रविवार, 6 दिसंबर 2009

आज छह दिसंबर है, प्रार्थना फल देती है तो ठीक,... वरना आईये मिलकर छलांग लगाते हैं . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .प्रवीण शाह.

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मेरे न्यायप्रिय मित्रों,

आज छह दिसंबर है, अलग अलग लोगों के लिये अलग अलग मायने हैं इसके... मेरे लिये यह दिन हमारे पूरे तंत्र की विफलता का दिन है... क्योंकि अयोध्या में जो विवाद है वह हमारी अदालतों में एक 'सिविल डिस्प्यूट' के तौर पर दर्ज है जिसमें अदालत ने केवल यह निर्णय देना है कि विवादास्पद प्रॉपर्टी पर TITLE यानी हक किसका है।

यह हमारा देश है, हमने खुद अपना संविधान बनाया है, हमारे चुने हुऐ प्रतिनिधियों ने संसद में बैठकर संविधान के अनुसार कानून बनाये हैं, हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है, आज तक न्याय पालिका ने हमें निराश नहीं किया कभी...

आज फिर छह दिसंबर है, आइये मिलकर प्रार्थना करें कि हमको, हमारे तंत्र को इतना साहस और इच्छा-शक्ति मिले कि न्यायपालिका से इस मामले को जल्द से जल्द निस्तारित करवा कर फैसले को अमल करा सकें... आखिर कब तक ऐसे ही SUSPENDED ANIMATION में रहेगा यह देश ?.... और क्यों रहे... क्या हम अपने ही देश में अपने ही कानून का पालन करने-करवाने में असमर्थ हैं ?...

अगर सचमुच ऐसा है तो आईये सभी लोग चुल्लू भर पानी में सामूहिक छलांग लगाते हैं...

तैयार हैं आप ?

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9 टिप्‍पणियां:

  1. चुल्लु भर पानी भी ज्यादा ही समझो!!

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  2. आस्था का सवाल न्यायालय को हल करना हो तो देर होगी ही!

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  3. चुल्लू भर पानी में हम क्यों कूदें? बल्कि जो इस दुर्गति के जिम्मेदार हैं क्यों न उनकी गरदन पकड़कर उनकी मुण्डी इसमें डुबायें… क्योंकि वे लोग इसमें खुद तो डूबने से रहे…

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  4. आज छह दिसंबर है, प्रार्थना फल देती है ... देखता हूं एक प्रर्थना कर के -- इतनी शक्ति हमे देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर होना।
    हर तरफ जुल्म हे बेबसी है,
    सहमा सहमा सा हर आदमी है।
    ..
    है अंधेरा घना छा रहा..

    ... मैं पूरी प्रर्थना आज कई बार गा चुका हूं।

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  5. यह सब हनुमानजी की घोर लापरवाही के कारण हो रहा है, उनको रामजी ने हमेशा जिन्‍दा रहने का वरदान दिया था अर्थात आप चिरंजवी थे, फिर भी आपने बाबर के सेनापति मीर बाक़ी को जब वह मन्दिर तोड रहा था, न रोका न गदा का शिकार बनाया, उन्‍होंने ऐसा क्‍यूँ क्‍या? जब हनुमानजी चिरंजीव हैं और पहाड भी उठाने में समर्थ हैं तो अब VHP की तैयार कराई शीलाऐं किसी रात में रखकर राम मन्दिर बना दें, मन्दिर बन जायेगा तो सारा झगडा ही खत्‍म होजाएगा, आओ हम सब हनुमान जी जो जीवित हैं से प्रार्थना करें कि वह अब लापरवाही न बरतें

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    @ इकबाल (iqbal)

    मेरे अजीज दोस्त,

    पहले पोस्ट में लिखी बात को समझो... ५ मिनट सोचो... फिर टिप्पणी दो... मैं देख रहा हूँ कि हर जगह ऊपर लिखा ही कॉपी पेस्ट कर के टिपिया रहे हो... जिसका कोई मतलब नहीं है यहां पर... अपनी जिम्मेदारी समझो...

    इस तरह की हरकत एक individual करता है... परन्तु उसे पूरी कौम का प्रतिनिधि मान कर कुछ नादान लोग पूरी कौम को ही ऐसा ही मान लेते हैं... इसलिये फिर कह रहा हूँ, दोस्त, कि... अपनी जिम्मेदारी समझो।

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  7. प्रवीण जी, आपकी बातों में छिपे व्यंग्य को काश ये सरकार समझ पाती।
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    अदभुत है मानव शरीर।
    गोमुख नहीं रहेगा, तो गंगा कहाँ बचेगी ?

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  8. हाँ.... आप सही हैं....लेकिन लोकतंत्र का औचित्य नहीं रह गया है आज कोई।

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