गुरुवार, 10 सितंबर 2009

सुरेश चिपलून्कर जी और स्वच्छ संदेश : हिन्दोस्तान की आवाज वाले सलीम खान साहब से कुछ सीखो मेरे साथी चिठ्ठा कारों ...Respect disagreement also...

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प्रिय मित्रों,
यूं बात है तो छोटी सी पर मुझे लगता है कि कम से कम अपना विरोध तो दर्ज करा ही दूं।
मैं बात कर रहा हूं टिप्पणी मॉडरेशन की, हर कोई टिप्पणी मॉडरेशन लगाये बैठा है, यहां तक कि कविता के चिठ्ठों पर भी,पिछले १४ दिनों में मेरी ही तकरीबन ४-५ टिप्पणियां इस मॉडरेशन की भेंट चढ़ चुकी हैं, रवैया यह है 'मीठा मीठा गप और दूसरा कोई भी स्वाद थू'
अब आप सुरेश जी या सलीम साहब का उदाहरण लें, विवादास्पद मुद्दे उठाने के बाद भी वे हर टिप्पणी को सम्मान से प्रदर्शित करते हैं जबकि कई में उनके ऊपर खुला आक्षेप लगा होता है, यह है असहमति का भी सम्मान जो हमारा और हर लोकतान्त्रिक समाज का स्टैन्डर्ड होना चाहिये।
कुछ चिठ्ठाकार तो इतने दोगले हैं कि दूसरों के पास जाकर तो बड़े खुल कर टिप्पणी देते हैं परंतु खुद के ब्लॉग पर वाटर टाइट मॉडरेशन है।
सोचो मित्रों....
क्या हम सही कर रहे हैं?
हमारे ब्लॉगिंग जगत के भविष्य के लिये क्या यह घातक प्रवृति नहीं, कहीं ऐसा न हो कि ब्लॉग जगत पर एक सा सोचने वालों का ही एकाधिकार हो जाये...

LET THOUSAND FLOWERS BLOOM,

LET EACH AND EVERYONE'S OPINION MATTER.

आमीन...

17 टिप्‍पणियां:

  1. टिपण्णी मोदेरेशन की सुविधा गूगल ने
    प्रदान की हैं और ब्लोगिंग का अर्थ हिंदी
    ब्लोगिंग मे केवल और केवल एक दूसरे
    के ब्लॉग पर जा कर हगना मूतना होता
    हैं सो जो लोग अपने घर मे गंदगी नहीं
    चाहते टिपण्णी मोदेरेशन लगाते
    हैं . आप नहीं लगना चाहते मत लगाए
    पर दूसरो को ना सीखाये की क्या
    सही हैं क्या गलत .

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  2. Dear Mr. Shah or "??",
    Let me correct you. just go to the blog of that great philosopher (My foot!) saleem suwar's blog and check his write up about Indian women, he posted 3-4 days back. In that write up he attached a objectionable photograph and when I showed that bas*** the mirror, he removed that photograph and deleted my two posts. Just check, and before reaching any conclusion veryfy the things.

    Tumne uskee taareef kee isliye wah jhat-pat aapkaa follower ban gaya.

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  3. Respect adversity also...,,

    कृपया उपरोक्त अंग्रेजी वाक्य का मतलब भी बताएँ।

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  4. प्रवीण शाह जी,

    ब्लॉग जगत में व्यक्तिगत विचारों के नज़रिए से भले ही सुरेश और मेरे विचार सामान न हों मगर कुछ मामलों में हमारा नज़रिया यक़्सा (समान) है... ये सुरेश भी जानते हैं...

    ख़ैर,

    प्रवीण जी, आपका कहना सही है, मैं अक़सर अपने किसी भी टिपण्णी को डिलीट नहीं करता, सिवाय कुछ (जो कि नगण्य होंगी) टिप्पणियों के जिनमें बहुत ही ज़्यादा अश्लील बातें होती हैं, आप समझ सकते हैं.....मैं क्या कहना चाहता हूँ...

    शुक्रिया...

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  5. 'मीठा मीठा गप और दूसरा कोई भी स्वाद थू' भाई लोगों मिलके कुछ तय करलो ब्लागिंग हित में आपकी बातें मानी जायेंगी, हमारी अन्‍जुमन ब्लाग की तरफ से मेरा वादा है
    hamarianjuman.blogspot.com
    डायरेक्‍ट लिंक हमारी अन्‍जुमन

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  6. kaha raja bhoj.......... kaha gangu teli

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  7. आम तौर पे मैं मॉडरेशन के खिलाफ हूँ | और आपकी बात से सहमत भी हूँ की कविता, कहानी वाली ब्लॉग पे मॉडरेशन का क्या मतलब !

    पर एक बात जरुर कहूंगा की मॉडरेशन कई जगहों पर जरुरी भी है | नहीं तो कहीं गंभीर बाते हो रही है और एक-दो आके पुरे माहौल को बिगाड़ जाते हैं | इसलिए वहां पे मॉडरेशन जरुरी है |

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    @ अनुनाद सिंह,
    शुक्रिया आपका, गलती मेरी है, सुधार कर दिया है, अब मतलब समझ आ जायेगा।
    आते रहें...

