रविवार, 11 अक्तूबर 2009

जिस दिन ऐसा कोई संकल्प दिलाने लगेंगे.....तो तंबू उखड़ जायेंगे...इन गुरुओं और बाबाओं के !..Will these preachers show some courage against social evils?

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सुधी मित्रों,

सबसे पहले तो मेरा डिस्क्लेमर :-
"एक हिन्दू या यों कहें सनातन धर्मी परिवार में जन्म हुआ है मेरा, पिता जनेऊ पहनते हैं और नियम से संध्या, पूजा, पाठ करते हैं। माँ की ईश्वर में अटूट आस्था है पर बंधी नहीं वो किसी कर्मकान्ड से, जब मन चाहा खाना बनाते, सब्जी काटते, कपड़े धोते या नहाते हुऐ संस्कृत के श्लोक, आरतियां, हनुमान चालीसा, भजन आदि गाती रहती है। मन हुआ तो मंदिर गईं, नहीं तो नहीं...गुरुद्वारे जाती है तो पूर्ण श्रद्धा से शीश नवाती है, चर्च में भी ईश्वर मौजूद मिलता है उसे, दिल्ली गई तो जामा मस्जिद की सीढियों पर भी ठिक उसी तरह माथा टेका उसने, जैसा मंदिर में टेकती है।
रहा सवाल मेरा तो किसी भी तरह के नियम या परिभाषा में नहीं बंधना चाहता मैं, मेरे लिये धर्म का अर्थ यही है कि ऐक भारतीय होने के नाते अपने अधिकार मांगने से पहले अपने कर्तव्य को सही तरह से निभा सकूं, और हाँ न तो किसी गुरु की जरूरत हुई है मुझे आज तक और न ही किसी को गुरु बनाया है मैंने..."


अब आते हैं मुद्दे पर...

टीवी खोलो तो कम से कम १० चैनल मिलेंगे जो पूरी तरह से धार्मिक और आध्यात्मिक प्रोग्राम ही दिखाते हैं और इन्हीं चैनलों में शाश्वत वास है गुरूओं, बाबाओं, बापुओं, भाइयों, महाराजों, योगियों, पूज्यों, साध्वियों, बहनों, दीदियों, अम्माओं आदि आदि का जो दिन रात लगे हैं ज्ञान वर्षा करने में...

इनमें से अधिकतर की धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में कोई उपलब्धि नहीं रही है ज्यादातर कीर्तन, भजन ,जागरण और कथावाचन करते करते तरक्की कर गुरु बन गये हैं पर हमें इस से क्या...ज्ञान तो कोई भी बांट सकता है।

शायद एकाध साल पहले एक चैनल ने इनमें से कुछ की पोल भी खोली थी कि किस तरह वो १० रूपये लेकर १०० की रसीद देते हैं और टैक्स चोरों की मदद करते हैं...पर हमें इस से कुछ लेना देना नहीं...

एक और बात जो वाक चातुर्य के धनी यह गुरु अपने शिष्यों के दिमाग में ठूंसते हैं कि जीवन का एकमात्र उद्देश्य है परमात्मा से साक्षात्कार और मोक्ष ( जो एक अपरिभाषित शब्द है आजतक)...और यह सब केवल और केवल गुरु ही दिला सकता है...गुरु तो सामने बैठा ही है!...खैर इस से भी अपन को क्या...

चंद किस्से कहानियों, चुटकुलों, पौराणिक प्रसंगों, कीर्तनों, भजनों ,गानों और बैकग्राउंड म्यूजिक के दम पर ऊँचे सिंहासनों पर बैठे ये गुरु नृत्य और संगीत सहित सत्संग का एक ऐसा शो रचते हैं कि सामान्य बुद्धि का कोई भी आदमी चकरा जाये और इन्हीं में ईश्वर का प्रतिरूप देखने लगे...यही कारण है कि कुछ घरों में इनके फोटो आपको देवताओं के साथ लगे मिलेंगे...लेकिन मुझे कोई ऐतराज नहीं इस पर भी...

