शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

यह अस्वच्छ संदेश है अत: गुमराह न होईये...Don't allow anybody to misguide you...

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साफ सुथरे संदेश वाला एक ब्लॉग और उसको चलाने वाले खान साहब ने २३ सितम्बर को एक पोस्ट की है जिसमें धर्म स्थल जैसा शराब खाना और उसकी वजह से रोष के बारे में लिखा है और जैसा कि अक्सर होता है लोग लग गये हैं बिना खोजबीन किये उनकी हां में हां मिलाने...

जब यह पोस्ट छपी थी तब लेखक ने उसके साथ ३ लिंक भी दिये थे जिनमें सबसे पहला लिंक था

http://www.methodshop.com/2006/10/muslims-offended-by-apple-store.shtml

आइये पढ़ते हैं क्या लिखा है इस पेज पर...

10/12/2006
Muslims Offended by Apple Store
| 8:09 AM | ShareThis |


Jason O'Grady from PowerPage.org found an interesting research report that says the 5th Ave Apple Store is offensive to some Muslims. Why? Apparently the glass cube shape of the Apple Store entrance resembles the Ka'ba in Mecca (see image). The report, which was translated by The Middle East Media Research Institute (MEMRI), also finds problems in people referring to the glass cube as the "Apple Mecca," the store being open 24 hours a day like the Ka'ba, and because "alcoholic beverages" are served inside at a bar.

Obviously the offended Muslims in question have never actually been to the 5th Ave Apple Store. The only bar in the Apple Store is the Genius Bar and although the advice of a Genius Bar employee may be intoxicating, it isn't alcoholic. For those of you unfamiliar with the Apple Genius Bar, it's a booth inside the Apple Store where you can bring your broken iPod or computer and have them take a look at it. There are no alcoholic drinks served at the Genius Bar, just knowledge. The purpose of the Genius Bar must have gotten lost in translation. For the record, Apple Stores do not serve alcohol. People getting drunk and playing with expensive computers and iPods probably isn't a good idea.

As far as building a cube shaped store entrance that's open 24 hours a day.... Apple's 100% guilty of doing that. But can a simple glass cube really be blasphemous? Please write a comment below and share your thoughts.

digg story | methodshop

अब कुछ जानिये इस स्टोर के बारे में, देखिये एप्पल फिफ्थ एवेन्यू स्टोर , क्या सोचना है आपका?

अब यहां पर यह भी बताना सामयिक होगा कि यह स्टोर खुल गया था २० मई २००६ को...
Apple inc. ने आज तक कभी इसे Mecca या Kaba कह कर प्रचारित नहीं किया है...

असलियत बताता एक और बेहद खूबसूरत लिंक आपको दे रहा हूं।

महज अपने ब्लॉग को चर्चा में रखने के लिये धर्म के नाम पर साथी ब्लॉगरों को गुमराह करना क्या जायज है?
आपका निर्णय सर माथे पर...
फैसले के ईंतजार में...
आपका ही...
हिन्दी powered by Lipikaar

13 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए . हमने तो कर दिया है . सभी को सोचना चाहिए और अब ये कुछ भी करें , आप सभी से अनुरोध है नेगलेक्ट कीजिये . ऐसे में इनको बढावा मिलता है भले ही नकारात्मक लोकप्रियता मिलती हो . आपने जो लिंक दिया है उस ब्लॉग पर उक्त खान साहब की तरफ से एक अन्य दलाली करने पहुंचे थे और गीदड़ भभकी दे रहे थे "फुरसत में आउंगा तेरी तरफ, रोंद डालूंगा तब तक मुंह बंद करले और विचार कर "

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  2. जनाब, बहिष्कार शुरू हो चुका है. अब इनके ब्लाग पर जो दो चार लोग जाते है या टिप्पणियां करते है वे वही चेले चपाटे हैं या फिर फर्जी नामों से खुद ही टिप्पणिया ठेलते रहते है. कुछ एक नए मेहमान जो इनकी हरकतों से वाकिफ नहीं है भूले-भटके उधर चले जाते हैं लेकिन जल्द ही वे भी उनसे वाकिफ हो जायेंगे और किनाराकशी कर लेंगे. इन्हें नजरंदाज करें और बहिष्कार करें, यही इनका इलाज है.

