मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

वेश्यावृति का कानूनीकरण ( Legalization of Prostitution ) और इस से उठते कुछ अहम् सवाल . . . . . . . . . .प्रवीण शाह

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मेरे कानून पालक मित्रों,

अभी हाल में माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान वेश्यावृति के बारे में सरकार को सलाह दी:-
" When you say it is the world's oldest profession and when you are not able to curb it by laws, why don't you legalize it?" इसके आगे माननीय न्यायालय द्वारा कहा गया " You can then monitor the trade, rehabilitate and provide medical aid to those involved." (स्रोत-PTI)


"TIMES OF INDIA" में अपने कॉलम 'LEGALLY SPEAKING' मे धनंजय महापात्र ने इस पर असहमति जताते हुऐ लिखा है कि २० साल पुराने सख्त कानून के बावजूद भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं आ पाई है तो क्यों न सरकार भ्रष्टाचार को कानूनी जामा पहना दे और सरकारी सेवकों द्वारा ली जाने वाली घूस या कमीशन की दरें निर्धारित कर दे।

अब इसी तर्क को आगे बड़ाते हुऐ क्या यह नहीं हो सकता कि:-

- पुलिस और प्रशासन के राजनीतिकरण के विरूद्ध कड़े नियमों के बावजूद अधिकतर अधिकारी किसी एक राजनीतिक दल विशेष की विचारधारा को बढ़ाते है, उसके नेताओं की चमचागिरी करते हैं तथा अपने फैसलों से उस राजनीतिक दल का हित साधते हैं,... तो क्यों न जनता के इन सेवकों को राजनीतिक दल का सदस्य बनने दिया जाये।
- दहेज विरोधी कानूनों के होने के बावजूद यह खुले आम मांगा और दिया जाता है... क्यों न इसका रेट फिक्स कर दिया जाये?
- साम्प्रदायिक मुद्दों पर वोट मांगने की मनाही के बावजूद खुलेआम ऐसा होता है... क्यों न इसको कानूनी जामा पहना कर राजनीतिक दलों को उनके द्वारा उठाये साम्प्रदायिक मुद्दों का एकाधिकार दे दिया जाये।
- सरकारी और सार्वजनिक भूमि के अतिक्रमण (encroachment)के विरुद्ध तमाम कानूनों के बाद भी यह खुलेआम होता है... अपनी कॉलोनी में ही देखिये स्वयं आप ने, आप के पड़ोसी या दोस्त ने नाली के ऊपर निर्माण किया हुआ होगा या फुटपाथ के ऊपर कब्जा कर जेनरेटर रखा होगा/ पार्किंग बनाई होगी... धर्मस्थलों के लिये तो जमीन खरीदना पाप समझा जाता है... आखिर सरकारी जमीन है किसलिये... तो क्यों न अतिक्रमण करना हमारे अधिकारों में शामिल कर दिया जाये।
- भीख मांगना अपराध है पर भीख खुलेआम मांगी और दी जाती है... क्यों न इसे कानूनी रूप देकर इसमें निवेश, कमाई और रोजगार के अवसर पैदा किये जायें।

ऐसे और भी तमाम विषय और मुद्दे है... जो अपने Legalization की बाट जोह रहे हैं... बस मेरे,आपके और हम सबके समर्थन की दरकार है!

तो क्या खयाल है आपका ???

