गुरुवार, 26 नवंबर 2009

"भाग्य का खेल" है इसीलिये नैट पर बैठ कर सिर खपा रहा हूँ... वरना किसी अम्बानी, टाटा-बिरला या ओबामा के घर जन्म लेकर ठाठ से जी रहा होता............

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मेरे सहयात्री मित्रों,

सबसे पहले यह पोस्ट देखें।

इस पर मैंने जो टिप्पणी की थी वह इस प्रकार थी:-

आदरणीय पंडित वत्स जी,
"मेरा सिर्फ एक ही उदेश्य रहा है...वो ये कि इसके माध्यम से ज्योतिष एवं संबंधित पराविद्याओं के वास्तविक स्वरूप को आमजन तक पहुँचाना तथा तथाकथित पढे लिखे बुद्धिजीवी वर्ग की इन विषयों के प्रति अविश्वास एवं उपेक्षापूर्ण दृ्ष्टिकोण में बदलाव लाना ।"

यहाँ पर "तथाकथित पढ़े लिखे" लिखने के अर्थ व प्रयोजन पर प्रकाश डालेंगे तो आभारी रहूँगा।

आलेख में आप लिखते हैं:-
"जब कि आपकी जन्मकुंडली जो कि आपके जन्मकालीन ग्रहों पर आधारित होती हैं, वास्तव में वो ही आपके समस्त जीवन का सार है । आप अपने पूर्वार्जित कर्मों के अनुसार जन्म के साथ ही जो कुछ भी हानि-लाभ,सुख-दुख, कर्म-अकर्म, भाग्य-दुर्भाग्य इत्यादि के रूप में अपने साथ संग्रहित कर के लाते हो---उसे जानने का एकमात्र माध्यम सिर्फ आपकी जन्मकुंडली ही है । उसी के आधार पर आपको अपने भावी जीवन में फल की प्राति होती है ।"
"लेकिन यदि कोई वस्तु आपके भाग्य में लिखी ही नहीं गई है तो उसमें उपाय क्या कर सकता है? आप चाहे दिन रात उपाय करते रहें-----जब भाग्य में है ही नहीं तो उसमे उपाय क्या करेगा ।"

अपनी टिप्पणी में आपने लिखा है:-
"अगर जन्मपत्रिका से ये भी नहीं पता चल पाता कि इन्सान के भाग्य में क्या लिखा है...तो फिर तो ज्योतिष विद्या का कोई औचित्य ही नहीं था ।
ज्योतिष विद्या का मूल उदेश्य यही है कि इसके माध्यम से इन्सान ये जान पाता है कि वो अपने पूर्वार्जित कर्मों के फलस्वरूप अपने साथ भाग्य रूप में क्या लेकर आया है..ओर कितना लेकर आया है ।
किन्तु हमारे जो वर्तमान में किए जा रहे कर्म हैं, वो हमारे "पुरूषार्थ" के अधीन होते हैं...जिनमे सुधार करके अथवा बाह्य रूप में उपाय इत्यादि द्वारा अपने जीवन में परिवर्तन किया जा सकता है...लेकिन भाग्य का फल अटल है...उसके फलों में किसी भी प्रकार से कोई कमी/वृ्द्धि नहीं की जा सकती । "