इन में से कुछ स्वयं और कुछ शिष्यों के नेटवर्क द्वारा धार्मिक और पर्यटन की दॄष्टि से महत्व पूर्ण स्थानों पर आश्रम बनाने के नाम पर बेशकीमती सरकारी जमीन और जंगल घेर रहे हैं...फ्लैट बना कर बेच रहे हैं...भू माफिया का जैसा काम कर रहे हैं...पर यह देखना तो शासन प्रशासन का काम है...हम क्यों चिंता करें फालतू में...

इनमें से कई ऐसे हैं जिनका कार्य है वरिष्ठ पदों पर आसीन नेताओं, अधिकारियों और बड़े व्यवसाइयों के बीच नेटवर्किंग कर डील करवाना...हमारे धर्म निरपेक्ष मुल्क में भक्ति पर तो कोई रोक है नहीं...अत: इनके आलीशान पांच सितारा आश्रमों में इन तीनों श्रेणियों के महानुभाव आसानी से मिलकर मोलभाव कर सौदा कर सकते है...विभिन्न नियामक तो हैं इस गड़बड़झाले पर नजर रखने के लिये...सो डोन्ट वरी...


इन गुरुओं को अपने भक्तों के आध्यात्मिक और धार्मिक उत्थान का भी बड़ा ख्याल रहता है अत: ये गुरु दक्षिणा के नाम पर अपने भक्तों से कभी कभी कुछ संकल्प भी करवाते हैं जैसे...
१- मैं जीवन भर मांसाहार का सेवन नहीं करूंगा।
२- शराब और सिगरेट-तम्बाकू छोड़ दूंगा।
३- तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज आदि का त्याग कर दूंगा।
४- सप्ताह में एक बार कम से कम सत्संग में जाउंगा।
५- रोज सुबह गौमाता को चार रोटी खिलाउंगा।
आदि आदि...
कोई हानि नहीं इन संकल्पों से भी...



अब कल्पना कीजिये उस स्थिति की...यही गुरु लोग गंगाजल भक्तों के हाथ में देकर उन्हें निम्न संकल्प दिलवा रहे हैं...
१- मैं अपने लड़के की शादी में न तो दहेज लूंगा और न बिटिया के विवाह में दूंगा।
२- मैं अपने व्यवसायिक और निजी जीवन में किसी भी तरह की टैक्स चोरी नहीं करूंगा, सरकार को प्रत्येक टैक्स पूरा दूँगा, अपनी इस्तेमाल की गई बिजली और पानी का पूरा दाम चुकाउंगा।
३- मैं किसी तरह की बख्शीश, घूस, रिश्वत या सुविधा शुल्क न तो दूंगा और न ही लूंगा।
४- मैं किसी भी काम के लिये न तो सिफारिश करवाउंगा और न किसी की गलत सिफारिश को मानूंगा।
५- जाति व्यवस्था यानि समाज के कोढ़ को खत्म करने का प्रयास करुंगा और जीवन का कोई भी निर्णय जाति के आधार पर नहीं लूंगा।
६- मैं अपने उद्योग या प्रतिष्ठान में काम करने वाले कर्मचारियों व श्रमिकों का शोषण नहीं करूंगा, उन्हें इतना वेतन दूंगा कि वोसम्मान से सर उठाकर एक उपयोगी जीवन जी सकें तथा मुनाफे में भी कुछ हिस्सा उन को दूंगा।


अगर ये गुरु ऐसा करने लगें तो क्या होगा...???

इन गुरुओं के पंडाल खाली हो जायेंगे...तंबू उखड़ जायेंगे...और इनके भक्तों का स्थान विलुप्त प्राय: जीवों की लिस्ट में आ जायेगा...

काफी कड़वा तो है......मगर यह सच है...

