गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

कौव्वों की बलि और उनके खून सनी 'सोने' की तलवार, दलितों के साथ भेदभाव और कंदास्वामी . . . (Past life regression) . . . . . . . . .प्रवीण शाह.

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मेरे जन्म जन्मांतर के मित्रों,

बहुत दिनों से सोच रहा था कि देखूंगा "राज पिछले जन्म का" पर समय नहीं मिल पा रहा था, कल देखा और जो देखा वह यह था:-

यह जनाब डॉ० संजय गायकवाड़ नाम से जाने जाते हैं इन्हें कौव्वों से बहुत डर लगता है, लगता है कि कौव्वे इनको परेशान कर रहे हैं और दूसरी शिकायत इनकी यह है कि जब भी यह किसी स्त्री के प्रति कोई अच्छा काम करते हैं वह इसे उल्टे रूप में लेती है, अर्थात जीवन में आई स्त्रियों को या तो जनाब समझ नहीं पाते या इनकी उनसे पटती नहीं।

अब डॉ० तृप्ति जैन के साथ सेशन शुरु होता है...

आज से ७००-८०० साल पहले मंगलौर के पास मंगला देवी के मंदिर में पुजारी हैं जनाब... नाम है 'कंदास्वामी'... विक्रमादित्य राजा है देश का... मंत्र पढ़ने में मन नहीं लगाते तो क्रोधी पिता( जो स्वयं भी पुजारी हैं। )श्राप देते हैं " जा तू अगले जनम में untouchable (दलित) बन जा!"... खैर इस श्राप को ज्यादा explore नहीं किया गया... मंदिर में ही एक और पुजारी है 'धुत'... वह कौव्वों की बलि देता है... क्योंकि कौव्वों का खून लगने से तलवार 'सोने' की हो जाती है... और 'सोने' की इस तलवार से शत्रुओं को आसानी से मारा जा सकता है... कंदास्वामी (डॉ० संजय गायकवाड़)चाह कर भी अपनी जान के डर से कौव्वों की हत्या को नहीं रोक पाते... एक दलित युवती भी है 'सुन्दरा'... जो कंदास्वामी के पूजा करते या मंत्रजाप करते समय आकर उनको परेशान करती है... दलितों का मंदिर के अंदर प्रवेश वर्जित है उस काल में... एक दिन 'धुत' सुन्दरा को कंदास्वामी के साथ मंदिर के अंदर देख लेता है...और इस अपराध की सजा के तौर पर कंदास्वामी को सुन्दरा को मार डालने को कहता है... कंदास्वामी के मना कर देने पर 'धुत' अपनी तलवार से सुन्दरा को मार देता है...

अब दो श्राप दिये जाते हैं:-
-सुन्दरा की बेबात हत्या किये जाने के कारण कंदास्वामी धुत को कौव्वा बन जाने का श्राप देते हैं।
-अपनी आंखों के सामने हत्या होती देख भी रोकने का प्रयत्न न करने के कारण 'सुन्दरा' कंदास्वामी (डॉ० संजय गायकवाड़) को श्राप देती है कि जब भी तुम किसी स्त्री के साथ कुछ अच्छा करोगे उसका उल्टा हो जायेगा या वह इसे उल्टे रूप में लेगी।

अब डॉ० तृप्ति जैन १-२-३ गिनती हैं और 'कंदास्वामी' ९० वर्ष के होकर एक गुफा में हैं जहाँ पर कौव्वा बना 'धुत' उन्हें परेशान कर रहा है।

सेशन खतम, अब Analysis होता है कि कौव्वा बना 'धुत' और वे कौव्वे जिनकी बलि होने को 'कंदास्वामी' नहीं रोक पाये... आज के डॉ० संजय गायकवाड़ के कौव्वों से डरने का कारण हैं और इसी तरह जीवन में आने वाली स्त्रियों से डॉ० संजय गायकवाड़ का Adjustment न हो पाने का कारण 'सुन्दरा' का वह श्राप है।

अंत में डॉ० तृप्ति जैन डॉ० संजय गायकवाड़ को इन घटनाओं के पिछले जन्म में घटने का हवाला देते हुऐ इस जन्म में उनसे प्रभावित न होने को कहती हैं और डॉ० संजय गायकवाड़ हाथ जोड़ कर उन सभी ज्ञात-अज्ञात आत्माओं से माफी मांगते हैं जिनके साथ पूर्व जन्म में उन्होने कुछ गलत किया था।


अब यहाँ देखिये क्या कहते हैं विशेषज्ञ इस शो के बारे में...