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  9. LET THOUSAND FLOWERS BLOOM,

    LET EACH AND EVERYONE'S OPINION MATTER.

    Agreed....

    पर एक बात जरुर कहूंगा की मॉडरेशन कई जगहों पर जरुरी भी है | नहीं तो कहीं गंभीर बाते हो रही है और एक-दो आके पुरे माहौल को बिगाड़ जाते हैं | इसलिए वहां पे मॉडरेशन जरुरी है |

    agreed.

    उत्तर देंहटाएं
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    @ anonymous (comment no. 1),
    क्या यह उचित नहीं होता कि आप बेनाम की जगह अपनी पहचान के साथ टिप्पणी करते, पता तो चलता सभी को कि आपकी यही राय है, किस बात से घबराते हैं आप?
    जिसे आप गंदगी कह रहे हैं हो सकता है वह टिप्पणी आपके असली चेहरे को उजागर कर रही हो...
    वैसे भी ब्लॉगिंग के मंच को बहुत ज्यादा साफ सफाई की आदत नहीं तथाकथित आभिजात्य पत्रिकायें हैं तो इसलिये...

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  11. आपत्तिअजनक भाषा न हो तो मै भी हर टिपण्णी प्रकाशित करता हूं,मगर कुछ लोग इस बात का नाजायज़ फ़ायदा उठाते है इसलिये माडरेशन ज़रूरी है।

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  12. प्रवीणजी,

    टिप्पणी मॉडरेशन को लेकर आपके विचारो को जाना। मॉडरेशन प्रणाली लागु करना हीतकारी है। किन्तु चिठाकारो को वो ही चिठ्ठे को मॉडरेट करने चाहिऍ जो बेनामी एवम कुन्टावश अपशब्द भाषा का प्रयोग किया हो। ऍसी किसी भी टिप्पणी को मोडरेशन के तहत नही रोकना चाहिऍ जो पोस्ट से सम्बन्धीत हो- भले ही उसमे कठोरता हो। कुछ अपवाद को छोड सभी चिठाकार पोस्ट से रिलेटेड खट्टी-मिठ्ठी सारी टिप्पणीयो को प्रसारित करते पाऍ गऍ है। अब आप देखे आपने मुम्बई टाईगर पर टिप्पणी की थी- आपको डर था कि आपकी नकारात्मक टिप्पणी है रिलिज नही होगी, किन्तु मुम्बई टाईगर पर तुरन्त ही रिलिज कि गई। एवम अदाजी ने उसका जवाब भी आपको टिप्पणी के माध्यम से दिया। कहने का मतलब विचारो से सहमती /असहमति का टिप्पणी प्रकासन पर प्रभाव नही पडता है- और नही पडना चाहिऍ।

    आभार
    ♥♥♥♥♥♥

    पाकिस्तानी ब्लोगरिया कहे छु छु कर रिया है ?


    SELECTION & COLLECTION
    हे! प्रभु यह तेरापन्थ

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  13. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम! इस बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई!

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  14. शुरू शुरू में मैं भी माडरेशन के खिलाफ था मगर कुछ लोगों की कृत्यों के चलते इसे न चाह कर भी लगाना पड़ा -कुछ लोग बहुत अश्लील हो जाते हैं ! बेलौस बिंदास खरी खोटी सुनाईये मगर सार्वजनिक स्थल पर विष्ठा न करिए !

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  15. प्रवीण जी, लगभग डेढ़ वर्ष पहले जब मैं हिन्दी ब्लॉग्स के संसार से जुड़ा था, तब मेरे भी विचार कुछ आप ही की तरह थे. बहुत प्रारम्भ में ही दीपक भारतदीप जी के एक ब्लॉग पर इस बारे में मैने अपने विचार रखे थे. (अब लिंक ढूंढ पाना कठिन है, उनके आठ-दस ब्लॉग हैं).

    लेकिन धीरे-धीरे मुझे ये अहसास हुआ कि कई स्थानों पर टिप्पणी मॉडरेशन आवशयक हो जाता है. सभी लोग अपने मन के भावों को (खास तौर पर नाराजगी के भावों को) उचित अभिव्यक्ति प्रदान करने में कुशल नहीं होते. ऐसे में कई बार गाली-गलौच से लेकर घटिया आरोप-प्रत्यारोप तक की नौबत आते देखी है. इस सब से बचा जा सकता है मॉडरेशन के द्वारा.

    मेरे विचार से यह व्यक्तिगत निर्णय है और इसी प्रकार स्वीकार किया जाना चाहिये. वैसे मैंने स्वयं अपने ब्लॉग पर अभी तक टिप्पणी मॉडरेशन लागू नहीं किया है.

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  16. मोडरेशन लगाना ठीक तो नहीं लगता. लेकिन स्पमर और पोर्न लिंक से बचने के लिए मजबूरी में लगाना पड़ता है.
    वैसे मैंने आजतक किसी की टिप्पणी डिलीट नहीं की, यथा संभव सबका जवाब ही दिया है.

    आपकी ताज़ी टिपण्णी का जवाब मेरे पोस्ट पर है. विचारोतेज्जक आलेख के लिए आपका धन्यवाद!!

    सुलभ

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मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!