उपरोक्त को पढ़ कर जो सवाल मन में उठा है वो इस प्रकार है।

आपके आलेख के अनुसार जन्म पत्रिका से यह पता चल जाता है कि इन्सान के भाग्य में क्या है। जन्म पत्रिका जन्म के सही समय व स्थान के आधार पर बनाई जाती है,माता पिता के नाम,काम,रंग,कुल,गोत्र से इसका संबंध नहीं है। जिस प्रकार सैकड़ों साल पहले की ग्रहस्थिति की गणना संभव है उसी प्रकार वर्ष २०१० के दौरान किसी स्थान, उदाहरण के लिये दिल्ली के आसमान की ग्रह स्थिति के बारे में भी जाना जा सकता है। यदि ज्योतिषी एकमत होकर गणऩा करते हैं कि जून २०१० को दिल्ली में एक लग्न विशेष में पैदा होने वाले जातक किसी क्षेत्र विशेष में शिखर तक जायेंगे... और क्योंकि चिकित्सा विज्ञान की तरक्की के कारण ३४ सप्ताह से अधिक समय से गर्भवती माता का प्रसव कभी भी कराना संभव है... तो यदि माता पिता चाहें तो उसी लग्न में बच्चे का जन्म करा कर उसके अच्छे भाग्य को सुनिश्चित कर सकते हैं कि नहीं?... दूसरा यदि अनेकों बच्चों का जन्म उसी लग्न में कराया जाये तो कंया सभी समान आयु वाले और समान भाग्य वाले होंगे?... तीसरा क्या ज्योतिष की मदद से गर्भावस्था के ९वें माह के दौरान वह पूरे देश का वह स्थान व समय चुना जा सकता है जहाँ पर जन्म लेने पर जातक शारीरिक रूप से सुन्दर, बलशाली, दीर्घायु, बुद्धिमान, स्वस्थ, सफल और माता पिता के लिये शुभ फलकारी होगा... यदि ऐसा संभव है तो यूरेका !!! सारी समस्याओं का हल तो ज्योतिष के पास ही है और इन्सान फालतू में परेशान है।




अब देखिये जो जवाब मुझे प्राप्त हुआ है वह क्या है:-

"@ प्रवीण शाह जी,
किसी भी विषय में तर्क-वितर्क करना हो तो सबसे पहले हमें उस विषय की जानकारी होनी आवश्यक है...ओर दूसरे यदि हम अपनी धारणाओं को दरकिनार कर खोजने का प्रयास करें तो ही सत्य का अनुशीलन कर सकते हैं । अन्यथा हमें सिर्फ वो ही दिखाई देगा...जिसे कि हम देखना चाहते हैं ।
इसलिए यदि आप वास्तव में इस विद्या को सत्य/असत्य की कसौटी पर परखना चाहते हैं तो सबसे पहले तो आप विधिवत इसका पूर्णरूपेण ज्ञान हासिल करें....सीखने,समझने का प्रयास करें..ओर नहीं तो कम से कम मूलभूत जानकारी तो अवश्य ही जुटा लें...ताकि आप अपने विचार ठीक से रख सकें ओर मेरी बात को आप अच्छे से समझ सकें...।


ओर एक बात कि ज्योतिष में आप के आधुनिक विज्ञान की भान्ती कल्पना का कोई स्थान नहीं है...."यदि ऎसा हो तो? यदि वैसा हो तो ?" इस प्रकार के वाक्य सिर्फ विज्ञान में ही प्रयोग किए जाते हैं..ज्योतिष जैसे किसी शाश्वत ज्ञान में नहीं । यदि सबकुछ आप के हाथ में होता तो आपको यहाँ नैट पर बैठकर सिर खपाई न करनी पडती...किसी अम्बानी,टाटा-बिरला या ओबामा के घर में जन्म लेकर ठाठ से जी रहे होते....दुनियावाले इसी को "भाग्य का खेल" कहते है....
काश आप समझ पाते ओर मैं आपको समझा पाता....खैर..."






मतलब साफ है कि ज्योतिष जैसे शाश्वत ज्ञान के आदरणीय पंडित वत्स जी जैसे साधक यदि कुछ ज्ञान की बात बताते हैं तो उस पर कोई सवाल अगर आप कर रहे हैं तो इसलिये कि आप "भाग्य का खेल" के मारे हुऐ हैं... और केवल इसीलिये नेट पर बैठ कर सिर खपा रहे हैं... अन्यथा किसी अम्बानी,टाटा-बिरला या ओबामा के घर में जन्म लेकर ठाठ से जी रहे होते।


सच कहूँ तो यह जवाब कुछ हजम नहीं हुआ मुझको...


आप क्या सोचते हैं इस बारे में ? बताइये जरूर...