16 टिप्‍पणियां:

  1. वेश्यावृति पर मुझे कुछ नहीं कहना उस पर मैं पहले अवध हो आऊँ तब कुछ कहूंगा, निम्‍न बातों पर मेरी सहमति है,
    1. पुलिस को राजनीतिक दल का सदस्य बनने दिया जाये।
    2. दहेज का रेट फिक्स कर दिया जाये?
    3. राजनीतिक दलों को उनके द्वारा उठाये साम्प्रदायिक मुद्दों का एकाधिकार दे दिया जाये।
    4. स्वअतिक्रमण करना हमारे अधिकारों में शामिल कर दिया जाये।
    5. भीख मांगना को कानूनी रूप देकर इसमें निवेश,कमाई और रोजगार के अवसर पैदा किये जायें।

    अवधिया चाचा
    जो कभी अवध न गया

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  2. आपकी बातो में दम है, साथ में यह भी जोडूंगा कि कल ये कहने लगे कि मनमोहन जी जो हालात बन रहे है उसमे इस देश को चलाने की हिम्मत नहीं दीख रही तो क्यों न इसे पूर्ण तौर पर इटली के अधीन कर दिया जाये ! हकीकत यह है कि हर कोई अपनी जिमेदारियां भूल चुका और सिर्फ अधिकार जाता रहा है ! आज जरुरत है एक क्रान्ति की जो इन्हें सबक सिखाकर एक नई दिशा प्रदान करे !

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  3. घूसखोरी भी लीगलाइज होने की दरकार है! :-)

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  4. सारे सरकारी नौकरों को कुछ समय के लिए तनख्वाह देनी बंद कर देनी चाहिए और सरकार ये देखे ये कैसे अपना घर चला रहे हैं .
    पुरानी कहानी है जितने मुलाजिम बढ़ाये गए उतना ही भ्रस्टाचार बढा ( विक्रमादित्य के ज़माने से) . हमारे यहाँ हल्ला ज्यादा होता है क्योंकि लोग बहुत हैं . अमेरिका में एक साल में जितने बैंक डूबे क्या हुआ ! अपने एक दो दूओब जायें तो पता चले .
    रही बात कानून की तो, मर्ज बढता ही गया ज्यों ज्यों ज्यों दवा की . सारे बकवास कानून जो अंग्रेजों ने गुलामों के लिए बनाये थे हटा लेने चाहिए .

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  5. अगर ऎसे ही हालात रहे तो देर सवेर ये सब भी देखने को मिल ही जाएगा......
    बहरहाल आपने बहुत ही अहम सवालों को उठाया है...जिनका जवाब शायद किसी के पास भी नहीं होगा ।

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  6. आपने सही कहा। दरअसल हर क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है।

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  7. बंधू आप लोग ये क्यों समझाते है की सभी सरकारी कर्मचारी एक से ही होते है . बहुत से ऐसे भी होते है जो घूस नहीं भी लेते और अपना काम ईमानदारी से करते है . और एक बात मैं बताना चाहूँगा की ये आप जैसे ही लोग होते है जो सरकारी कर्मचारी को घूस लेने के लिए प्रेरित करते है . मैंने बहुत बार ऐसा देखा है की लोग अपना पेपर वर्क सही से नहीं करते है और सरकारी कर्मचारियों को तोहमत देते है भाई कर्मचारी लोग भी नियम कायदों से बंधे होते है यदि आप अपना पेपर वर्क सही से नहीं करेंगे तो घूस तो देना ही पड़ेगा न . पहले आप खुद सुधारिए फिर दुसरे को कहिये.
    यह तो थी पहली बात अप बात दहेज़ की कर ली जाए तो bandhu यह हम और हमारा समाज ही होता है जो इसे बढावा देता है समाज में जिसे जितना दहेज़ मिलता है उसे उतनी ही प्रतिष्ठा मिलती है दहेज़ भी status सिम्बल बन गया है जिसे ज्यादा मिलेगा वोह उतना ही प्रतिष्ठित मन जाता है . कोई अगर intercast शादी करन चाहे तो यह समाज ही होता है जो प्रीमियो की रह में रोड़े लगता है अगर इसे स्वीकृति दे दी जाये तो समाज से दहेज़ उंच नीच सभी दूर हो जायेगा

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  8. एक शानदार तर्क देखें जो माल्या भक्तों ने दिया था. जहरीली शराब पीने से लोग मर गए अतः शराब पर से पाबन्दी हटा लें.