16 टिप्‍पणियां:

  1. प्रत्‍येक गुरु को भ्रष्‍
    ट चेले चाहिए जो उन्‍हें दौलत दे सकें, उनके आश्रम के लिए। आज देश में जितने धर्म गुरु हैं यदि वे सब आपकी बतायी प्रतिज्ञा कराने लगे या फिर उसी से दान लेने लगे जो ईमानदारी से कमाया हो तो उन सभी के तम्‍बू डेरे उखड जाएंगे। इसलिए हम भी इन्‍हें दूर से ही प्रणाम करते हैं, क्‍योंकि इन्‍हें कोई भी बुद्धिजीवी नहीं चाहिए बस सभी पैसे वाले चाहिएं।

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    1. madam aap dhanya hai,kabhi satsang kiya hai yaa sapne me hi jee rahi hai aap.jara jaa ke dekho satsang me, hamse to aaj tak kissi sant ne chhavanni bhi nahi mangi,ulta milta hi milta hai.aap ne jarur unka kuch galat kia hoga,yaa phir aapne netao ko galti se guru samjh liya

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  2. सहमत हूँ भाई जी आपसे । जिन मार्गो पर ये चलने की बात करते है खूद उसके विपरीत चलते है। और बात आपकी बिल्कुल सही है अगर वे ऐसा ना करें तो इनके तंबू उखड़ जाये।

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  3. रामदेव को हमने क्या क्या नहीं समझा था. वह देश से विदेशी मुद्रा बहार जाने के विरोध में और नेताओं द्वारा बहार संपत्ति बनाने के विरोध में भी प्रवचन दिया करता था. उसी रामदेव ने यूरोप में एक आलिशान टापू नगद खरीद डाला.... क्या कहें?

    आसाराम तो जगजाहिर है ही..... अभी एक संत लोगों के अरबों रुपये तीन गुना कर गया.

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  4. बन्धुवर प्रवीण शाह साहेब,

    सादर नमन !

    आपने बहुत अच्छा लिखा .........सच लिखा ... इन बाबा लोगों ने बढ़िया दुकानें लगा रखी हैं और अपने वाक् चातुर्य के दम पर मज़े कर रहे हैं ...........कईयों के पास तो वाक् कला भी नहीं है.......फ़िर भी जमे हुए हैं

    लेकिन आप इनके यहाँ लगी भीड़ को देख कर प्रभावित न हों..........क्योंकि ये भीड़ श्रद्धालुओं की नहीं तमाशबीनों की होती है .........भीड़ का क्या है सड़क पर बन्दर नाच रहा हो तो लोग जमा हो जाते हैं..........

    वैसे इन ढोंगी बाबाओं के विरुद्ध आवाज़ ज़रूर बुलंद होनी चाहिए...........

    आपको बधाई !

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  5. इतना सच न बोलिए बंधू ..धर्म विरोधी साबित कर दिया जाएगा.

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  6. सारे संकल्प एकदम सही हैं, और यदि बाबा लोग वाकई "बाबा" हैं तो उन्हें अपने भक्तों से यह करवाना चाहिये…।

    एक बाबा और भी हैं उनकी भी हिम्मत नहीं है कि इस प्रकार के संकल्प करवायें अपने भक्तों से… कोई और नहीं अपने "राहुल बाबा" :)

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  7. Janab,
    jab aap kisi Guru ek paas gaye hi nahi
    to phir aap sahi faisla nahi kar sakte.
    sahi faisla vo hi kar sakta hai jisne adhyatm
    ko janne ke yatra ki ho.
    Jab hum purvagraha se pidit ho to phir satya
    dikhlai nahi dega.

