रविवार, 8 नवंबर 2009

टाईम ट्रैवल और टाईम मशीन के बहाने ज्योतिष शास्त्र के विज्ञान होने या न होने का विश्लेषण...........

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मेरे सत्यसाधक मित्रों,

गणित की ही तरह तर्कशास्त्र में भी यदि हम दो परस्पर विपरीत कथनों की एक साथ तुलना करते हैं, तथा हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि इनमें से एक कथन सत्य है/ सत्य हो सकता है तो यह निष्कर्ष मान लिया जाता है कि विपरीत कथन गलत है।

विज्ञान फंतासी लेखकों का एक बड़ा ही लोकप्रिय विषय है टाईम ट्रेवल और टाईम मशीन, यह एक ऐसे उपकरण की कल्पना है जिसमें बैठ कर कोई भी मनुष्य भूतकाल या भविष्य के किसी भी समय में सशरीर अपनी पूरी मानसिक और शारीरिक क्षमताओं के साथ जा सकता है। अब एक पल के लिये मान लीजिये कि टाईम मशीन सचमुच बन सकती है और टाईम ट्रेवल संभव है, अब नीचे लिखी तीन स्थितियाँ देखिये:-
१- बहुत गुस्सेबाज और शक्तिशाली श्रीमान शेर सिंह अपने परदादा की सगाई में जाते हैं और वहीं किसी बात पर अपने परदादा से झगड़ा कर बैठते हैं झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि श्रीमान शेर सिंह अपने परदादा की सगाई होने से पहले ही गला दबा कर हत्या कर देते हैं।
२- चरित्रवान, शान्त और आदर्शवादी श्रीमान सौम्य प्रताप विवाह करने से पहले ही अपने प्रपौत्र को देखने जाते हैं टाईम मशीन से, उन्हे प्रपौत्र मिलता तो है पर एक जेल के अंदर जहाँ वो देश के विरूद्ध जासुसी और एक सैन्य अधिकारी की हत्या की सजा काट रहा है। अपने वंश की यह गत देखकर श्रीमान सौम्य प्रताप इतने खिन्न हो जाते हैं कि आजीवन विवाह ही नहीं करते।
३- श्रीमती शान्त शान्ति टाईम मशीन से जाती हैं रामायण काल मे् माता सीता से मिलने, क्योंकि रामायण वो पढ़ चुकी हैं और उसमें हुआ रक्तपात उनको पसंद नहीं इसलिये वो सीता माता को रावण के षड़यंत्र के बारे में बता कर लक्ष्मण रेखा को कतई पार न करने के बारे में आगाह कर देती हैं, माता सीता उनकी सलाह मान लेती हैं और रावण सीता माता का अपहरण करने में नाकाम रहता है, नतीजा राम-रावण युद्ध की आवश्यकता ही नहीं होती।

अब जरा दिमाग पर जोर देकर सोचिये कि क्या उपरोक्त तीन में से कोई कथन सत्य हो सकता है ? जवाब होगा...नहीं!
इसीलिये यह माना जाता है कि कल्पना के घोड़े जितने भी दौड़ा लिये जायें पर हकीकत में टाईम ट्रेवल करना और टाईम मशीन बनना असंभव है।



अब मैं ऊपर बताये गये तरीके से ही ज्योतिष शास्त्र(जो भविष्य को बताने का दावा करता है) के बारे मे निष्कर्ष निकालने का प्रयत्न करूंगा।
स्थिति १ :-
सारे ज्योतिषी एक मत होकर भविष्यवाणी करते हैं कि श्रीमान समंदर लाल की मृत्यु समुद्र में डूबने से ही होगी।
प्रतिक्रिया:- समंदर लाल जी कसम खा लेते हैं कि वो आजीवन अपने १४ मंजिले फ्लैट से ही बाहर नहीं जायेंगे।
स्थिति २ :-
सारे ज्योतिषी एक मत होकर भविष्य वाणी करते हैं कि टीम बेईमानिस्तान अपना ५ दिन बाद होने वाला क्रिकेट मैच जीतेगी।
प्रतिक्रिया:- टीम बेईमानिस्तान मोटी रकम के बदले मैच फिक्स कर लेती है और मैच हार जाती है।
स्थिति ३ :-
सारे ज्योतिषी एक मत होकर भविष्यवाणी करते हैं कि शेयर मार्केट आज ऊपर जायेगा।
प्रतिक्रिया:- कुछ बेईमान और आपराधिक प्रवॄत्ति के मंदड़िये उस दिन शहर में कुछ धमाके करा देते हैं और शेयर बाजार धड़ाम से औंधे मुंह गिर जाता है।

अब हम यदि टाइम मशीन और टाईम ट्रेवल की संभाव्यता के बारे में नतीजे पर पहुंचने के तरीके को यहां पर प्रयोग करें तो आप देखेंगे कि तीनों स्थितियों मे प्रतिक्रिया पूरी तरह संभव है। जिसका सीधा निष्कर्ष है कि चाहे ज्योतिष हो या टैरो या क्रिस्टल बॉल गेजिंग... भविष्य का पूर्ण निश्चितता के साथ कथन असंभव है।


आप सहमत हैं मुझसे या नहीं ?
अपनी टिप्पणी में बताईयेगा जरूर !

15 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसी भविष्‍यवाणियां हम करें ही क्‍यूं .. जिसका काट मनुष्‍य के वश में हो .. हम ऐसी भविष्‍यवाणियां क्‍यूं न करें .. जिसका काट मनुष्‍य के पास हो ही नहीं !!