जयश्री रामदास, डीन, होमीभाभा सेन्टर फॉर साइन्स एजुकेशन...
“When India is trying to be scientific and development-oriented, a show like this is highly regressive, perpetuating superstition while playing on peoples’ vulnerabilities, So-called past life regression through hypnotism has been tested and debunked, and besides, it has dangers.From watching the show for fun, many will start believing it, and it may take hold of their lives, leading to trouble for them and their families.”

डॉ० युसुफ मैचेसवाला, मनोरोग विशेषज्ञ...
“Science has not been able to establish that we have a past life. Psychologists and psychiatrists do not accept it either,The concept of a past life is more of a cultural and religious belief. An unconscious mind can go to any limits. One’s thoughts could also be based on what’s read in history.”


सनत एडमारूकु, अध्यक्ष, रैशनलिस्ट सोसाइटी ऑफ इन्डिया...
In a country where many believe in reincarnation, academicians and rational thinkers feel that the show will reinforce such beliefs. “The show tries to prove to the gullible masses that all their physical and mental problems are derived from their past lives,”

पास्ट लाइफ रिग्रेशन के बारे में आप यहां पर और जानकारी पा सकते हैं।

पास्ट लाइफ रिग्रेशन के बारे में मैं सिर्फ यही कहूंगा कि...

Past-life regression practitioners use hypnosis and suggestion to promote recall in their patients, using a series of questions designed to elicit statements and memories about the past life's history and identity.

यहां पर ध्यान देने योग्य शब्द हैं hypnosis और suggestion, कुछ लोग hypnotizable व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं यही लोग सेशन के दौरान थेरेपिस्ट के दिये suggestion को मान लेते हैं और अपने व्यक्तिगत विश्वास और कल्पना के सहारे कहानी गढ़ने लगते हैं... और कंदास्वामी, धुत , सुन्दरा और कौव्वे जैसे चरित्र अनायास ही पैदा हो जाते हैं।

क्या ख्याल है आपका ?

चलते-चलते...

हाँ याद आया, मेरी पत्नी श्री भी छिपकलियों से जरूरत से ज्यादा ही डरती हैं, मुझे अखबार पड़ते हुऐ तो बिल्कुल भी नहीं देख सकती और टी० वी० पर किसी चैनल में शाहरूख खान के दर्शन हो रहे हों तो मजाल किसी की जो वहां से उनको एक पल भी हिला सके...

सोचिये दिमाग लगाईये ऐसी कोई कहानी बनाईये जो छिपकली, शाहरूख और अखबार से नफरत को पूर्वजन्म से जोड़ सके तो मैं भी पत्नी श्री से फोन करवाता हूँ "राज पिछले जन्म का" को...टी वी पर आना किसे खराब लगता है ?
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22 टिप्‍पणियां:

  1. विज्ञानं और पराविज्ञान की बहस पुरानी है . teleporting को एक खयाली पुलाव माना जाता था लेकिन ऑस्ट्रेलिया में एक प्रयोग में यह साबित हो चुका है .

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  2. Superb... I fully agree with you on this point that this type of programmes are nothing but a bullshit... and utter non-sense...

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    आदरणीय डॉ० महेश सिन्हा जी,

    आप शायद इस खबर की बात कर रहे हैं।

    पर देखिये...

    But for a human to be teleported, a machine would have to be built that could pinpoint and analyse the trillions and trillions of atoms that make up the human body.

    "I think teleporting of that kind is very, very far away," Dr Lam says. "We don't know how to do that with a single atom yet."

    Quantum teleporting is problematic for humans because the original is destroyed in the process of creating the replica.

