शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

आया जैसे ही नया साल, हम जा पहुंचे नैनीताल... आइये आप भी घूमिए मेरे साथ साथ . . . . . .

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मेरे आभासी मित्रों,
सोचा तो था, प्लान भी किया था और कमरा भी बुक था कि ३१ दिसम्बर की रात नैनीताल में बितायेंगे, पर उस दिन कुछ ऐसा फंसा कि जाना नहीं हो पाया। बहरहाल मैं हार मानने वालों में से नहीं, होम मिनिस्ट्री को मनाया, पहली तारीख की छुट्टी का जुगाड़ किया और १ जनवरी यानी नये साल के पहले दिन हम जा पहुंचे नैनीताल... जो देखा वह चित्रों के माध्यम से हाजिर है।


 
अरे बाप रे! कंक्रीट के इस जंगल में तो बहुत कुछ नया और पहले से और बड़ा, और ऊंचा उग आया है।


 

कैसे जायें मल्लीताल ? नाव ठीक रहेगी... यह अच्छी पहल है मोलभाव का झंझट खत्म, उम्मीद है कि यह रकम नाव वालों को ही मिलती होगी, बिचौलिये अपना पेट न भरते होंगे।


 

यह रही हमारी सवारी... नाम है सुदीक्षा डीलक्स... कैसी लगी आपको?


 

तो यह हैं जनाब कुन्दन सिंह हमारी नाव के खेवैय्या...



 

अब झील से नजारे देखिये यह रहा पाषाण देवी मंदिर...ठंडी सड़क पर...


 

बांये से दांये यह तीन मंदिर हैं क्रमश: शिव मंदिर, गोलू देवता (स्थानीय देवता) मंदिर व शनि मंदिर...


 

अरे बातों-बातों में मल्ली ताल आ गया देखिये नयनादेवी मंदिर और साथ में गुरुद्वारा सिंह सभा...


 

लीजिये नयनादेवी मंदिर के दर्शन कीजिये, नैनीताल शहर इन्ही देवी के नाम पर नैनीताल कहलाता है।


 

नयना देवी मंदिर परिसर से झील का नजारा... कैसा लगा आपको...


 

काफी चहल-पहल है बाजार में, हर कोई खुश-खुश और मस्त-मस्त, नये साल की खुमारी में...


 

कितने आदमी थे रे साम्भा ? सरकार, कारों से एक कम... तरक्की पर है हिन्दुस्तान...सहमत या नहीं...


 

भीड़ भड़क्का, धक्का-मुक्की... हर कोई क्या यहीं आ गया नये साल का जश्न मनाने...


 

यह बैंड स्टैंड आज वीरान है तकरीबन २५-२६ साल पहले तक रोजाना आजाद हिन्द फौज के बैंड मास्टर कैप्टन राम सिंह का आर्केस्ट्रा बजता था रोज यहाँ...


 

भारत रत्न और कुमांऊ केसरी 'पन्त'... आपको शत-शत नमन एक कृतज्ञ कुमांऊनी का...


 

यह क्या शाम होने को आयी....


 

और मौसम ने भी ले ली अंगड़ाई... (दिन भर खिली-खिली धूप थी अचानक बहुत ठंड लगने लगी)


 

अब तो घर लौट चलने की बेला आई....


 

नैनीताल की जामा मस्जिद की शान निराली है देखिये शाम को लिया यह चित्र...


 

मॉल रोड पर नये साल के स्वागत को की गई रोशनी का एक नजारा ऐसा भी...


 

कार में बैठा, फिर उतरा, एक बार और निहार लूं अपने शहर को... देखिये रात को तल्लीताल बस-अड्डे से ऐसा दिखता है मल्लीताल का नजारा...



सैर सपाटा खत्म, नये साल का जश्न खत्म...जिन्दगी की चक्की...और कभी उसमें पिसते, कभी उसको पीसते हम लोग... आपको एक बार दोबारा यह चक्की मुबारक... तो देर क्या ? लग जाइये पिसाई में

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपके इस पोस्ट ने हमें भी नैनीताल की सैर करवा दी!

    आप और आपके परिजनों के लिये नववर्ष मंगलमय हो!

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  2. बहुत खूब , यादे ताजा हो गई !आपको नववर्ष की ढेरो शुभकामनाये !

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  3. तस्वीरें और आपका प्रेजेंटेशन दोनों ही लाजवाब हैं. शुक्रिया

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  4. आपके साथ हम भी नैनिताल घूम लिए..बहुत आभार.

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  5. I LOVE THIS !! HAPPY NEW YEAR TO YOU AND YOUR FAMILY MAY ALL OF THEIR WISHES COME TRUE IN THIS NEW YEAR !!

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