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  3. "यह अस्वच्छ संदेश है अत: गुमराह न होईये...Don't allow anybody to misguide you..."

    आज की तारीख में तो सारा ब्लागजगत इस बात से वाकिफ है:))

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  4. बगैर पढ़े, बगैर तथ्यों को जाँचे परखे लिखने से यही हो्ता है… मैं इन्हें इस पोस्ट के लिये माफ़ी मांगने की सलाह दे चुका हूं… (उन्हें कहना चाहिये कि तथ्यों को जाँचने में मुझसे जल्दबाजी हुई है… हाँ यदि उनकी मंशा ही लोगों को गुमराह करने या भड़काने की हो तो फ़िर कुछ कहना बेकार है), जब मैंने "काबा एक शिव मन्दिर है" वाली पोस्ट लिखी तब उसमें अपनी तरफ़ से कुछ जोड़ने की कोशिश नहीं की, साफ़-साफ़ लिख दिया कि जो लिखा गया है, वह पीएन ओक की पुस्तकों और लेखों में पहले से ही है। लेकिन इस मामले में लेखक का थोड़ा अलग रुख है… अब देखते हैं आगे क्या होता है…

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  5. Mr. jairam - मैंने गीदड की नहीं कैरानवी भभकी दी थी, रात मैं आया मैं जाओ संभालो अपनी सेक्‍स चर्चा को,रौंद दिया उसे
    http://www.pravakta.com/?p=3659&cpage=1#comment-1083

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  6. हम इन्‍सान हैं और हर कोई मेरे की तरह सियाना नहीं है, एक दोस्त मुझसे धर्म के नाम पर सहायता मांगता है, मैं अपने दोस्‍त से सहायता मांगता हूं, उसको फोन पर कहता हूं कि इससे संबन्धित विडियो गूगल पर तलाश करना अधिक सार्थक रहेगा, बदकिस्‍मती से वह उतनी जानकारी को ही काफी समझ लेता है,
    फिर भी गौर करो तो उस दोस्त A.U.siddiqui को वहां जवाब देने को मैंने बाध्‍य किया है, उसने जवाब दिया भी है, अभी हम आपस मैं बात नहीं कर पाये कि अगर अगर अगर खता हुई है तो किसने की, कौन माफी मांगे?
    अगर पेशगी माफी चाहते हैं तो मैं माफी मांगता हूं

    signature:
    कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा हैं या यह Big game against islam? है
    antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

    इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज
    islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

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  7. अच्‍छा लिखते हो, मौके पर लिखते हो, लिखो क्‍यूं ना शायद तुम्‍हारी रगों में सावरकर नस्‍ल का खून दौड रहा है, मेरा अनुमान है कि तुम मेरे बिछुडे भाई हो, तुम्‍हार सुन्‍दर मुखडा मेरे से अत्‍यधिक मिलता है, तुम किस शहर के वासी हो, यह हम इसलिये पूछ रहे हैं कि फिर हम अपने पिताजी से पूछेंगे कि वह भी कभी आपके शहर गये हैं कि नहीं, अगर नहीं गये तो यह चमत्‍कार कैसे होगया, लगता सब प्रभु की माया है

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  8. सावरकर के नाम से चिट्ठालेखक को गाली देना अपराध है. आश्चर्य है चिट्ठालेखक टिप्पणी को समझ नहीं रहा.

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  9. "महज अपने ब्लॉग को चर्चा में रखने के लिये धर्म के नाम पर साथी ब्लॉगरों को गुमराह करना क्या जायज है?"

    अजी जबसे यह ब्लोग बना है तब से 'अपने ब्लॉग को चर्चा में रखने के लिये धर्म के नाम पर साथी ब्लॉगरों को गुमराह करने' के सिवा आज तक और किया ही क्या है?

