.
.
मेरे अशक्त मित्रों,
अभी-अभी अंग्रेजी साप्ताहिक 'आउटलुक' की यह खबर पढ़ी... आप भी पढ़िये...
आज भारत यदि वैश्विक परिदॄश्य में एक उभरती ताकत के तौर पर जाना-माना जाता है तो इसके पीछे हमारे IIT's व IIM's का एक अहम योगदान है... परंतु हमारी सरकारें स्वायत्तता की दुहाई देकर पिछले दरवाजे से IIM's के निजीकरण की तैयारी कर रही हैं...

Waakai chinta ki baat hai.
प्रत्युत्तर देंहटाएं-------------
क्या ब्लॉगिंग को अभी भी प्रोत्साहन की आवश्यकता है?
इन संस्थानों के छात्र सेवा भी तो उन्हीं धन झोलाओं की करते हैं।
प्रत्युत्तर देंहटाएंसामाजिक क्षेत्र को तो प्रबंधन की जरूरत नहीं, वहाँ आने लगे तो नेताओं का क्या होगा?
चिन्तनीय है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंयहां कौन आम आदमी के बच्चे जाते हैं, कोई गाहे—बगाहे एकआध फंस भी गया तो फांस सा दिखता है साथियों को, वर्ना बुर्जुआ लोगों की जगह है ये यूं भी.
प्रत्युत्तर देंहटाएंवैसे भी प्रबंधन शिक्षण है क्या? वही कौशल जो अपने कंधे पर भी वही धन-झोला लटकाने का सामर्थ्य प्रदान करे।
प्रत्युत्तर देंहटाएंmoney matters.
प्रत्युत्तर देंहटाएंएक खास किस्म का समाजवाद झेल रहा है ये मुल्क !
प्रत्युत्तर देंहटाएंकितनी अजीब बात है।
प्रत्युत्तर देंहटाएं............
ब्लॉगिंग को प्रोत्साहन चाहिए?
लिंग से पत्थर उठाने का हठयोग।
फिलहाल यही नियति सी है...
प्रत्युत्तर देंहटाएंबुरी खबर
प्रत्युत्तर देंहटाएंकहाँ हो ? कभी कभी लिखते रहा करो यार !
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुभकामनायें !