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मेरे सज्जन मित्रों,
सबसे पहले तो डिस्क्लेमर:-
जो कुछ भी यहाँ लिख रहा हूँ उसमें मेरा मौलिक कुछ नहीं है, पहले भी बड़े-बड़े कह चुके हैं यही सब, मैं तो एक बार फिर से दोहरा रहा हूँ, बस!
हाँ तो यह तर्क कुछ इस तरह से है...
मान लीजिये आप वास्तविक तौर से...भीतर और बाहर दोनों से...एक बहुत ही अच्छे (सज्जन) आदमी/औरत हैं... और मैं आपके सामने दो विकल्प रखता हूँ...
सर्वशक्तिमान, परमानिधान, ईश्वर या और जो भी आप कहें उसका या तो...
१- अस्तित्व है ही नहीं ।
२- अथवा यदि उसका अस्तित्व है तो वह दुष्ट(EVIL) प्रकृति का है ।
तो आप ऐसे किसी भी सर्वशक्तिमान या ईश्वर को मानोगे ही नहीं...न ही कभी उसका गुणगान करोगे... क्योंकि अच्छाई कभी भी दुष्टता का साथ नहीं देती...
कोई आस्तिक भी इस तर्क को नकार नहीं सकता कि उसे एक दुष्ट ईश्वर की पूजा नहीं करनी चाहिये तथा अस्तित्वहीन के बारे में तो कुछ करने या कहने की जरूरत ही नहीं...
अब चर्चा करते हैं ईश्वर के कृत्यों के बारे में...
धर्म चाहे कोई भी हों सभी के धर्मग्रंथों में ऐसे प्रसंगों का वर्णन है...
जहाँ पर ईश्वर ने अपने भक्त की परीक्षा लेने के लिये उसे अपने किसी प्रियजन की बलि देने को कहा, तथा उस भक्त द्वारा ऐसा करने पर उस से प्रसन्न हुआ यानी ईश्वर अपने प्रति भक्त की वफादारी को नैतिक मूल्यों से ऊपर रखता है। जबकि एक अच्छा ईश्वर यह चाहेगा कि भक्त भय और उसके प्रति वफादारी को नजरअंदाज कर मानवीय मूल्यों, दया और करूणा को ऊपर रखे तथा ऐसे किसी दुष्ट कृत्य से साफ मना कर दे।
ऐसे प्रसंग भी हर धर्मग्रंथ में हैं जहाँ ईश्वर ने जानबूझकर किसी भक्त को दुख-परेशानियाँ दी हैं अपने प्रति उसकी वफादारी की परीक्षा करने के लिये, क्या कोई अच्छी और न्यायपूर्ण ताकत महज अपने प्रति वफादारी सुनिश्चित करने के लिये एक बेकसूर को इतना सता सकती है ?
फिर हर धर्मग्रंथ मे वही ताकत अपना बखान करते हुऐ स्वयं को अच्छे-बुरे से परे भी बताती है।
और सबसे बड़ी बात यह है कि उसी के राज में कुदरती दुष्टतायें (natural evils) जैसे भूकंप और बीमारियाँ भी मौजूद हैं तथा वह मानवीय दुष्टताओं (human evils) जैसे अपराध या धर्म के नाम पर मारकाट को रोकने का भी कोई प्रयास नहीं करता।
उपरोक्त सभी तथ्य और तर्क यह साबित करते हैं कि या तो ईश्वर नाम की कोई ताकत नहीं है और यदि है तो वह दुष्ट (evil) है ।
तो सज्जनों, बताईये क्या पाओगे, या पाना चाहते हो आप, विश्वास करके एक अस्तित्वहीन या दुष्ट (evil) ताकत में ?
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मेरे सज्जन मित्रों,
सबसे पहले तो डिस्क्लेमर:-
जो कुछ भी यहाँ लिख रहा हूँ उसमें मेरा मौलिक कुछ नहीं है, पहले भी बड़े-बड़े कह चुके हैं यही सब, मैं तो एक बार फिर से दोहरा रहा हूँ, बस!
हाँ तो यह तर्क कुछ इस तरह से है...
मान लीजिये आप वास्तविक तौर से...भीतर और बाहर दोनों से...एक बहुत ही अच्छे (सज्जन) आदमी/औरत हैं... और मैं आपके सामने दो विकल्प रखता हूँ...
सर्वशक्तिमान, परमानिधान, ईश्वर या और जो भी आप कहें उसका या तो...
१- अस्तित्व है ही नहीं ।
२- अथवा यदि उसका अस्तित्व है तो वह दुष्ट(EVIL) प्रकृति का है ।
तो आप ऐसे किसी भी सर्वशक्तिमान या ईश्वर को मानोगे ही नहीं...न ही कभी उसका गुणगान करोगे... क्योंकि अच्छाई कभी भी दुष्टता का साथ नहीं देती...
कोई आस्तिक भी इस तर्क को नकार नहीं सकता कि उसे एक दुष्ट ईश्वर की पूजा नहीं करनी चाहिये तथा अस्तित्वहीन के बारे में तो कुछ करने या कहने की जरूरत ही नहीं...
अब चर्चा करते हैं ईश्वर के कृत्यों के बारे में...
धर्म चाहे कोई भी हों सभी के धर्मग्रंथों में ऐसे प्रसंगों का वर्णन है...
जहाँ पर ईश्वर ने अपने भक्त की परीक्षा लेने के लिये उसे अपने किसी प्रियजन की बलि देने को कहा, तथा उस भक्त द्वारा ऐसा करने पर उस से प्रसन्न हुआ यानी ईश्वर अपने प्रति भक्त की वफादारी को नैतिक मूल्यों से ऊपर रखता है। जबकि एक अच्छा ईश्वर यह चाहेगा कि भक्त भय और उसके प्रति वफादारी को नजरअंदाज कर मानवीय मूल्यों, दया और करूणा को ऊपर रखे तथा ऐसे किसी दुष्ट कृत्य से साफ मना कर दे।
ऐसे प्रसंग भी हर धर्मग्रंथ में हैं जहाँ ईश्वर ने जानबूझकर किसी भक्त को दुख-परेशानियाँ दी हैं अपने प्रति उसकी वफादारी की परीक्षा करने के लिये, क्या कोई अच्छी और न्यायपूर्ण ताकत महज अपने प्रति वफादारी सुनिश्चित करने के लिये एक बेकसूर को इतना सता सकती है ?
फिर हर धर्मग्रंथ मे वही ताकत अपना बखान करते हुऐ स्वयं को अच्छे-बुरे से परे भी बताती है।
और सबसे बड़ी बात यह है कि उसी के राज में कुदरती दुष्टतायें (natural evils) जैसे भूकंप और बीमारियाँ भी मौजूद हैं तथा वह मानवीय दुष्टताओं (human evils) जैसे अपराध या धर्म के नाम पर मारकाट को रोकने का भी कोई प्रयास नहीं करता।
उपरोक्त सभी तथ्य और तर्क यह साबित करते हैं कि या तो ईश्वर नाम की कोई ताकत नहीं है और यदि है तो वह दुष्ट (evil) है ।
तो सज्जनों, बताईये क्या पाओगे, या पाना चाहते हो आप, विश्वास करके एक अस्तित्वहीन या दुष्ट (evil) ताकत में ?
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25 पाठकों ने टिप्पणी की,आप भी करिये न...:
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