    इनका एक ही इलाज है - न इनका लिखा पढ़ो और न इन्हें अपने ब्लोग में टिप्पणी करके अपने ब्लोग को गंदा करने दो।

    अन्य लोगों लो उकसा कर और भड़का कर निगेटिव्ह पब्लिसिटी पाना और अपने दुष्प्रचार को बढ़ावा देना ही एकमात्र इनका उद्देश्य है।

    आपसे भी अनुरोध है कि अशिष्ट भाषा और दुष्प्रचार के लिंक वाली टिप्पणियों को मिटा दें।

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  10. मेरे समझदार ब्लोगरों, क्या तुम सबको इसकी डिजाईन काबा से मिलती जुलती नहीं लगती अगर नहीं लगती है तो यक़ीनन आँख के डॉक्टर को दिखलाना चाहिए.

    हमें लगा कि यह श़क्ल में काबा जैसा है और उन लोगों को ऐसा नहीं बनाना चाहिए (आप सबको याद होगा उन्होंने हमारे प्यारे नबी (स.) का कार्टून भी बनाया था, नौज़ुबिल्लाह)... भले ही उनका मक़सद कुछ भी हो लेकिन धुआं तो उड़ता ही है, यक़ीनन आग लगी होगी तभी तो...

    हाँ, यह मैं मानता हूँ कि मैंने इस पर गहन अध्ययन नहीं किया... मुझे उमर भाई ने मेल करके इस बात की जानकारी दी और मैंने उसे पोस्ट किया, उनको A.U. SIDDIQUI साहब ने ईमेल किया था.

    मैं कैरानवी भाई की बात को ही दोहराना चाहता हूँ, अगर वास्तव में आपको लगता हमें इस मुद्दे पर क्षोभ नहीं होना चाहिए, अगर वास्तव में आपको लगता है कि हमें जो चीज़ गलत लगे उसका विरोध नहीं करना चाहिए, अगर वास्तव में आपको लगता है कि वे हमें उकसाते रहें और हम नपुंसक बने बैठे रहें.... तो आपका सबका कहना सही है कि मैं ग़लत हूँ.

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  11. अपने मुंह मियां मिट्ठू , बनना तो कोई आपसे सीखे . क्य्का किसी को असभ्य भाषा से , अनर्गल प्रतिक्रिया से रौंदा जा सकता , वैसे तो रौंदना यह शब्द ही आपकी मानसिकता को दर्शाता है . ब्लॉग पर भी हिंसक ! क्या करें इसके अलावा तो कुछ सीख भी नहीं पाए होंगे आप अपने घर में ! अफ़सोस है कि लेखनकर्म में में भी तलवारबाजी करना चाहते हैं . वैसे आज मुझे लग रहा है कि मैं कुछ तो कर रहा हूँ सही दिशा में तभी तो लोग रौंदने को तैयार हैं .

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    संजय बैगाणी जी,
    मैं सब कुछ समझ रहा हूँ...

    "मेरा अनुमान है कि तुम मेरे बिछुडे भाई हो, तुम्‍हार सुन्‍दर मुखडा मेरे से अत्‍यधिक मिलता है, तुम किस शहर के वासी हो, यह हम इसलिये पूछ रहे हैं कि फिर हम अपने पिताजी से पूछेंगे कि वह भी कभी आपके शहर गये हैं कि नहीं, अगर नहीं गये तो यह चमत्‍कार कैसे होगया, लगता सब प्रभु की माया है"

    वीर सावरकर के नाम पर ब्लॉग चलाने वाला कोई शख्स ऐसी टिप्पणी नहीं दे सकता, यह कोई बहुरूपिया है, कौन है, जानने के लिये पढें इसी तथ्य से संबंधित पोस्ट पर की गई मेरी टिप्पणी।

    चलिये जाने दीजिये इस जैसे तुच्छ लोग कुछ समय बाद खुद ही बेपर्दा हो जायेंगे...बिना हमारे किसी प्रयत्न के...

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