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15 टिप्‍पणियां:

  1. लगता है बिलबिला गये पंडित जी, आप भी किन से सवाल करते हैं यह लोग अगर इस तरह की बात न करें तो धंधा कैसे चलेगा.

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  2. ज्योतिष पर हमारा विश्वास नहीं है ! हम आपके साथ है !
    मुझे चिढ उस समय होती है जब कुतर्को से किसी भी बात को साबीत करने की कोशीश होती है और विज्ञान का हवाला देने पर पश्चिम परस्त कह देते है ! कल ही मैंने ग्रहों के रंग और रत्न वाले एक लेख पर टिप्पणी की है ! उस लेख में ग्रहों के जो रंग बताये गए है सारे के सारे गलत है, मैंने सही रंग बताये है | उस लेख पर मै जवाब का इंतजार कर रहा हूं ! मुझे अपनी आलोचना की पूरी आशंका है !

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  3. आपसे सहमत… जब कोई और तर्क नहीं चलता तब "भाग्य का खेल" कहकर बात का पटाक्षेप करना सबसे उत्तम उपाय लगता है… ज्योतिषियों के खेल बड़े निराले हैं…

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  4. अगर भाग्य में लिखा ही होना है तो आदमी को रज़ाई ओढ़ कर आराम से सोना चाहिए। फ़िर कुछ करने की ज़रुरत क्या है !? ये पंडित लोग इतने तर्क (?) काहे करते फिर रहे हैं !? ज्योतिषियों और उनके विरोधियों के भाग्य में जो लिखा है, अपने-आप हो ही जाएगा। मुंह ढंक के सो जाईए ना !

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  5. प्रवीण जी,
    मैं आपसे ज्यादा कुछ न कहकर सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ कि आप ज्योतिष के बारे में कितनी जानकारी रखते हैं ? यदि आपको इस विषय का सामान्य ज्ञान भी नहीं है तो फिर तो आपसे इस विषय पर मेरा बात करना भी आपका और मेरा दोनों का ही समय नष्ट करने के समान होगा......क्योंकि मैं कहूँगा खगोल तो आप समझेंगें भूगोल....मैं दशा की बात करूँगा तो आप उसे दिशा समझने लगेंगें....इसलिए सबसे पहले तो इस विषय की थोडी जानकारी प्राप्त कर लीजिए ताकि अच्छे से तर्क-वितर्क किया जा सके...
    अन्त में आपसे एक सवाल करना चाहूँगा...क्योकि मेरी दृ्ष्टि में आप ज्ञान-विज्ञान के बडे अच्छे ज्ञाता हैं...इसलिए सोचा कि आप से बढकर मेरी शंका का निवारण कोन कर सकेगा.....
    सवाल:- जैसा कि ये तो सर्वविदित है कि चुम्बक में दो ध्रुव होते हैं...ऋणात्मक और घनात्मक....जहाँ दो चुम्बकों के विपरीत ध्रुव एक दूसरे को अपनी ओर खीँचते हैं वहीं समान ध्रुव परे धकेलते हैं । अब अगर मैं आपसे ये पूछूँ कि ऎसा क्यूं होता है? तो शायद आपका जवाब होगा कि ये तो बिजली का नियम है । ये मैं क्या बल्कि हर व्यक्ति जानता है...मेरा सवाल सिर्फ ये है कि माना कि ऎसा नियम है लेकिन ये नियम क्यूँ हैं ? बस मुझे आप इस "क्यूँ" का कारण समझा दीजिए....ताकि मेरे मन की जिज्ञासा का भी समाधान हो सके ओर शायद आप जैसे सर्वज्ञानियों की संगत में रह कर कुछ हमारा भी अज्ञान मिट सके ।
    धन्यवाद्!

