रविवार, 14 सितंबर 2014

वो कौन था ? (धारावाहिक फेसबुक कहानी या जो कुछ भी आप इसे कहना चाहें (भाग-2))

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वो कौन था ?

(धारावाहिक फेसबुक कहानी या जो कुछ भी आप इसे कहना चाहें)

31 नवम्बर 2014 (भाग-2)

'गोल्फ़' द्वारा मिला मेरा आज का टास्क है कि मुझे अपनी वाल का हर फेसबुक स्टेटस एकदम एकाग्र हो पढ़ना है, क्योंकि उन्हीं में मेरा अगला असाइनमेंट छुपा है। अब आप पूछेंगे कि गोल्फ़ कौन ? दरअसल वह गोल्फ़ नहीं बल्कि 'यूनिफार्म गोल्फ़' यानी उदित गौरांग है, उसी ने रात साढ़े तीन बजे नींद से जगाकर मुझे यह फ़ोन किया था।सोलह साल पहले मैं जब सिख बटालियन का कंपनी कमांडर था तो वह मेरा सीओ था, आज वह एजेंसी में मेरा हैंडलर है और मैं उसका एजेंट।

छह साल की फ़ौज की नौकरी में बार बार जमीन पर बूट ठोंक खुली लाइन, निकट लाइन, सलामी शस्त्र और बाजू शस्त्र करने-करवाने वाले और मिलिटेंट की तलाश में अपने एरिया के चप्पे चप्पे में राइफल हाथ लिये भटकने वाले इस खाकसार में इतना दिमाग कहाँ बचा था कि वह फेसबुक-ब्लॉग के इतने प्रबुद्ध पाठक समूह में घुसपैठ कर उसका सदस्य बन पाता। मुझसे ब्लॉगिंग और फेसबुकिंग करवाना भी गोल्फ का ही एक प्रोजेक्ट है, मेरा नाम दरअसल उसी के बचपन के मित्र का नाम है, कभी कभार वह अपनी ओर से कुछ लिख कर भी भेज देता है, जिसे मैं छाप देता हूँ और वाहवाही मिल जाती है मुझे भी... 

तो चार स्टेटस तो मैं पढ़ चुका हूँ, और तब तक अपनी फेसबुक वाल के स्टेटस ही पढ़ता रहूँगा, जब तक मुझे वह 'खास' स्टेटस नहीं मिलता।

नीचे स्क्रॉल करता हूँ...

नवीन राजहंस ने स्टेटस लगाया है कि वह किसी IIT गया और उसे कैंपस की सब लड़कियां हीरोइन जैसी दिखीं... जरुर नज़र ख़राब है बच्चे की...  मैं टीपता हूँ "नज़र का धोखा"

अमित शर्मा ने संस्कृत में कोई श्लोक लिखा है और नीचे लिखा है कि प्राचीन भाष्यकारों ने इसमें एक शब्द का अर्थ वृषभ यानी बैल का मांस गलत लिखा है, जबकि वृषभ तो चिन्चपोक्ली नामक स्थान में हर तीसरे साल तीस फरवरी को जमीन के अंदर उगने वाला एक कंद है और छंद में उसके माँस यानी गूदे को खाने के बारे में लिखा है ।
'वैभव हर स्थान का' ने इस पर टीपा है "भैय्या, वही तो, ब्रह्मा जी ने जब इन्सान को बनाया था तो साथ में खाने की एक मैन्युअल भी दी थी, तब का इंसान मांस तो खा ही नहीं सकता किसी भी हाल में, यह लिंक देखिये चालीस हजार साल पहले भी नाश्ते में कॉर्नफ़्लेक्स और दूध होता था, kelogg के रैपर मिले हैं खुदाई में मानव अवशेषों के साथ!"
कंठनाज़ जैन सर्वज्ञ जी ने अमित से इस लेख को अपने ब्लॉग 'मीटखोरों को जीने नहीं दूँगा!" में छापने की अनुमति मांगी है।
मैंने टीपा 'भाई मेरे आज के नाश्ते में कोई भी कंद नहीं है...  '

परदेस बैठे सुपर स्टार ब्लॉगर ख़मीर डाल 'उड़नकटोरा' जी ने एक बार फिर एक बड़े से बियर भरे मग की तस्वीर लगाई है, मग पर लिखा है 970, बैकग्राउंड में धुंधले से वह स्वयं भी दिख रहे हैं। साथ में दो लाईनें भी हैं...
बुलबुले उठते रहे
और हम डूबते भी...
फाड़ू स्टेटस है यह, अभी तक 1699 लाइक मिल चुके हैं और 697 कमेंट भी... मेरे दिमाग में दो टीपें आईं ' अब हज जायेंगे' और 'बियर चीज ही ऐसी है' पर उन जैसे गुरुजन के साथ मज़ाक करना मेरे बस में नहीं, इसलिये लाइक किया और टीप में स्माइली बनाई और आगे बढ़ गया।