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  8. logo ki baaten sun kar hum subhi log sochte hai ki yeh such hi hai agar koi tumko bina baat ke choor keh de to socho kya hoga tumhara, subhi se yahi kehte firoge ki isne mujhe choor eh diya.. aur log bhi kahenge ki tu to choor hai lekin unko pata keiase chala kyu ki kisi ne tumko choor kaha aur bakiyo ne suna.
    is liye dusre ki kahi suni baton per visvaas mut karo apni akal lagao. jab tum kisi ko bina soche samjhe aacha nahi bol sakte ho to kisi ko bura bhi mut bolo..
    Hariom

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  9. he ram g ,sadhu-santo per jhute aarop lagane walo ko saddbuddhi dena.un becharo ki budhi ko jang lag gaya hai isliye dusro ki soch hi sach maan lete hai,vichaar nahi karte,kabhi satsang me to inke maa-baapo ne jyaana sikhaya nahi,khud kabhi gaye nahi,inko kya pata accha-bura, ye to sadda bure logo ke sang me rahte hai to sab bekar hi lagta hai inhe.

    prabhu ko aankh band karke yaad karne me inko saram aati hai,padamashan me baithne me inka sarrir kaam nahi karta,jinka karta hai ve kamjoor hai,himmat ka kaam unse hota nahi aur kissi ki unnati unse bardast nahi hoti.koi baat nahi lakin unhe ek raaz ki baat batau,"BAPU KE DEEWANO KO BAHAKAYA NAHI JA SAKTA,..."

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  10. he ram g ,sadhu-santo per jhute aarop lagane walo ko saddbuddhi dena.un becharo ki budhi ko jang lag gaya hai isliye dusro ki soch hi sach maan lete hai,vichaar nahi karte,kabhi satsang me to inke maa-baapo ne jyaana sikhaya nahi,khud kabhi gaye nahi,inko kya pata accha-bura, ye to sadda bure logo ke sang me rahte hai to sab bekar hi lagta hai inhe.

    prabhu ko aankh band karke yaad karne me inko saram aati hai,padamashan me baithne me inka sarrir kaam nahi karta,jinka karta hai ve kamjoor hai,himmat ka kaam unse hota nahi aur kissi ki unnati unse bardast nahi hoti.koi baat nahi lakin unhe ek raaz ki baat batau,"BAPU KE DEEWANO KO BAHAKAYA NAHI JA SAKTA,..."

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  11. अगर आपके सभी प्रश्नों का उत्तर सही मिलेगा तो क्या आप इस ब्लॉग में उनका उल्लेख करेंगे खुले मन से या आपकी जाती दुश्मनी है इन सभी हिन्दू धर्म के संतो और प्रचारकों से ?

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  12. १- मैं अपने लड़के की शादी में न तो दहेज लूंगा और न बिटिया के विवाह में दूंगा।
    २- मैं अपने व्यवसायिक और निजी जीवन में किसी भी तरह की टैक्स चोरी नहीं करूंगा, सरकार को प्रत्येक टैक्स पूरा दूँगा, अपनी इस्तेमाल की गई बिजली और पानी का पूरा दाम चुकाउंगा।
    ३- मैं किसी तरह की बख्शीश, घूस, रिश्वत या सुविधा शुल्क न तो दूंगा और न ही लूंगा।
    ४- मैं किसी भी काम के लिये न तो सिफारिश करवाउंगा और न किसी की गलत सिफारिश को मानूंगा।
    ५- जाति व्यवस्था यानि समाज के कोढ़ को खत्म करने का प्रयास करुंगा और जीवन का कोई भी निर्णय जाति के आधार पर नहीं लूंगा।
    ६- मैं अपने उद्योग या प्रतिष्ठान में काम करने वाले कर्मचारियों व श्रमिकों का शोषण नहीं करूंगा, उन्हें इतना वेतन दूंगा कि वोसम्मान से सर उठाकर एक उपयोगी जीवन जी सकें तथा मुनाफे में भी कुछ हिस्सा उन को दूंगा।

    सवाल कर दिए पर किस साधू या संत या धर्म प्रचारक ने इस बात के विरूद्ध कम किया है | और कब ये बताने का कष्ट करेंगे ?

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  13. यदि आदमी अपने जीवन में अपने कर्तव्यों का ईमानदारी के साथ पालन करे तो उसे न तो किसी बाबा की जरुरत होगी और न ही किसी मजहब की व्यक्ति अपना गुरु आप ही होता है उसे सब पता होता है की सही क्या और गलत क्या है।

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