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    1. आदरणीय पंडितजी एक ही अस्पताल में बिलकुल एक ही समय पर पैदा हुए दू बच्चों में जमीन आसमन का फर्क देखने को मिलता है इसका आपके पास कोई जबाब हो तो बताये मेरे पास ऐसे अनेक उदाहरण उपलब्ध है।।मेरे भी एक बार फलित ज्योतिष का चस्का लगा था लेकिन वो केवल सच्चाई जानने तक ही सिमित था आपकी तरह कामना नहीं तो मैंने उसके हर पक्ष को जांच तो महज एक छलावा निकला

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    2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    @ आदरणीय पंडित डी० के० शर्मा 'वत्स' जी,

    चुम्बक और चुम्बकत्व से संबंधित आपके सारे सवालों के जवाब यहाँ पर मिल जायेंगे आपको, क्षमा चाहूंगा कि यह अंग्रेजी में हैं। यहीं पर यह भी बताया गया है कि "क्यों" चुम्बक के समान ध्रुव एक दूसरे को अपनी ओर खींचते व विपरीत ध्रुव परे धकेलते हैं।

    यहाँ पर यह जरूर कहना चाहूँगा कि 'क्यों' और 'कैसे' की खोज ही विज्ञान है। किसी भी नियम को तब ही वैज्ञानिक नजरिये से सत्य माना जाता है जब वह अनेकों प्रायोगिक तथा वास्तविक परिस्थितियों से बार बार जांचा जाये तथा नतीजे समान आयें।

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  7. @प्रवीण जी,

    चलिए मान लेते हैं कि चुम्बक से संबंधित आपने जो लिंक हमें दिया था..उसे हमने पढ लिया और मान भी लिया....
    लेकिन सवाल ये है कि मान लीजिए अगर सवाल पूछने वाला कम पढा-लिखा है,जिस कि भौतिक विज्ञान के बारे में समझबूझ,जानकारी इत्यादि बिल्कुल शून्य है ओर जो कि वैज्ञानिकों की क्लिष्ट भाषा नहीं समझ सकता तो उसके लिए आपके पास इन "क्यों" "कैसे" का क्या जवाब होगा ? आप उसकी शंका का निवारण कैसे कर पाएंगें ?

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    आदरणीय पंडित "वत्स" जी,

    "लेकिन सवाल ये है कि मान लीजिए अगर सवाल पूछने वाला कम पढा-लिखा है,जिस कि भौतिक विज्ञान के बारे में समझबूझ,जानकारी इत्यादि बिल्कुल शून्य है ओर जो कि वैज्ञानिकों की क्लिष्ट भाषा नहीं समझ सकता तो उसके लिए आपके पास इन "क्यों" "कैसे" का क्या जवाब होगा ? आप उसकी शंका का निवारण कैसे कर पाएंगें ?"

    अत्यन्त नम्रतापूर्वक अनुरोध करूंगा कि आप यह कतई न मानिये और पूछे गये सवालों का जवाब ज्योतिषियों की क्लिष्ट भाषा में दे ही दीजिये, मैं या तो समझ लूँगा ता उस व्यक्ति को ढूंढ लूंगा, जो वह जवाब मुझे समझा दे।

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  9. ज्योतिष एक ऐसी विधा है, जिसे ज्योतिषी लोग खुद नहीं समझते हैं, इसलिए वे किसी भी बात का उत्तर देने से पहले या तो आपको उसका अध्ययन करने की सलाह देने लगते हैं अथवा इधर उधर की बातों में उलझा देते हैं। इससे स्वयंसिद्ध है कि इनके पास कितनी जानकारी है और यह कितनी प्रामाणिक है।
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    भीड़ है कयामत की, फिरभी हम अकेले हैं।
    इस चर्चित पेन्टिंग को तो पहचानते ही होंगे?

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  10. किसी धनवान के घर की सम्पदा एक दो पीढ़ी में झर्र होते भी देखी है। लक्ष्मी निठल्ले के पास टिकती नहीं।
    :-)

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  11. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  12. maine tippadiya padi aur soch raha hoon ki dono logo ke vaktavya me aham ko boo aa rahi hai..
    koi niche aakar sahi samadhan dhundhane ke mood me nahi hai.
    dono sochate hai ki jo mai kah raha hoon waho theek hai aur vakjal se siddha karana chahte hain..
    kuchh aisa sarthak kare ki padhanewale ko bhee lage ki haan sarthsak bahas ho raho hai.

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