    महज एक संभावना व्यक्त की गई है, यदि भविष्य में ऐसा होगा तो भारी भरकम विज्ञान आधारित यंत्रों द्वारा... न कि पराविज्ञान समर्थकों द्वारा वर्णित मंत्रों, यौगिक अथवा तान्त्रिक सिद्धियों (???) द्वारा...

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  4. इन प्रोग्राम्स पर इतना ध्यान जा रहा है - इसी में इनका बनाने वालों का ध्येय सिद्ध हो गया। अब चीज बुलशिट हो चाहे न हो! :-)

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  5. एक होती है डैमोक्रेसी-लोगों द्वारा लोगों के लिए लोगों का शोषण। एक होती है कौवाक्रेसी-कौवों द्वारा कौवों के लिए कौवों का शोषण। जब कौवा-कौवी राज़ी तो क्या करेंगे प्रवीणशाह जी।

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  6. प्रवीण जी !
    इसे आप बाजारीकरण के एक दुष्प्रभाव के तौर पर भी देख सकते है ! मगर सिर्फ हम कुढ़ते रह जाते है इनकी दुकाने तो धड़ल्ले से चल रही है ! चले वह अट्टर नॉनसेंस ही ये लोग प्रस्तुतु क्यों न करते हो ! दुकानदारी जोरशोर से चल रही है इनकी !

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  7. मे स्वामी परहंस योगानन्द जी का शिष्य हूँ,और मेने उनके द्वारा लिखी हुई पुस्तक योगी अम्रित कथा पड़ी है,और उस पुस्तक में वर्णण है,सबसे पहले गुरू बाबा जी ने अपने आप को योगानन्द जी के समक्ष ट्रान्सपोट किया था,और महेश जी आपने देख ही लिया आपके प्रमाण देने के बाद की टिप्प्णीयों को,हम भारतिय लोगो ने जिन बात की जड़े जमा रक्खी हैं,वोह उन्ही को जमाये रखेगें,आप लाख प्रमाण भी दे दें, वोह नहीं मानेगें।
    हाँ जिन्होने इन बातों को अनुभव किया है,वोह इन्कार नहीं कर सकता ।

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    @ vinay,

    "Autobiography of a Yogi" लगभग सभी ने पढ़ी होगी, यहां पर प्रश्न यह है कि Teleporting का वर्णन तो बहुत मिलता है पर दुनिया के सामने आज तक एक भी साधक आया नहीं इसे दिखाने या साबित करने... अब अगर विश्वास की ही बात करेंगे तो जरा एक नजर यहां डालिये... आज भी दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि पृथ्वी गोल नहीं अपितु FLAT है... आप भी इसी तरह अपने विश्वास बनाये रखने के लिये स्वतंत्र हैं।

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  9. प्रवीण जी,
    द फ़्लैट अर्थ सोसायटी की लिंक पर जाकर देखा ! विश्वास नहीं हुआ कि आज भी ऐसे लोग है , आधुनिक तकनीक (इन्टरनेट) का ऐसा दुरुपयोग ! उनके तर्कों को पढ़कर सिर्फ सर पीटने की इच्छा हुयी ! सारा विज्ञान गया तेल लेने, अपने कुतर्को को सही साबित करने के लिए क्या क्या नहीं गढ़ लेते है ये लोग !
    अबा लगा रहा है कि आधिनिक तकनीक का उपयोग कम दुरुपयोग ज्यादा होगा ! इन्टरनेट/टीवी विज्ञान का कम , अंध विश्वास का प्रसार ज्यादा कर रहा है ! प्राचीन समय में ज्ञान प्रसार को सिमित किया जाना अब सही लग रहा है !

