



    ’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

    -त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    -सादर,
    समीर लाल ’समीर’

    उत्तर देंहटाएं
  5. ऐब इन्कांवेंती के धर्मसंकट का क्या जवाब दिया जाय-उन्होंने तो संवेदनाओं को झीझोंड दिया !

    उत्तर देंहटाएं
  6. अब पति और पुत्र को पलड़े में तौल कर यह फैसला करना होगा कि अंगदान करना है या नहीं?

    क्या टिप्पणीकारों ने तौल कर यह निष्कर्ष निकाला है कि पति-मृत्यु का दुख कम होता है जिसे सहकर अंग निकालना आसान है लेकिन पुत्र-मृत्यु के दुख में अंग नहीं दान किये जायेंगे?

    कुछ मुद्दों पर समझदार व्यक्तियों की भी जिद ठान जाते हैं कि अपनी अक्ल का इस्तेमाल नहीं करना है. यह भी ऐसा ही मामला है.

    जिनपे न गुजरी हो वो क्या जाने पीर पराई.

    डा. कृष्णगोपाल और डा. प्रिया गोपाल को सलाम.

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रिया गोपाल जी के जज़्बे और हिम्मत की दाद देनी चाहिये… वैसे कन्विनेंटी का सवाल भी बड़ा मुश्किल सा है…

    उत्तर देंहटाएं
  8. log dartey haen ki jagriti agar unake ghar tak aagayee to kyaa hogaa ??

    उत्तर देंहटाएं
  9. जिनपे न गुजरी हो वो क्या जाने पीर पराई.

    बस रचनाजी यही आप भी समझ जाएँ तो फिर क्या बात है. वैसे अनोनिमस बनकर एक कमेन्ट करती हैं, नाम के साथ दूसरा? क्या आपको शर्म आती है?

    क्या आपकी माताजी आपकी मौत (खुदा न खास्ता) पर आसानी से अंग दान कर सकेंगी? बस पीर पराई वाली बात है यहाँ भी

    उत्तर देंहटाएं
  10. i hv not commented as annymous so why shout at me
    check with the writer of the post from where the annonymous comment came how stupid of you and how shameless of you

    उत्तर देंहटाएं
  11. अरे... हर चीज पर विरोध...?? ये तो बहुत ही सकारात्मक सी बात थी। इसमें इस बात पर तर्क कि महिला अपने पति का अंगदान कर पायेगी पुत्र का नही कर पायेगी ?

    ये प्रश्न तो बड़ा अजीब सा है। नारी या पुरुष नही किसी के भी लिये।

    मुझे पता है कि मैं अगर कह दूँ कि मेरे लिये दोनो मुश्किल होगा तो जवाब में विवाद होगा कि आप के पास दोनो ही नही हैं।

    मैने तुरंत अपनी दीदी को फोन किया और पूँछा कि अगर ऐसी स्थिति आ जाये तो वो क्या करेंगी ? उनका जवाब था " जब हाथ काँपेगे तो दोनो के लिये और जब कलेजा मजबूत कर के ये काम करेंगे तो भी दोनो के लिये।"

    विवादित विषयों से बच के निकल जाना ही उचित समझती हूँ..मगर यहाँ तो किसी की प्रशंसा करने का विषय था। वो कोई पुरुष भी हो सकता था जो अपनी पत्नी या पुत्र का इस तरह अंगदान करता तो उसके लिये भी हम नतमस्तक होते।

    उस बहादुर महिला को नमन

    उत्तर देंहटाएं
  12. संतुलित दिमाग, मजबूत निर्णय क्षमता और सोच का विस्तृत दायरा ....ये सभी चीज़ें किसी इंसान को ऐसा कदम उठाने में मदद करती हैं!

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही हिम्मत है Dr.प्रिया गोपाल में जो ऐसा बड़ा और सरहनीय कदम उठा सकीं.
    उनके एक कदम ने कितनो को जीवन दान दे दिए.