हरदिलअज़ीज विद्वान प्रोफेसर Ali Syed आजकल कुछ ज्यादा ही 'मुक्त अनुभव' कर रहे हैं स्वयं को, आज स्टेटस दिये हैं "असली आना जाने में है।"
अब मुझ जैसे पूर्व फौज़ी का कुंद दिमाग तो इसका मतलब निकाल नहीं सकता, दन्न से लाइक किया, स्टेटस के शब्द गिने, पाँच हैं, अब 'कंठनाज़ जैन सर्वज्ञ' जी प्रति शब्द इक्कीस के हिसाब से 105 टिप्पणियाँ व्याख्या करती हुईं जब इस स्टेटस पर ठेल चुके होंगे और हस्तशिल्प सवाली जी के हर सवाल का जवाब भी दे चुके होंगे, तभी ज्ञानार्जन के लिये यहाँ आना उचित रहेगा।

एकदम नीचे ही 'कंठनाज़ जैन सर्वज्ञ' का नया स्टेटस भी चल रहा है "असली जाना आने में है"
लगता है खूब एक्शन होगा यहाँ पर।
जयपुर की 'नज़्म जुबानी' जी यहाँ फरमाती हैं "हुं, कहीं पढ़ा है पहले।"
और 'लो चना खावजी' की टीप है "असली मजा भुने चने खाने में है।"
यहाँ भी आना ही होगा शाम को, फ़िलहाल लाइक जड़ता हूँ मैं... 
और हाँ, रचना ने लिखा है "uninteresting!"

जारी......

...
प्रवीण 'सुनिये मेरी भी' 'वो कौन था ?' का पहला भाग पढ़ने के लिये देखें... https://www.facebook.com/praveenblogger/posts/682354105192563
प्रवीण 'सुनिये मेरी भी'
तो लीजिये मेहरबान-कद्रदान, आज से हम निकलते हैं इस सफर पर... सच कहूँ तो… See More
Like1MoreSep 8 at 6:46am
PN Subramanian इते भी जारी है
Unlike2DeleteSep 8 at 8:22am
Vani Geet interesting! 
LikeDeleteSep 8 at 8:28am
LikeDeleteSep 8 at 8:29am
प्रवीण 'सुनिये मेरी भी'    यह इतनी चुप्पी अच्छी नहीं मित्रों, कुछ तो कहो।
Like2MoreSep 8 at 8:29am
Vani Geet नज़्म ज़ुबानी का पता मिल जाए तो फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दूँ 
EditedUnlike4DeleteSep 8 at 8:33am
प्रवीण 'सुनिये मेरी भी' जरुर, ढूंढ़ता हूँ पता अभी... 
Like2MoreSep 8 at 8:33am
Ali Syed उसे उसका पता दो, जो खुद से खुद ही लापता हो 
Unlike1DeleteSep 8 at 8:36am
अमित शर्मा सबको भांडने के चक्कर में कथा में मांड नहीं चढ़ रहा हैं 
अभी तो ये भूमिका ही बाँधते नज़र आ रहे है।
कहानी की मांग पे अमित शर्मा को चाहे गोबर ही खिलाना पड़े, पर कहानी एकदम कंटान हो 
Unlike5DeleteSep 8 at 9:05am
डॉ किरण मिश्रा शैली मत बदले वही कहानी का मजा है .....
Unlike1DeleteSep 8 at 10:19am
नवीन राजहंस कहानी धीरे धीरे अपने रूप में आ रही है।
Unlike1DeleteSep 8 at 10:26am
हंसराज सुज्ञ कहानी एक दम से अपने असली रूप में आ गई है 
Unlike3DeleteSep 8 at 5:06pm
अर्चना चावजी हा हा हा ... 
'लो चना खावजी' की टीप ही असली टीप है ......   मजाल ही नहीं किसी की कि उनकी टीप तक पहूंचे ...... आज तक कोई उनका नाम भी सही नहीं लिख पाया है ... .....
Unlike7DeleteSep 8 at 6:57pm
अर्चना चावजी ये जयपुर की नज़्म जुबानी का नाम लेकर दुखती रग पर हाथ रख दिया है आपने ... कट्टर विरोधी हैं वे चना खावजी जी की ...
Unlike5DeleteSep 8 at 8:45pm
निंदक नियरे राखिये लम्बी कहानी की अभी शुरूआत भर है. सुधीजन धैर्य धरें.
यह प्रयोग निश्चय ही दिलचस्प रहेगा.
Unlike2DeleteSep 10 at 11:38am
Unlike1DeleteSep 10 at 11:17