शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

सेकुलरिस्टों को तो दोनों तरफ से दुत्कार ही मिलनी है.....We don't understand secularism.

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प्रिय पाठक,

अपनी बात शुरू करने से पहले कुछ परिभाषायें:-
स्रोत-Oxford advanced learner's dictionary, 5th edition.
*Secular=not concerned with religious affairs; of this world.
*Secularism= the belief that laws,education,etc should be based on facts,science etc rather than religion.
*Pseudo= not genuine; pretended or insincere.


ज्यादा दिन नही् हुऐ,मुम्बई टाईगर ब्लॉग पर जसवंत सिंह पर की गई एक टिप्पणी की भाषा जायज नही् लगी, विरोध जताया तो अपनी जवाबी टिप्पणी में उन वरिष्ठ ब्लॉगर ने मुझे कह दिया 'स्यूडो सेक्युलर'...
अपने सुरेश चिपलूनकर जी भी 'तथाकथित सेक्युलर','स्यूडो सेक्युलर'और 'वामपंथी सडांध फैलाने वालों' के प्रति अपना गुस्सा अकसर निकालते ही रहते हैं ।


बहुत छोटा था मैं तो किसी किताब में पढ़ा कि हमारे संविधान में लिखा है कि भारत एक Secular, Socialist, Democratic, Republic है, इन बड़े बड़े शब्दों के अर्थ पढ़े और ठाना कि मैं भी Secular, Socialist और Democrat बनूंगा।


तो मित्रों, सबसे पहले दी गई परिभाषाओं के आधार पर जो आदमी यह मानता है कि किसी मुद्दे पर उसके विचार और राय तथ्य, तर्क, कानून और विज्ञान पर आधारित हो तथा उसके अपने धर्म संबंधी किसी भी पुर्वाग्रह से मुक्त हो, वह आदमी सेक्युलरिस्ट है। सही है कि नहीं ?


अब आता हूं भगवा ध्वज वाहकों पर , निम्न कथनों पर गौर कीजिये...

१-विवादित धर्मस्थल के मामले में अदालत का आदेश यदि हमारे पक्ष में आया तो हम उसे मानेंगे अन्यथा नहीं क्योंकि आस्था के फैसले अदालतों द्वारा नहीं दिये जा सकते।
२-हमारा धर्म कई करोड़ साल पुराना है भले ही आधुनिक आदमी का इतिहास महज कुछ हजार सालों का ही हो।
३-हमारे स्वर्णिम प्राचीन काल में यद्यपि पशु शक्ति व लकड़ी जलाकर उर्जा प्राप्त करने के अतिरिक्त उर्जा के किसी स्रोत के सबूत नहीं हैं फिर भी हमारे पुरखों ने विमान (पुष्पक आदि), आणविक अस्त्र (ब्रह्मास्त्र),टेस्ट ट्यूब बेबी(कौरव) आदि आदि सब बना लिये थे।
४-हम तो मानते हैं कि हमारे मिथक और इतिहास एक ही हैं इनमें कोई भेद हमें स्वीकार नहीं।
५-लाल किला, कुतुब मीनार, ताज महल आदि आदि जो भी पुरानी प्रसिद्ध इमारतें हैंवो हमारे धर्म के शासकों ने बनाई, दूसरे धर्म के शासकों ने अपने शासन काल में उन्हें स्वयं द्वारा बनाया प्रचारित कर दिया।
६-एक पशु विशेष को हम पूजते हैं, उसका गोबर और मूत्र भी हमें प्यारा है हरेक को इनका सेवन करना चाहिये, घर में गोबर लीपना चाहिये, वस्त्रों को शुद्ध करने के लिये मूत्र को उन पर छिड़क सकते हैं यह दीगर बात है कि इसी पशु के दूध देना बन्द कर देने पर हम इन्हें सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं (क्या आपने कभी सड़क पर घूमती आवारा भैंस देखी है?)

अब यदि उपरोक्त कथनों से सहमत हैं तो आप सच्चे सेक्युलर हैं यदि नहीं तो आपको 'स्यूडो सेक्युलर','तथाकथित सेक्युलर', 'वामपंथी सडांध फैलाने वाले' 'अल्प संख्यक तुष्टिकरण समर्थक' आदि कहकर दुत्कारा जायेगा...


