बुधवार, 30 दिसंबर 2009

चुल-बुल, बुल-बुल... बुल-बुल, चुल-बुल . . . . . . . . . . प्रवीण शाह.

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गुजर रहा था शहर के एक पुराने मौहल्ले से, देखा एक जगह गली सजी है... बहुत से फूल बिखरे हैं...रात बारात आई थी यहां... सुबह शायद किसी बिटिया की विदाई हुई है... अचानक नजर पड़ी एक किनारे पड़े मुड़े-तुड़े कागज पर...कोई खत सा लगता था...उत्सुकता बढ़ी... चुपके से उठाकर जेब में रख लाया साथ... अब खोला है... एक चिठ्ठी सी है... शायद पिता ने लिखी है अपनी बिटिया को देने के लिये... बेचारा बाप... देने की हिम्मत कर न सका... अब आप बांचिये इसे, मेरे साथ साथ...




चुल-बुल, बुल-बुल
अपने अब हो गये पराये
चल दी आज तू दूजे कुल


बुल-बुल, चुल-बुल
फिक्र यहां की करना मत
रहना सब से मिल-जुल


चुल-बुल, बुल-बुल
चीनी जैसे पानी में
जाना वहां तू सबमें घुल


बुल-बुल, चुल-बुल
गलत बात गर करे जो कोई
डरना मत तू बिल-कुल


चुल-बुल, बुल-बुल
न्याय पक्ष पर अड़ जाना
तनिक न करना ढुल-मुल


बुल-बुल, चुल-बुल
झूठे को होगा पछताना
जब जायेगा भेद खुल


चुल-बुल, बुल-बुल
बाप तेरा आज रोया नहीं
गई पसीने से लिखाई धुल


बुल-बुल, चुल-बुल
जाकर तूने है बनाना बिटिया
रिश्तों का एक नया पुल



चुल-बुल, बुल-बुल
बुल-बुल, चुल-बुल
चुल-बुल, बुल-बुल
बुल-बुल, चुल-बुल......



...

13 टिप्‍पणियां:

  1. चुल-बुल, बुल-बुल
    चीनी जैसे पानी में
    जाना वहां तू सबमें घुल

    Badhiya bhav ..ek marmik geet..dhanywaad ji

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  2. बहुत भावप्रद रचना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  3. प्रवीण जी...बाबुल के स्नेह की मासूम अभिव्यक्ति...
    सुन्दर...
    शुभकामनाएँ..

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  4. सादर वन्दे
    इतना मनोहारी वर्णन की क्या कहें!
    रत्नेश त्रिपाठी

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  5. वाह ! अदभुत !

    गजब की सिखायी-पढ़ाई ! रम्य-रचना ।

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  6. एक बाप की भावना उमेड़ दी आपने!!


    मुझसे किसी ने पूछा
    तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
    तुम्हें क्या मिलता है..
    मैंने हंस कर कहा:
    देना लेना तो व्यापार है..
    जो देकर कुछ न मांगे
    वो ही तो प्यार हैं.


    नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  7. चुल-बुल, बुल-बुल
    बाप तेरा है रोया नहीं
    पसीने से गई लिखाई धुल

    बुल-बुल, चुल-बुल
    जाकर तूने है बनाना बिटिया
    रिशतों का एक नया पुल

    मर्म के साथ निशब्द कर देने वाले उद्गार...आभाग

    नया साल आप और आपके परिवार के लिए असीम खुशियां लेकर आए...

    जय हिंद...

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  8. बहुत खूब, लाजबाब ! नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !

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  9. चुल-बुल, बुल-बुल के बाप की कल्पना कर रहा हूं।
    शायद मेरे सा हो!

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  10. सुंदर सहज कविता । नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !

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  11. satish ji ki post par apke rev.ke sath ye link dekh kar bina padhe raha nahi gaya. bahut samvedansheel rachna. badhayi.

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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