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  10. प्रवीण जी, बहुत अच्छी चर्चा चली है।
    और हाँ, आपकी कहानी पता चले, तो पढवाइएगा जरूर। हो सकता है कि उसी के बल पर आपका भी शो में सेलेक्शन हो जाए।

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  11. प्रवीण जी,
    द फ़्लैट अर्थ सोसायटी की लिंक पर जाकर देखा ! विश्वास नहीं हुआ कि आज भी ऐसे लोग है , आधुनिक तकनीक (इन्टरनेट) का ऐसा दुरुपयोग ! उनके तर्कों को पढ़कर सिर्फ सर पीटने की इच्छा हुयी

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  12. ... लेख व टिप्पणियों को पढकर तनिक-तनिक आनंद की अनुभूति हुई !! ... बेकार के मुद्दे - बेकार की बहस ... जिसको मानना है मानेगा - जिसको नही मानना है नही मानेगा !!!!

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  13. बेहतर...
    सही सरोकारों को प्रस्तुत कर रहे हैं आप...

    अच्छा लगा...
    आभार...

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  14. लिखते रहो भाई. सोचकर लिकने वालों की बड़ी ज़रुरत है दुनिया को. यह कार्यक्रम अगर एक चुटकुला भी है तो बेहद फूहड़.

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  15. We have an anti superstition law.This law bans any activity which spreads/sponsors/advertise superstition.
    Yet i see each and every of our TV channels, News papers not following this law.
    I wish somebody file a petition against it( I don't have time,because i devout my time to another cause)

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  16. बहुत सार्थक काम कर रहे हैं आप..

    ये चैनल इस तरह के कार्यक्रमों से अपनी जेबें तो भर ले रहे हैं, लेकिन आम जनमानस पर इसके दूरगामी परिणाम कौन बतायेगा!

    ज्ञान जी से सहमत हूँ..उनका उद्देश्य है बिकना, आलोचना भी तो उनका पर्पज सॉल्व कर रही है...

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  17. mujhe abhi abhi apne poorva janm ka bodh hua hai.
    mai sabse pehle akbar tha, phir tipu sultan , phir laxmi bai, phir Ambedkar, aur ab adna sa sachin.
    Please mai sabhi poorva janm mein vishwaas rakhne waale logo se appeal karta hun ki mujhe mera adhikaar dilaane mein madad karein.
    Meri Bhaarat sarkaar se nimnlikhit maange hain:
    1.Nariman point mumbai ya hauz khas delhi mein bungalow
    2.ek crore rupee mahina
    3.ek ferrari
    4.ek chopper
    Waise iss desh ke itihaas mein mere yogdaan ko dhyaan mein rakhte hue to har dimand jaayaz hai parantu mai santoshi vyakti hone ke naate Bas mai itne ki hi demand karunga
    @mahesh, vinay
    mujhe ummid hai aap mujhe mera adhikaar dilaane ke liye bhaarat sarkaar ke samaksh dharna pradarshan mein avashya madad karenge

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  18. यह कार्यक्रम यहाँ अबूधाबी में Telecast नहीं होता है.सिर्फ प्रोमो आता रहता है.एक दो अन्य पोस्ट भी इसी कार्यक्रम के विषय में पढ़ी थी जिनसे यही लगता है की यह कार्यक्रम बनावटी है...मेरी एक सहेली है मेंगलोर से ..फोने पर कोवओ की बलि के सन्दर्भ में पूछा तो उस ने बताया की aisee कोई प्रथा कभी उस क्षेत्र में नहीं सुनी गयी...बाकी चेनलवाले जाने..कहानियाँ बनाई हुई भी लगती हैं. ऐसा भी पढ़ा है इस कार्यक्रम के बारे में...
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    Aap ki likhi yah baat bahut hi prabhaavi lagi--
    अच्छा ही बने रहने के चक्कर में न तो गलत चीजों का विरोध करते हैं न ही किसी ऐसे को समर्थन देते हैं जो विरोध कर रहा है.
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    नये साल की आप को भी शुभकामनाएँ.

    Abhaar

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  19. हा हा हा .. बहुत अच्छा लेख है .... सच में .... बहुत सही .. खासतौर से चलते चलते सेक्शन "राज पिछले जन्म का" को लेकर आपके और मेरे विचार मिलते हैं :)

    कमाल है ना...... एक साल बाद दिसंबर के महीने में ही मैंने भी इसी विषय पर लेख लिखा :)))))

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