इसी तरह से हरा झंडा थामे हैं कुछ लोग,उनके कथनों पर गौर कीजिये:-

१-विवादित धर्मस्थल मामले में यदि अदालत का फैसला हमारे पक्ष में है तो मानेंगे अन्यथा नहीं क्योंकि हमारे धर्मग्रंथ के अनुसार जो जगह एक बार हमारा पूजास्थल बन गई वह सृष्टि के अंत तक पूजास्थल ही रहेगी।
२-हमारा धर्म भी कोई १४००-१५०० साल पुराना नहीं बल्कि सृष्टि की शुरुआत से चला आ रहा है।
३-मेडिकल साइंस, गणित, विज्ञान, ऐस्ट्रोनोमी आदि आदि में जो कुछ आज खोजा जा रहा है उसे हम लोगों ने पहले ही जान लिया था।
४-किसी भी दुनियावी मसले पर हम मानेंगे वही तथा वही राय रखेंगे जो हमारे धर्मग्रंथों में लिखा है या जो फतवा हमारे धर्मगुरु देते हैं, तर्क, तथ्य,विज्ञान और कानून से हमें कोई मतलब नहीं। सारी दुनिया आज हमारे खिलाफ साजिश कर रही है।
५-इतिहास भले ही कुछ कहे हमारे धर्म के शासकों ने कोई धर्मस्थल नही् तोड़ा,न धर्मान्तरण कराया न जजिया लिया। इस देश का प्राचीन धर्म तो हमारा ही धर्म है ये तो बाद में गुमराह लोगों ने दूसरा धर्म अपना लिया। हमारे संदेष्टा ही तो अंतिम अवतार हैं।
६-एक पशु विशेष जो हमारे धर्म में निषेध है, उसे दुनिया में रहने का हक नहीं, न कोई इसे पाले और न खाये और तो और यह पशु तो पक्का लूज कैरेक्टर है हमें पता चला है कि यह अपनी मादा को दूसरे नरों को ऑफर करता है।

अब यदि उपरोक्त कथनों से सहमत हैं तो आप सच्चे सेक्युलर हैं यदि नहीं तो आपको 'स्यूडो सेक्युलर','तथाकथित सेक्युलर', 'वामपंथी सडांध फैलाने वाले' 'बहुसंख्यक प्रभुत्ववादी ' आदि कहकर दुत्कारा जायेगा...



अब आप ही बताओ मित्रों सेक्युलरिस्ट अगर जायें तो जायें कहां.....

20 टिप्‍पणियां:

  1. एक पशु विशेष को हम पूजते हैं, उसका गोबर और मूत्र भी हमें प्यारा है हरेक को इनका सेवन करना चाहिये, घर में गोबर लीपना चाहिये, वस्त्रों को शुद्ध करने के लिये मूत्र को उन पर छिड़क सकते हैं यह दीगर बात है कि इसी पशु के दूध देना बन्द कर देने पर हम इन्हें सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं (क्या आपने कभी सड़क पर घूमती आवारा भैंस देखी है?)

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  2. किसी भी दुनियावी मसले पर हम मानेंगे वही तथा वही राय रखेंगे जो हमारे धर्मग्रंथों में लिखा है या जो फतवा हमारे धर्मगुरु देते हैं, तर्क, तथ्य,विज्ञान और कानून से हमें कोई मतलब नहीं। सारी दुनिया आज हमारे खिलाफ साजिश कर रही है।

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  3. अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
    मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी "में पिरो दिया है।
    आप का स्वागत है...

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  4. ये तो आपने कथित "साम्प्रदायिक" व्यक्तियों की परिभाषाएं बता दी हैं… जबकि हम जिस प्रकार के "छद्म सेकुलरों" की बात करते हैं उनकी नीतियाँ एकदम अलग किस्म की हैं… इस पूरे लेख में आपने "तुष्टिकरण" के बारे में कुछ भी नहीं कहा। क्या एक लम्बी सूची आपको सौंपी जाये ताकि आप भी ठीक से जान सकें कि आखिर नकली सेक्यूलर कैसा होता है? वामपंथी सड़ांध क्या होती है? यदि आप कांग्रेस के पिछले 60 साल का इतिहास और निर्णय उठाकर देख लेंगे तो आपको तुरन्त पता चल जायेगा कि "तुष्टिकरण" अथवा "स्यूडो-सेकुलरिज़्म" किसे कहते हैं…

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  5. आपके पोस्ट में दी गई परिभाषाओं के अनुसारः

    Secular=not concerned with religious affairs; of this world.

    और आपके ही अनुसारः

    भारत एक Secular, Socialist, Democratic, Republic है

    याने कि

    भारत एक Secular (not concerned with religious affairs; of this world) Republic है

    तो फिर

    यहाँ एक सेक्युलर कानून क्यों नहीं है जो कि प्रत्येक भारतवासी को मान्य हो?

    अलग अलग धर्मावलम्बियों के लिए अलग अलग कानून क्यों?