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  9. यार अगर वैज्ञानिक लोगो की बात माने तो खाने में भी जहर है बहुत सारे मीडिया हाउस इसे दिखा रहे है तो क्या आपने हमने खाना छोड़ दिया क्या. भाई आप लोग इतनी सी बात क्यों नहीं समझते की नगर वधु भी हमारे समाज का हिस्सा है चाहे हम स्वीकार करे चाहे न पर यह तो सही है वोह हमारे समाज में एक safety वाल्व का काम करती है यदि उनके अधिकार उन्हें मिल जाए अगर शोसन से उन्हें मुक्ति मिल जाए तो समाज को क्या परेशानी होगी .कुछ महिलाये क्यों इतनी हाय तौबा मच रही है मेरी समझ में नहीं आ रहा है मेरे ख्याल से शायद उनको खुद पर या अपने प्यार पर इतना भरोसा नहीं है की वो अपने पतियों के पैर बहकने से रोके . यदि खुद पर भरोसा है तो फिर क्या परेशानी है की कोई महिला अपनी जिंदगी कानून की हद में आकर बसर करना चाहती है देह व्यापर एक प्राचीन व्यापार है जिसे समाज में स्वीकृति प्राप्त थी संघमित्रा एक बहुत नामी नगर वधु थी . और भाई जिस समाज में आजकल लिव इन relation का चक्कर चल गया हो वहां इन बातो के बारे में बात करना कहाँ तक सही है. आप विस्वास कीजिये की मैंने यहाँ बंगलोर में ऐसे बहुत से स्टुडेंट्स को देखा है जो यहाँ म बी अ करने आते है और लिव-इन में रहते है देखिये इनके घर वाले सोचते है की हमारे कर्णधार पढाई कर रहे है पर वोह तो यहाँ कुछ और कर रहे है क्या लिव-इन relation जायज है आज यह इनके साथ रहते है कल कोई दूसरा चुन लेंगे फिर परसों कोई तीसरा यही चलता रहता है क्या यह सही है यदि हाँ तो देह व्यापर भी सही है ये हमारे समाज का कटु सत्य है इसे स्वीकार करना चाहिए . तभी एड्स जैसी महामारी को दूर किया जा सकता है .शोसन से इन्हें मुक्ति दिलाई जा सकती है. बहुत से लेखक जब समाचार में कॉल गर्ल को पकडे जाने की न्यूज़ देखते है तो एक झलक देखने को बेक़रार हो जाते है रस ले ले कर किस्स्से सुनते है. यह दोहरा चरित्र क्यों है

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  10. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  11. रोहित का कहना सही है . हम आँखें बंद कर लेते हैं उस तरफ जिधर हम देखना नहीं चाहते . हर चीज को क़ानून के हवाले करने से समस्या हल नहीं होती . आज ही अखबार में एक लेख था भारतीयों की अनुसाशनहीनता के बारे में
    यह एक सामाजिक स्तिथि है और यह क्यों बनी? काल और समय के साथ कारण बदल जाते हैं .

    बुद्ध के समय की एक कथा है . बुद्ध घूमते हुए एक स्थान पहुंचे तो वहां की नगर वधु उनके दर्शन करने आई . यह देखकर उनके एक परम शिष्य को धक्का लगा . उसने बुद्ध से कहा आप उससे कैसे मिल लिए . बुद्ध ने मुस्कुराते हुआ कहा उसने तो इस स्तिथि में भी एक अच्छा कार्य करने की सोची लेकिन तुम अपनी सोच को तो देखो .

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  12. यह क्या बात हुई? अगर सरकार चोरी, ह्त्या, बलात्कार, जाली नोट और आतंकवाद आदि को रोकने में अक्षम रहे तो क्या वह इन अपराधों को भी राष्ट्रीय कर्तव्य घोषित कर दे?

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