    उत्तर देंहटाएं
  14. 'आज की नारी' विषय से हटकर-
    भारत जनसंख्या में चीन के बाद दूसरा देश है मगर अंग दान में अब भी यहाँ दानकर्ताओं की संख्या बहुत कम हैं.
    नेत्रदान की hi बात करें तो श्रीलंका जैसा छोटा देश इस मामले में अव्वल नंबर रखता है.
    क्या ज़रूरी नहीं की आज इस ओर भी लोगों को समझाने और आकर्षित /encourage करने की आवश्यकता है कि मरने के बाद उनका एक अंग किसी को जीवन दे सकता है?

    उत्तर देंहटाएं
  15. प्रवीण जी,
    बहुत ही सार्थक लेख...दरअसल आज की नारी बिलकुल ऐसी ही है..
    न एक सूत इधर न एक सूत उधर...
    पति हो या बेटा हो...जब खुद पर आती है तो मन को संयत करके हमेशा नारी ने फैसला किया है....करना ही होता है...इसमें इतना विवाद क्यूँ...??

    उत्तर देंहटाएं
  16. मैंने आखिर अपनी धर्मपत्नी और बेरी से यही सवाल पूंछा (चैरिटी बिगिन्स ईट होम )
    जवाब :दोनों के अंग दान किये जायेगें एक ही भावना से ,,बल्कि वे तो भाविक होकर यह कह बैठीं की वे खुद अपना अंगदान करना चाहती हैं!
    मैंने बात को हल्की की यह कहकर कि अंगदान स्वस्थ अंगों का होता है .....सादे गले का नहीं ! हा हा

    उत्तर देंहटाएं
  17. Yaha aaj ki naari ki baat honi chahiye ANGDAAN ki baat ko mudda bana lia gaya ha aisa lag raha ha mujhe...kyunki ye to matra ek udahran tha...chaliye me apni baat kahungi.. praveen ji jaane kyu mujhe aisa lagta ha ki GAREEBI,BEROZGARI,ATANKVAD,SAMPRADAYEVAD aur na jane kitne hi muddo ki tarha NAARI bhi ek mudda banke reh gyi ha....jaise log alag se DALITO,VIKLANGO,BESAHARA aadi k baare me dayabhav aur kuch alg hi soch rakhke baat karte ha vaise hi NAARI k baare me... jo log(blooging ki duniya me) ye baat karte ha ki vo bina pakshpaat kiye likhte ha NARI PURUSH ek saman ha vgera vgera unse mera yahi sawal hota ha ki aap purusho par aise hi kyu nhi likhte....kyu ajeeb lagega n...PURUSHO ko Mudda banake?
    nahi nhi me ye nhi chahti aisa ho...sirf itna kehna chahti hu ki NAARI ko VISHEY ya MUDDA banana kab chodenge ye log....
    ya to NAARI pe likhna band kare ya PURUSHO pe bhi saman likhe....nahi koi shart nhi rakh rahi hu...bas aisa sochti hu...manne wale to yaha ha nhi log..fir bhi koshish jaari rahegi...
    dhanyavaad

    उत्तर देंहटाएं
  18. यदि मेरे अंग किसी के काम आ सकें तो अवश्य दान करना चाहूँगी। पति(पुत्र नहीं हैं)या किसी अन्य के तभी दान कर सकती हूँ जब उन्होंने यह इच्छा दर्शाई हो।
    प्रिया गोपाल को मेरा सलाम।
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  19. One should unlearn in order to learn.
    ksham chaaunga angrezi ke liye, parantu mai kewal apne kaaryalaya se hi post kar paata hun kyunki mere paas ghar par net uplabdh nahi hai.
    praveen saahib , aap bahut achcha likhte hain. yahan mai yah baat kehna chaahunga ki yadi aap apne vivek se kaam lein to aap jaan jaayenge ki kyaa sahi hai aur kya galat.
    Aapki post tatha vishva bhaai ke post mein mujhe yeh baat atyant achchi lagi ki aap logo n ahankaari purusho ke mithya tarq , ki naari ki swatantrata ke kaaran hi yeh sab atyaachar waazib hain, ka purzor virodh kiya hai

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!