    किसी एक धर्म के अनुयायियों के लिए सिर्फ एक विवाह और किसी अन्य धर्म के अनुयायियों के लिए चार विवाह जैसे अलग अलग प्रावधान क्यों?

    जब भारत का सेक्युलर होने के नाते किसी धर्म से किसी प्रकार का सम्बन्ध (concern) ही नहीं है तो फिर उसके विधान विभिन्न धर्मों पर आधारित क्यों?

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    @ अवधिया जी,
    अच्छा सवाल उठाया आपने, मैं भी यही कह रहा हूँ कि एक देश के रूप में सेक्युलरिस्ट आदर्शों से कहीं न कहीं हम भटक गये हैं...या फिर ऐसा सिर्फ मुझे ही लगता है।

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  7. अवधिया जी के विचारों से सहमत |
    सुरेश जी ने भी सही कहा है 'ये तो आपने कथित "साम्प्रदायिक" व्यक्तियों की परिभाषाएं बता दी हैं… जबकि हम जिस प्रकार के "छद्म सेकुलरों" की बात करते हैं उनकी नीतियाँ एकदम अलग किस्म की हैं "

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. " स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said...

    एक पशु विशेष को हम पूजते हैं, उसका गोबर और मूत्र भी हमें प्यारा है हरेक को इनका सेवन करना चाहिये, घर में गोबर लीपना चाहिये, वस्त्रों को शुद्ध करने के लिये मूत्र को उन पर छिड़क सकते हैं यह दीगर बात है कि इसी पशु के दूध देना बन्द कर देने पर हम इन्हें सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं (क्या आपने कभी सड़क पर घूमती आवारा भैंस देखी है?)"


    is tippni ko dekhiye janab poore post mein bas yahi pankti dikhi kyon ki isse ek dharmwishesh ko gariyane ka mauka mil sakta hai .

    ६-एक पशु विशेष जो हमारे धर्म में निषेध है, उसे दुनिया में रहने का हक नहीं, न कोई इसे पाले और न खाये और तो और यह पशु तो पक्का लूज कैरेक्टर है हमें पता चला है कि यह अपनी मादा को दूसरे नरों को ऑफर करता है।

    upar ke is line ko kyon bhul gye ?

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  10. कौन है सच्चा सेकुलर ? प्रवीन जी आप की पोस्ट में ज्यादा तर्क तो नहीं मिला पर इस बात की संतुष्टि रही कि आपने भगवा और हरा दोनों की चर्चा की . वैसे मैं तो सेकुलर उसी को मानता हूँ जो धर्म जाती पाती , विभिन्न वादों / विचारों से दूर रहे . पर भारत में पढ़े-लिखे /बौद्धिक होने का मतलब होता है कि आप वामपंथी हो गये . और इस जग का कल्याण इसी में है ऐसा सोचने वाले यहाँ भी कई ब्लॉगर हैं जो एक खास वाद के कुओं में जी कर खुद को समंदर का तैराक समझते हैं . एक साहब है कबाड़खाना के कबाडी कई सारे ब्लॉग लिखते हैं . हमारे सामुदायिक ब्लॉग से जुड़े एक बहस में जबाव देने के बजे भगवा और संघी बोलकर भाग गये . जबकि हमने पहले हीं कहा था और मंच का उद्देश्य ही है विभिन्न वाद/ विचार के लोगों के बीच संवाद कायम करना . पर यहाँ कुछ लोग अपने -अपने ग्रुप में लिखते हैं खुद ही टिपियाते हैं और खुश होते हैं . क्या इन्हें सेकुलर कहें ?

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  11. प्रवीण शाह जी, भारतीय संविधान में अनुच्छेद २५-२८ तक धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन है जिसमें प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना और धार्मिक प्रतीकों को धारण करने का अधिकार दिया गया है. परन्तु............... हमारे देश के संविधान निर्माताओं ने भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित नहीं किया था. धर्मनिरपेक्ष शब्द भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सन् १९७६ में ४२वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया (इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?) .

    और यहीं से इस "एक शब्द- secularism" के नाम पर वोट बैंक की राजनीति का जो खेल प्रारंभ हुआ उसने आज समाज को अनेक वर्गों में विभाजित कर दिया है. इसका सबसे घिनौना रूप है "तुष्टिकरण". एक वर्ग को खुश करने के लिए राष्ट्रीय हितों की बलि दे दी जाती है, ऐसे में अन्य वर्गों में असंतोष और प्रतिक्रियात्मक गुटों का उदय स्वाभाविक है (शायद इस शब्द को जोड़ने के पीछे मंशा यही थी). इस तुष्टीकरण को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है परन्तु शाहबानो केस, अफज़ल की फांसी, सच्चर कमिटी और तसलीमा नसरीन का भारत से निष्कासन कुछ ज्वलंत और लोगों के जेहन में ताजा उदाहरण है.