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  2. है कोई जवाब? आप के पास पहली टिप्पणी का।

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    आदरणीय संगीता जी कहती हैं:-

    "ऐसी भविष्‍यवाणियां हम करें ही क्‍यूं .. जिसका काट मनुष्‍य के वश में हो .. हम ऐसी भविष्‍यवाणियां क्‍यूं न करें .. जिसका काट मनुष्‍य के पास हो ही नहीं !!"

    क्या यह सत्य नहीं है संगीता जी, कि अधिकांश भविष्यवाणियां ऐसी ही होती हैं जिसकी काट मनुष्य के हाथ में हो?

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  4. सिर्फ चंद वाक्‍यों के कमेंट से आपके प्रश्‍नों का उत्‍तर नहीं दिया जा सकता .. मेरे ब्‍लाग पर इस विषय में एक संपूर्ण आलेख का इंतजार करें !!

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  5. समय को समझने के लिए पहले अल्वर्ट आइंस्टाइन को पढना आवश्यक है. उन्होंने बहुत पहले यह सिद्ध कर दिया था की समय का कोई अस्तित्व नहीं होता है. यह सिर्फ माइंड गेम है. इसे यूं समझें कि दुःख व्यक्ति को पहाड़ जैसा महसूस होता है लेकिन जब वह आनंद के क्षणों में होता है,तो वे पल कब गुजर जाते हैं उसे पता ही नहीं चलता.
    यदि कोई व्यक्ति कोमा में चला जाये और एक वर्ष बाद या दस हजार वर्ष बाद उसे होश आये तो उसे ऐसा लगेगा कि वह अभी सो कर उठा है. उसकी स्मृति में वह अन्तराल रहेगा ही नहीं. समय को हमने अपनी सुविधानुसार बना लिया है. प्रथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है. रात होते हैं दिन होते हैं यह एक प्रक्रिया है समय नहीं....
    ओशो ने अपनी ध्यान प्रक्रियाओं में टाइम लेस नेस की बात की है. ध्यान में समय का बोध नहीं होता है.
    जबसे खगोल विज्ञान में ज्योतिष की घुसपेठ हुई है तबसे सबकुछ गड़बड़ हो गया.खगोल विज्ञान और ज्योतिष को मिलाकर पंडितों और पुरोहितों ने इसे रोजीरोटी का जरिए बना लिया है. भविष्यवाणी सहज अनुमान, मनोविज्ञान, और तुक्के के आलावा कुछ नहीं है, खुशवंत सिंह कहते है, ज्योतिष एक चंडूखाना है.....

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  6. रामकुमार अंकुश जी ,
    खुशवंत सिंह कहते है, ज्योतिष एक चंडूखाना है.....
    रटी रटायी बातों को छोडकर आप अपने तर्क कब से रखना शुरू करेगे !!

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  7. आपने एक गम्भीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया है। आपकी बातों से पूरी सहमति है।
    और हाँ पंडित वत्स के ब्लॉग पर आपके दिये गये जवाब भी अच्छे लगे।
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    और अब दो स्क्रीन वाले लैपटॉप।
    एक आसान सी पहेली-बूझ सकें तो बूझें।

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  8. mujhe to aapke kirdaron ke naam kafi achche lage jaise "sher singh", "saumya pratap", "shanti", "samandar lal", "beimanistan".

    kuch gambhir baat karein to me bhi aapse sahmat hoon. jyotish aur tantrikon per mujhe bhi vishwas nahi.

    vaise kuch tantrikon ki chikitsha vidhi batati hoon...

    vo aapse kahenge ki "ullu ki dono aankhen, chmdagad ke nakhoon, mare hue sher ke kaan ko lekar peepal ke ped per bandho, sab kuch shahi ho jayega.... per savdhaan rahna kahin koi tumko dekh naa le nahi to anist hoga....."

    vechara insaan jab ye sab kuch kar leta hai tab bhi koi hal naa nikalne per tantrikon ke paas ek hee jabab rahta hai "JAROOR KISI NE DEKH LIYA HOGA"...


    :)

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  9. ठीक कहत हैं प्रवीण शाह जी हकीकत में टाईम ट्रेवल करना और टाईम मशीन बनना असंभव है। बाकी नामों में क्‍या रखा है यह तो हम और तुम समझते ही हैं, अच्‍छी पोस्‍ट पर बधाई

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  10. सहमति-असहमति को मारिए गोली. आपकी कल्पना लाजवाब है.

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  11. संगीता जी सत्य किसी का नहीं होता, तर्क मेरा हो, आपका हो या प्रवीण जी का हो क्या फर्क पड़ता है. बात किसी की भी हो जिसने समझ लिया वह बात उसी की हो जाती है...

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  12. अरे वाह भाई तार्किक और सहज पोस्ट....... साधुवाद..

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  13. I want to know that it is possible to time to travel one place to another take example of light which passed from one place to another. If it is so then definitely we can travel through time from one place to another (i.e. from our universe to other universe). I want to know that day by day our age is growing. It is because daily time in moving from one place to another. If time cannot moving from one place to another then nobody age is increasing. Above matter is right or wrong please sent me Email on my address deshmukhawez@gmail.com or call 7709336775

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  14. अधिकांश आविष्कार असंभव लगने वाली हंसी योग्य कल्पनाओं से ही शुरू होती है। हवाई जहाज के आविष्कार से पहले लोग हवाई जहाज की कल्पना करने वाले लोगों का भी इसी तरह मजाक उडाते होंगे कि भला ऐसा भी कहीं हो सकता है कि इंसान चिडियों की तरह आसमान मे उडे पर ऐसा हुआ। इसलिए असंभव तो कुछ है ही नही कौन जाने भविष्य के गर्भ में कल क्या छिपा है।

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