    जिस प्रकार कम्यूनिस्म एक आदर्श व्यवस्था होते हुए भी अपने धरातलीय व्यवहार के कारण घृणा का पात्र बन गया है उसी प्रकार सेकुलरिस्म भी एक राजनीतिक हथकंडा बन गया है जिसे अवसरवादियों से लेकर कम्यूनिस्ट तक सभी धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं.

    भारतीय संविधान के भाग ४ (अनु० ३१-५१) राज्य हेतु नीति निर्देशक तत्वों का वर्णन है जिसमे यह निर्देश दिया गया है की राज्य सभी नागरिकों हेतु एक "समान नागरिक संहिता" का निर्माण करेगा ( अनु० ४४). इसके अनुसार सभी नागरिकों हेतु एक समान कानून और न्याय व्यवस्था होगी.

    फिर "पर्सनल ला" किसलिए ?
    क्या यह संविधान की प्रस्तावना, नीति निर्देशक तत्वों और संविधान के प्रावधानों के बीच विरोधाभास नहीं पैदा करता? और यह विरोधाभास किसके द्वारा पैदा किया गया? निश्चित रूप से उन राजनीतिज्ञों द्वारा जो सेकुलरिस्म की वही परिभाषा गढ़ना चाहते थे जो कि आज दिखाई दे रही है.

    तो आज जो सेकुलरिस्म के अलमबरदार बने फिर रहे हैं वास्तव में इसे गाली बना देने का श्रेय भी उन्ही को जाता है.

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  12. इस लेख में तो गोबर बहुत भर दिया, इस पर किया लिखूं, उधर धान के देश आप मुझे सलीका सिखाके आये हो, उधर कमेंटस किया है आपके लिये परन्‍तु वह एक आँख को चश्‍मे में ढके रखने वाला ब्लागर पता नहीं पब्लिश करेगा या नहीं, इस लिये इधर भी किया बुराई है अगर है तो बताओ,

    @ प्रवीन शाह जी - मैं आपके मशवरे से पहले ही काशिफ साहब से कमेंटस लिखने का तरीका, सीख रहा हूँ, उनको बार बार कमेंटस करता हूं ताकि वह मेरा मार्गदर्शन करते रहा करें, विश्‍वास ना हो तो उनको रात उनके लेख ''ज़कात किसको देनी चाहिये??''Direct link this article
    पर कमेंटस किया है देख लें,
    वेसे भी उनका या उन जैसों का साथ अधिक बना रहे इस लिये हमने शुरू किया है
    hamarianjuman.blogspot.com
    Direct link काशिफ आरिफ के साथ उमर कैरानवी - 'हमारी अन्‍जुमन ब्लाग'

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  13. kamaaal hai praveen ji dono aaye aur yahaan bhi jhagadne lage
    hamare lucknow men wajid ali shah hue the navab
    unhone ek baar ayodya hanumaan garhi ke mudde par farmaya tha
    ham ishq ke bande hain hain majhab se nahi matlab
    kaba hua to kya butkhana hua to kya
    ye doosaron ko bura bhalaa kahne men hi ruchi rakhne waale kyaa jaane ishq kyaa hota hai mazhab kya hota hai aur mulk kya hota hai

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  14. secular paale men rah hi nahi sakta
    ise wo kya samjhenge jinpar dharmaandhata ka chshma chadha hua hai

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  15. भैया तुमने तो दोंनों तरफ से दुत्‍कार ही मिलनी है,वीर सावरकर नाम के ब्लाग ले आये तस्‍वीर तो बदल लेते,उधर चिपलूनकर साहब की नई पोस्‍ट पर पर मुखालफत करते हो इधर सपोर्ट में नया ब्‍लाग ले आये भाई तुम्‍हें तो दुत्‍कार ही दुत्‍कार मिलनी है, देख लो जा के और करो जरूर कुछ करो, कुछ ना करो तो कमसे कम मेरे से पंगा लेते रहा करो
    http://veer-sawarkar.blogspot.com/2009/09/sureshchiplunkarblogspotcom.html
    डायरेक्‍ट लिंक

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  16. i think that original concept of secularism is to separation of church(religion)and state,concept first coined in england and developed in English speaking countries.church was interrupting state affairs so this concept came into existence.(not concerned with religious affairs)this definition is not fit in any kind of secularism whether in Indian context or English context.

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  17. your definition of secularism is wrong plz. correct it....

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  18. http://jsmav.blogspot.com/2010/03/rama-shankar-vidrohi-six.html

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मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!